सीमित पारदर्शिता भी अच्छी शुरुआत

अदालती कार्यवाही में पारदर्शिता को लेकर बहुत दिन से सवाल उठ रहे थे। देश की सर्वोच्च अदालत पिछले कुछ समय से इस प्रयास में दिख रही थी कि किसी तरह से बुनियादी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए ताकि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों का भरोसा बढ़े।

चीफ जस्टिस भी आरटीआई के दायरे में

नई दिल्ली। अदालती कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि चीफ जस्टिस का पद भी सूचना के अधिकार कानून, आरटीआई के दायरे में होगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की थी और इस साल चार अप्रैल को सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। उससे पहले इस फैसले का ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस के कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए 2010 में पहली बार याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया था और कहा था कि चीफ जस्टिस एक ऐसा पद है जो पब्लिक अथॉरिटी के अंदर आता है। अदालत ने कहा था कि सूचना का अधिकार और निजता का अधिकार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2010 के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी की अपील… Continue reading चीफ जस्टिस भी आरटीआई के दायरे में

सीजेआई आरटीआई के दायरे में या नहीं, फैसला 13 नवंबर को

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को इस बात का फैसला करेगा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अंतर्गत आएंगे या नहीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायामूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति एन.वी. रमना,  न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना वाली इस पीठ ने 4 अप्रैल को मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का कार्यालय सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में आता है। सुप्रीम कोर्ट के महासचिव द्वारा इस निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की गई, जिस पर अब शीर्ष न्यायालय का फैसला बुधवार को आएगा। सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल (एजी) के.के. वेणुगोपाल ने कहा था कि सीजेआई के कार्यालय के अधीन आने वाले कॉलेजियम से जुड़ी जानकारी को साझा करना न्यायाधीशों और सरकार को शर्मसार करेगा और न्यायिक स्वतंत्रता को नष्ट कर देगा। अदालत से जुड़ी आरटीआई का जवाब देने का कार्य केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी का होता है। आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंदर अग्रवाल की ओर से गुरुवार को बात… Continue reading सीजेआई आरटीआई के दायरे में या नहीं, फैसला 13 नवंबर को

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