BRICS

  • ब्रिक्स में आईएफएस बनाम आईएंडबी

    हाल में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में नई दिल्ली डिक्लेरेशन को लेकर जितनी चर्चा हुई उससे ज्यादा चर्चा तरह तरह की तस्वीरों औऱ वायरल वीडियोज को लेकर हुई। कहीं प्रधानमंत्री की नरेंद्र मोदी की वीडियो वायरल हुई, जिसमें वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ पकड़ कर खींच रहे हैं तो कहीं बस में भाजपा नेताओं के साथ बैठे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फोटो वायरल हुई। पहले ही दिन एक महिला पत्रकार ने विदेश मंत्रालय की ओर से पत्रकारों को दिए गए किट को खोल कर एक एक चीज की वीडियो बनाई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल...

  • ब्रिक्स की बातों से बनेगा क्या?

    ब्रिक्स को लेकर कूटनीतिक और सामरिक जानकारों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग ऐसा है, जो मानता है कि इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है और इससे भारत को कुछ भी हासिल नहीं होगा। सुरजीत भल्ला जैसे आर्थिक जानकार और राजेश राजगोपालन जैसे विश्व मामलों के जानकार इस श्रेणी में आते हैं। दूसरी ओर जानकारों का एक समूह है, जो मानता है कि यह पश्चिमी दुनिया के वर्चस्व के बीच संतुलन बनाने वाला मंच है और नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि मौजूदा विश्व व्यवस्था के बीच एक वैकल्पिक बहुपक्षीय मंच उभरा...

  • ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद वे कहीं नहीं दिखे। अमित शाह लगभग पूरी तरह से ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भी बिजनेस फोरम की बैठक हो या बाद का आयोजन वे इससे दूर रहे या शामिल हुए भी तो यह प्रयास किया कि किसी तरह...

  • ब्रिक्स से दक्षिण की राजनीति पर नजर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुर की किताब तिरूवक्कुल की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के नेताओं का स्वागत जिस बैकग्राउंड में किया वह तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर का था। हालांकि कहने को कहा जा सकता है कि हर वैश्विक कार्यक्रम में देश के किसी न किसी हिस्से का बैकग्राउंड बनाया जाता है, जिसके सामने प्रधानमंत्री विश्व नेताओं का स्वागत करते हैं। इसलिए इसमें कुछ ज्यादा राजनीतिक पहलू देखने की जरुरत नहीं है। लेकिन इन दोनों घटनाक्रमों में दक्षिण भारत और खास कर तमिलनाडु...

  • यह एक इवेंट के मेन्यू का मामला नहीं है

    ब्रिक्स सम्मेलन का समापन हुआ तो जितनी चर्चा साझा घोषणापत्र, विश्व नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोपक्षीय वार्ताओं और दुनिया भर के नेताओं के भाषण की हुई उतनी ही चर्चा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक सोशल मीडिया पोस्ट की हुई, जिसमें उन्होंने दिल्ली की मशहूर डिश ‘छोले-भटूरे’ की फोटो डाली थी और लिखा था कि देश की 80 फीसदी आबादी मांसाहारी है। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी लिखा था कि नॉन वेज खाना उतना ही स्वादिष्ट होता है, जितना उनकी बहन के हाथ के बने ‘छोले भटूरे’। जाहिर है राहुल गांधी का मकसद किसी की भावना...

  • ब्रिक्स के दौरान सर्जियो गोर दिल्ली छोड़ गए

    दिल्ली में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा था। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आए थे। यह बहुत बड़ा घटनाक्रम था। दो साल पहले दिल्ली में हुए जी 20 शिखर सम्मेलन में ये दोनों नेता शामिल नहीं हुए थे। उसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत आए थे। इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग और पुतिन दोनों का आना बड़ी बात थी। उनके अलावा ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के नेता...

  • कई देशों के साथ मोदी की दोपक्षीय वार्ता

    नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कई देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की। ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी की दोपक्षीय वार्ताएं शुरू हुईं, जो शाम तक जारी रहीं। मोदी ने रविवार को फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर के साथ दोपक्षीय बैठक की। उन्होंने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव के साथ भी दोपक्षीय बैठक की। इससे पहले शनिवार को उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा ईरान, मलेशिया, यूएई आदि देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की थी। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की एक...

  • ब्रिक्स ने सुरक्षा परिषद में भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का किया समर्थन

    ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया है। भारत और ब्राजील लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी कर रहे हैं। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में भारत और ब्राजील की इस आकांक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराया है। शनिवार को यहां भारत की मेजबानी और अध्यक्षता में आयोजित दो दिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाये गए दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हुए सुरक्षा...

  • पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के भीतर बाजार पहुंच बढ़ाने पर दिया जोर

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के भीतर बाजार पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और एक-दूसरे की पेशेवरों डिग्रियों को मान्यता देने की अपील की। श्री गोयल ने यहां भारत मंडपम् में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुल वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है। उन्होंने आर्थिक सहयोग के लिए पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए अधिक बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला विविधता और आसान नियामक प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। सत्र को रूस से आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव, भारत के...

  • ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी में दिखेगा देश का डीप-टेक नवाचार

    भारत की डीप-टेक नवाचार क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए 'ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी' का आयोजन 11 और 12 सितंबर को यहाँ भारत मंडपम में किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके और विदेश मंत्रालय के समन्वय से इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत की अध्यक्षता में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि प्रदर्शनी में भारत के 37 डीप-टेक स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्यम हिस्सा ले रहे हैं। ये सभी वर्ष 2026 में आयोजित भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में...

  • ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे रूस, ईरान, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के नेता

    भारत की मेजबानी में यहां शनिवार से शुरू होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सदस्य देशों के नेताओं के आगमन का सिलसिला जारी है और शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) के अध्यक्ष जू जियायी यहां पहुंच गये। दो दिन के इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले सभी नेताओं का हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता...

  • ब्रिक्स के लिए तीन दिन बंद रहेगी दिल्ली!

    नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन के लिए पूरी दिल्ली तीन दिन बंद रहने वाली है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स लीडरशिप समिट होने वाली है। उससे पहले 11 सितंबर को हर जगह छुट्टी की घोषणा हो गई है। सरकारी कार्यालयों को बंद रखने की घोषणा पहले कर दी गई थी और रविवार को दिल्ली के सभी स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया गया है। इस तरह शुक्रवार से रविवार, 11 से 13 सितंबर तक स्कूल, सरकारी कार्यालय आदि बंद रहेंगे। ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में होगा। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ज्यादातर...

  • बहुपक्षीयता की बातें कम

    ईरान और यूएई के प्रतिनिधियों में हुई झड़प मिसाल है कि बदली विश्व परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स+ के सदस्य ना सिर्फ अलग धरातल पर खड़े हैं, बल्कि वे परस्पर विरोधी रुख भी खुलेआम अपना रहे हैं। ब्रिक्स+ देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की नई दिल्ली में हुई बैठक एक बार फिर इस समूह के अंदर गहरा रहे मतभेदों को उजागर कर गई। बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों की बीच हुई झड़प मिसाल है कि बदली विश्व परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स+ के सदस्य देश ना सिर्फ अलग धरातल पर खड़े हैं, बल्कि अब वे परस्पर...

  • ब्रिक्स+ का विभाजित कुनबा

    जब दुनिया बेहद नाजुक दौर में है, ब्रिक्स+ साझा विज्ञप्ति तक जारी नहीं कर पाया, तो उससे आज की प्रमुख समस्याओं के हल के लिए किसी साझा हस्तक्षेप की कितनी उम्मीद की जा सकती है? ब्रिक्स+ के विदेश मंत्रियों की नई दिल्ली में हुई बैठक ने इस समूह में चौड़ी होती खाइयों और इसकी उड़ती चमक को उजागर किया। नई दिल्ली बैठक ब्रिक्स+ के अंदर गहराए मतभेद और सदस्य देशों में उद्देश्य की विभिन्नताओं का साक्षी बनी। सवाल उठा कि जिस वक्त दुनिया एक बेहद नाजुक दौर में है, वैसे मौके पर यह समूह एक साझा विज्ञप्ति तक जारी नहीं...

  • ब्रिक्स अध्यक्ष भारत, पर अध्यक्षता में भी मौन!

    1 जनवरी 2026 को भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। ब्राजील से यह जिम्मेदारी लेकर भारत को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन करना था। विस्तारित ब्रिक्स अब दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है…ब्राजील हमलों की संयुक्त निंदा के लिए तैयार था। दक्षिण अफ्रीका ने भी वही संकेत दिया था। चीन और रूस अपने रणनीतिक कारणों से सहमत थे। नए सदस्य—ईरान, मिस्र और इथियोपिया—भी उसी दिशा में झुके हुए थे। केवल एक देश पीछे रहा—भारत। जब बम गिर रहे हों, स्कूल ढह रहे हों और उसी समय कोई नेता गोल्फ खेलता दिखाई दे, तो वह...

