ब्रिक्स मानों व्हाट्सएप समूह
जब गोल्डमैन सैक्स ने 2001 में “ब्रिक्स (BRICs)” शब्द गढ़ा था, तब यह कोई ठोस संगठन नहीं था, बस, उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन—के जमवाड़े का एक कल्पनाशील, आकर्षक संक्षिप्त नाम था। पर दुनिया ने उसे भविष्य की आर्थिक ताक़त के रूप में देखा। लेकिन 2009 तक आते-आते यह शब्द आर्थिकी, आँकड़ों की ताकत का नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग लेने लगा। और जब इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, तो ब्रिक्स (BRICS) एक वास्तविक मंच बन गया—पाँच अलग भूगोल, पाँच अलग आवाज़ें, पर एक साझा ख्याल कि एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था बने जो केवल पश्चिम के इर्द-गिर्द न घूमे।...