Economic Crisis

  • माली मुश्किलों का आईना

    प्रधानमंत्री के साथ अर्थशास्त्रियों की बजट पूर्व बैठक में अर्थव्यवस्था की मुश्किलें खुल कर सामने आईं। अर्थशास्त्रियों ने ब्याज चुकाने की बढ़ी देनदारी, कमजोर होती घरेलू बचत, और सरकार के बढ़े पूंजीगत निवेश से आई दिक्कतों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में उपस्थित अर्थशास्त्रियों ने अर्थव्यवस्था में पैदा हुई मुश्किलों का उल्लेख किया। उन्होंने ब्याज (और ऋण का मूलधन भी) चुकाने की बढ़ती देनदारी, कमजोर होती घरेलू बचत, और सरकार के बढ़े पूंजीगत निवेश के कारण निजी निवेश के सामने आई दिक्कतों का जिक्र किया। कहा कि पूंजीगत निवेश के लिए सरकार अधिक ऋण लेती है,...

  • यही तो अंदेशा था

    जीएसटी कटौती से एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री में अक्टूबर में हुई बढ़ोतरी नवंबर में गायब हो गई। बाजार का दीर्घकालिक रुझान भी जारी रहा है। एसयूवी की बिक्री खूब बढ़ी है, मगर छोटी कारों के मामले में मामूली बढ़ोतरी ही दर्ज हुई। धूम-धड़ाके से “बचत उत्सव” मनाने के बाद अब बारी उसकी कीमत चुकाने की है। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस को लाल किले से जीएसटी ढांचे में बदलाव का एलान किया था। नवरात्रि के साथ नई दरें लागू हुईं, तो यह धारणा बनाने की कोशिश हुई कि भारतीय बाजार में मांग एवं उपभोग की कमी से उपजी तमाम आर्थिक समस्याओं...

  • ऋण का बोझ घटा?

    असल कहानी मीडिया हेडलाइन्स के नीचे कहीं छिपी होती है। ताजा रिपोर्ट को ही लें, तो उससे यह कहानी भी उभरती है कि फ़ौरी उपभोग के मकसद से लिए गए ऋण की मात्रा असल में बढ़ी है। vv मीडिया के एक हिस्से ने इसी रिपोर्ट से हेडलाइन निकाली है कि भारत में घरेलू कर्ज की मात्रा जून 2024 की तुलना में पिछले दिसंबर तक आकर एक प्रतिशत प्रतिशत घट गई। जून 2024 में घरेलू ऋण जीडीपी की तुलना में 42.9 प्रतिशत था। दिसंबर 2024 में 41.9 फीसदी रहा। हालांकि दिसंबर 2023 (40 प्रतिशत) और जून 2021 (36.6 प्रतिशत) की तुलना...

  • उन्हीं आंकड़ों से अंदर

    आर्थिक वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान वित्तीय सेवाओं और कंस्ट्रक्शन का रहा। कंस्ट्रक्शन का 8.4 प्रतिशत रहा, जो 12 साल में सबसे ऊंचा है। वित्तीय सेवाओं का योगदान 21.7 प्रतिशत रहा। मगर मैनुफैक्चरिंग और शहरी उपभोग की स्थिति चिंताजनक बनी रही। सकल घरेलू उत्पाद के 2024-25 की अंतिम तिमाही- और उसके साथ ही स्पष्ट हुए पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों को लेकर मोटे तौर पर दो तरह की सुर्खियां बनीं। एक यह कि चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर अपेक्षा से बेहतर रही। दूसरी यह कि आर्थिक वृद्धि की दर गिरी। वैसे एक सुर्खी यह भी बनी कि कोरोना महामारी...

  • अमेरिका में आर्थिक आशकाएं

    ट्रंप इस बार 2017 में बनी ‘बिजनेस प्रेसीडेंट’ की छवि बरकरार नहीं रख पाए हैं। ट्रंप का दावा रहा है कि पहले कार्यकाल में उन्होंने ‘रिकॉर्ड ग्रोथ, कम महंगाई, और उज्ज्वल व्यापार संभावनाओं का रिकॉर्ड बनाया’ था। मगर इस बार उलटा हो रहा है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आर्थिक मंदी की संभावना से इनकार नहीं किया है। कई थिंक टैंक और मीडिया संगठनों ने इसी वर्ष मंदी आने का अनुमान लगाया है। अमेरिकी शेयर बाजारों में लगातार गिरावट का रुख है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से वहां तीन ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान निवेशकों को...

