बिहार में भाजपा की सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार वाली सद्भाव की राजनीति किनारे हो गई है और टकराव की राजनीति बढ़ गई है। राज्य सरकार ने पहले राबड़ी देवी को मिला बंगला खाली करने का नोटिस दिया और ऐलान किया कि हर हाल में उनको बंगला खाली करना होगा। उसके बाद लालू प्रसाद से लेकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तक सबकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई। लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मिली जेड प्लस सुरक्षा घटा कर वाई प्लस कर दी गई है। तेजस्वी की सुरक्षा में भी कमी की गई है। इसके बाद राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने सुरक्षा लौटा दी। सुरक्षाकर्मियों को बंगले से विदा कर दिया। साथ ही अपील करके अपने समर्थकों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ एक के बाद एक हो रही ऐसी कार्रवाई से यादव वोट ज्यादा मजबूती से परिवार से जुड़ रहा है। अगर 14 फीसदी यादव राजद के साथ रहते हैं तो 18 फीसदी मुस्लिम भी पूरी तरह से साथ रहेंगे। ऐसा लग रहा है कि भाजपा की सरकार ने यादव वोट टूटने की संभावना समाप्त कर दी है। इससे राजद की ताकत बढ़ी है। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि बिहार की राजनीति में राजद अब भी एक बड़ी ताकत है। उसके पास भले 25 और उसके नेतृत्व वाले गठबंधन की 35 सीटें हैं लेकिन उनके पास 38 फीसदी वोट हैं। ऊपर से नीतीश कुमार के हटने की वजह जदयू कमजोर हुई है। इससे जातियों का नया समीकरण हो रहा है। जमीनी स्तर पर जातियां अपने को नए समीकरण के लिए तैयार कर रही हैं। इसमें एकाध जातियों का वोट भी राजद की ओर मुड़ा तो उसको बड़ा फायदा हो सकता है।