  • मोदी सरकार, ब्रिक्स+ और श्रमिक नजरिया

    ब्रिक्स+ बदलाव का एक प्रतीक है। इसलिए इसके महत्त्व को कम-से-कम श्रमिक वर्ग को अवश्य समझना चाहिए। ... भारत सरकार इस मामले में जो भी रुख अपनाए, भारत के मेहनतकश तबकों को इसके महत्त्व को अवश्य समझना चाहिए। भारत सरकार ब्रिक्स+ के महत्त्व के मुताबिक इसके शिखर सम्मेलन को अहमियत दे, इसके लिए उन्हें दबाव बनाना चाहिए। इसकी वजह यह है कि ब्रिक्स+ मौजूदा विश्व व्यवस्था के साम्राज्यवादी ढांचे के लिए एक चुनौती बन कर उभरा है। नये साल में भू-राजनीति के लिहाज से भारत के लिए सबसे बड़ा मौका ब्रिक्स+ समूह के शिखर सम्मेलन की मेजबानी के रूप में...

  • ब्रिक्स मानों व्हाट्सएप समूह

    जब गोल्डमैन सैक्स ने 2001 में “ब्रिक्स (BRICs)” शब्द गढ़ा था, तब यह कोई ठोस संगठन नहीं था, बस, उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन—के जमवाड़े का एक कल्पनाशील, आकर्षक संक्षिप्त नाम था। पर दुनिया ने उसे भविष्य की आर्थिक ताक़त के रूप में देखा। लेकिन 2009 तक आते-आते यह शब्द आर्थिकी, आँकड़ों की ताकत का नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग लेने लगा। और जब इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, तो ब्रिक्स (BRICS) एक वास्तविक मंच बन गया—पाँच अलग भूगोल, पाँच अलग आवाज़ें, पर एक साझा ख्याल कि एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था बने जो केवल पश्चिम के इर्द-गिर्द न घूमे।...

  • टैरिफ, ब्रिक्स और भारत

    भारत उन देशों में है, जिसने समझौते के लिए अति-उत्साह दिखाया, लेकिन समयसीमा आने तक वह व्यापार वार्ता को अंजाम तक नहीं पहुंचा सका। और अब ‘रूस और ब्रिक्स टैरिफ’ का साया उस पर मंडरा रहा है। तो अब भारत सरकार क्या करेगी? डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के इतने अधिक आयाम हैं कि उनके प्रशासन से व्यापार समझौता करना किसी के लिए आसान नहीं है। दरअसल, उनके अधिकारियों ने आरंभ में ही यह साफ कर दिया कि मुद्दा सिर्फ आयात शुल्क का नहीं है। बल्कि आयात शुल्क को हथियार बना कर ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पूरे सिस्टम को...

  • चीन के लिए ब्रिक्स+ की अब अहमियत नहीं?

    चीन कई मुद्राओं के सह-अस्तित्व और उनके बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर डॉलर का वर्चस्व तोड़ना चाहता है। चूंकि ब्रिक्स+ में इस पर या विश्व सुरक्षा व्यवस्था को नया रूप देने की सामूहिक इच्छाशक्ति अभी नहीं है, तो संभवतः चीन ने इसकी भूमिका पर पुनर्विचार किया है। संभव है कि शी जिनपिंग का रियो ना जाना इसका पहला ठोस संकेत हो। क्या चीन ने अपनी विश्व रणनीति में ब्रिक्स+ समूह की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन किया है? या वह इस ग्रुप के भीतर अपनी भूमिका फिर से तय करने की प्रक्रिया में है? ये प्रश्न इस खबर के सार्वजनिक होने के...

  • कठिन मोड़ पर भारत

    लुटनिक ने कहा कि भारत ने रूस से हथियार खरीद कर अमेरिका को नाराज किया है। इसके अलावा वह ब्रिक्स का सदस्य है, जिसका मकसद डॉलर को चुनौती देना है। उन्होंने कहा- इन मामलों में भारत को राह बदलनी होगी। यह संकेत तो पहले से था कि डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर का मकसद सिर्फ आयात शुल्क में रियायतें पाना नहीं है। बल्कि इसके जरिए वे विश्व व्यापार और यहां तक कि भू-राजनीति को भी अमेरिकी हित में पुनर्गठित करना चाहते हैं। इसमें रहे-सहे संदेह को भी उनके वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दूर कर दिया है। उन्होंने कूटनीतिक मर्यादाओं...

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