  • आर्थिक संकट से जूझ रहा हिमाचल प्रदेश: जयराम ठाकुर

    शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर (Jairam Thakur) ने मंगलवार को सुक्खू सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि केंद्र से प्रदेश को हर संभव सहायता मिल रही है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि हिमाचल प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जयराम ठाकुर ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “हिमाचल प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति आई है कि सितंबर की तीन तारीख बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। हिमाचल प्रदेश आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझ रहा है। लेकिन, राज्य...

  • जो जमीनी हालात हैं

    मीडिया हेडलाइन्स से भारत की खुशनुमा तस्वीर उकेरने की कोशिश अक्सर होती रहती है। लेकिन जो जमीनी हालात हैं, वे इससे नहीं बदल सकते। विडंबना है कि इन हालात को बदलने की कोशिश के बजाय विकसित भारत का खोखला सपना दिखाया जा रहा है। अभी हाल में 2023-24 के अनुमानित सरकारी आर्थिक आंकड़े जारी हुए, तो उनसे पता चला कि इस वित्त वर्ष में (दो अपवाद वर्षों को छोड़ कर) भारत की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि 21 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष यह वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही। बीते 21 वर्षों में सिर्फ 2019-20...

  • डगमगाती विकासशील अर्थव्यवस्थाएं

    जिन देशों की अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात का बड़ा योगदान रहा है, उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण है पश्चिम- खासकर यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मंदी। यूरोप में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। उस स्थिति उनके बीच उपभोग और मांग घटना स्वाभाविक परिघटना है। चीन की इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के आर्थिक आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहे। हालांकि अप्रैल-जून की अवधि में चीनी अर्थव्यवस्था 6.3 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन यह वृद्धि पिछले साल के कमजोर आधार पर है। चीन में पिछला पूरा साल कोरोना प्रभावित रहा था, जिसका उसकी अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा। इस वर्ष सुधार के संकेत...

  • श्रीलंका को वित्तीय मदद जारी रखेगा भारत

    Economic Crisis :- भारत ने सबसे बड़े आर्थिक संकट से उबरने के श्रीलंका के प्रयासों का समर्थन करने में ‘रचनात्मक भूमिका’ निभाने की अपनी इच्छा की पुन: पुष्टि की है। कोलंबो में निर्माण, बिजली एवं ऊर्जा एक्सपो 2023 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भारत के उप उच्चायुक्त विनोद के जैकब ने शुक्रवार को कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच हाल में गहरे हुए संबंधों ने दोनों देशों के बीच दोस्ती और सर्वांगीण सहयोग को मजबूत किया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस साल जनवरी में आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की ऋण प्रक्रिया शुरू करने के लिए श्रीलंका को आवश्यक...

  • पाकिस्तान पर मेहरबान चीन ने बरसाया डॉलर

    China help आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अपने करीबी सहयोगी चीन से एक अरब डॉलर मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से ऋण सहायता मिलने को लेकर अनिश्चितता के बीच बेहद कम विदेशी भंडार से जूझ रहे देश को इस मदद से काफी राहत मिलेगी। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने शुक्रवार की रात इस बारे में कोई अन्य विवरण साझा किए बिना चीन से राशि मिलने की पुष्टि की। पाकिस्तान का मुद्रा भंडार हाल के सप्ताहों में घटकर लगभग 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक रह गया था। इससे पहले, वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा था कि...

  • सरकार क्या किसी आर्थिक संकट में है?

    केंद्र सरकार क्या किसी आर्थिक संकट में है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सरकार कहीं से भी पैसा जुटाने की मुहिम में लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक से उसे इस बार करीब 90 हजार करोड़ रुपए का लाभांश मिलना है। सोचें, भारत के केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले कुछ समय से बहुत उतार चढ़ाव वाला रहा। डॉलर की कीमत को बढ़ने से रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने बाजार में बहुत डॉलर निकाला। इसके अलावा बढ़ते आयात बिल और अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार छह सौ अरब डॉलर से नीचे आ...

  • अमीर अमेरिका में खजाना खाली!

    अमेरिका क़र्ज़ के भंवर में है। और यह संकट काफी गंभीर है – इतना गंभीर कि इसके कारण राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपनी आगामी विदेश यात्राएं रद्द कर दीं हैं। उन्होंने हिरोशिमा में जी7 देशों की बैठक में भाग लेने के बाद अमेरिका वापस लौटने का निर्णय लिया है। क्वाड देशों के नेताओं की शिखर बैठक में हिस्सा लेने के लिए उनकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा रद्द हो गई है। वे अब पापुआ न्यू गिनी भी नहीं जा रहे हैं, जो कि किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति की प्रशांत महासागर में स्थित इस आइलैंड नेशन की पहली यात्रा होती। अमेरिका का खजाना खाली...

  • कराहते पाकिस्तानी, पर नेता बेफिक्र!

    रमजान का पाक महीना चल रहा है लेकिन पाकिस्तानी मोहताज है खाने-पीने की चीजों के! पाकिस्तान अपने कर्ज न चुका पाने की स्थिति में पहुँच गया है। वह भुखमरी और सामाजिक उथल-पुथल की कगार पर है। गरीब बेसहारा हो गए हैं और मध्यमवर्गीय भिखारी। खाद्य सामग्री के लिए लगने वाली कतारें हर हफ्ते बड़ी होती जा रही हैं और आटा-दाल के ट्रक लूटे जा रहे हैं। परेशानहाल औरतें, बच्चे और बुजुर्ग थैला भर अनाज के लिए घंटों लंबी-लंबी लाईनों में खड़े रहते हैं और धक्का-मुक्की, हाथापाई और कुचले जाने जैसी तकलीफें भुगतते हैं। ऐसे ही एक अनाज व नगदी वितरण...

  • पाकिस्तान के दिवालियापन के लिए मौजूदा व्यवस्था जिम्मेदार: रक्षा मंत्री

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के रक्षा मंत्री (Defense Minister) ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने कहा है कि देश पहले ही दिवालिया हो चुका है। उन्होंने मौजूदा आर्थिक संकट (economic crisis) के लिए सेना (army), नौकरशाही (bureaucracy) और राजनीतिक नेताओं (political leaders) को जिम्मेदार ठहराया। अपने गृह नगर सियालकोट में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को खुद को स्थिर करने के लिए अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार ने उनके हवाले से कहा, आपने सुना होगा कि पाकिस्तान दिवालिया हो रहा है। यह पहले ही हो चुका है। हम एक दिवालिया देश...

  • सुधार का विकल्प नहीं

    आईएमएफ के बोर्ड ने अभी सिर्फ बांग्लादेश को राहत दी है। इससे यह संकेत जरूर मिला है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद पाकिस्तान और श्रीलंका से अधिक मजबूत है। लेकिन बांग्लादेश को भी कठिन सुधार लागू करने ही होंगे। इस वक्त एक ऐसी स्थिति हमारे सामने है, जब भारत के तीन पड़ोसी देश आर्थिक संकट में फंस चुके हैँ। तीनों ने आस अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से जोड़ी, लेकिन बोर्ड ने अभी सिर्फ बांग्लादेश को राहत दी है। इससे यह संकेत जरूर मिला है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद पाकिस्तान और श्रीलंका से अधिक मजबूत है। पाकिस्तान और...

  • भारत चुप क्यों बैठा है?

    पाकिस्तान के आजकल जैसे हालात हैं, मेरी याददाश्त में भारत या हमारे पड़ौसी देशों में ऐसे हाल न मैंने कभी देखे और न ही सुने। हमारे अखबार पता नहीं क्यों, उनके बारे में न तो खबरें विस्तार से छाप रहे हैं और न ही उनमें उनके फोटो देखे जा रहे हैं लेकिन हमारे टीवी चैनलों ने कमाल कर रखा है। वे जैसे-तैसे पाकिस्तानी चैनलों के दृश्य अपने चैनलों पर आजकल दिखा रहे हैं। उन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, क्योंकि पाकिस्तानी लोग हमारी भाषा बोलते हैं और हमारे जैसे ही कपड़े पहनते हैं। वे जो कुछ बोलते हैं, वह...

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