चुनावी रण में बढ़ी Rahul Gandhi की मुश्किलें! असम में रोजद्रोह के एक हजार मामले दर्ज कराएगी BJP

असम में भाजपा की ओर से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही जा रही है।

हिमंता के निशाने पर सोनोवाल और महंत!

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाएं खत्म कर दी हैं।

भाजपा के नए सुपरमैन हिमंता बिस्वा सरमा!

मिजोरम के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में वे नाकाम रहे हैं और इस मसले पर दोनों राज्यों के बीच हिंसक झड़प भी हुई है। फिर भी इससे उनकी योग्यता और क्षमता का आकलन नहीं किया जा सकता है।

भाजपा में भी बाहरी नेताओं की पूछ

ऐसा नहीं है कि सिर्फ कांग्रेस पार्टी बाहर से आए नेताओं को तरजीह दे रही है, ऊंचे पद दे रही है और पार्टी के पुराने नेताओं को कार्यकर्ता बना कर रख रही है, भारतीय जनता पार्टी भी यह काम कर रही है।

एक देश के ही भीतर!

इसीलिए जब ये खबर आई कि असम सरकार ने अपने निवासियों को मिजोरम ना जाने की सलाह दी है, तो एक किस्म का सदमा लगा। लेकिन जल्द ही ये खबर भी आई कि मिजोरम में हाल में हुई हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में दायर एफआईआर में असम के मुख्यमंत्री को भी अभियुक्त बनाया गया है।

असम सीएम पर मिजोरम में मुकदमा!

दो राज्यों के बीच सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प में पांच पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों के मारे जाने के बाद अब एक और अभूतपूर्व घटना हुई है। आजाद भारत के इतिहास में संभवतः पहली बार किसी राज्य की पुलिस ने दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री के ऊपर एफआईआर दर्ज की है

नगालैंड में नहीं रहेगा विपक्ष!

भाजपा के नेता भी मोटे तौर पर इसके लिए तैयार हैं। कहा जा रहा है कि 24 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शिलांग दौरे के बाद किसी समय इसका फैसला किया जा सकता है। हालांकि पूर्वोत्तर में एनडीए की जिम्मेदारी संभाल रहे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि उनको इस बारे में जानकारी नहीं है.

हिमंता के बाद सिंधिया की ताजपोशी

Himanta Biswa Sarma jyotiraditya scindia : यह सवाल भारतीय जनता पार्टी के नेता उठा रहे हैं कि आखिर पार्टी क्यों अपने लोगों को छोड़ कर दूसरी पार्टी से आए नेताओं को इतनी तरजीह दे रही है। असल में भाजपा एक रणनीति के तहत यह काम कर रही है। वह कांग्रेस मुक्त भारत के अपने नारे को पूरा करने के लिए कांग्रेस के ऐसे चेहरों को ऊंचे पदों पर बैठा रही है, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर या उसकी आलोचना करके पार्टी से बाहर हुए हैं। इसी योजना के तहत भाजपा ने छह साल पहले कांग्रेस छोड़ने वाले हिमंता बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाया है। राहुल गांधी के साथ उनके विवाद को बहुत हाईलाइट किया गया था। हिमंता सरमा को मुख्यमंत्री बनाने का तात्कालिक फायदा जितिन प्रसाद के रूप में हुआ। हिमंता की ताजपोशी ने जितिन को प्रेरित किया कि वे पाला बदलें और भाजपा के साथ जाएं। यह भी पढ़ें: सरकार में कम हुआ बिहार का महत्व! इसी तरह पिछला साल कांग्रेस की मध्य प्रदेश सरकार गिरवा कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा सदस्य बनाने के बाद कैबिनेट मंत्री बनाना भी बहुत से कांग्रेस नेताओं को प्रेरित करेगा कि भाजपा की ओर प्रस्थान करें।… Continue reading हिमंता के बाद सिंधिया की ताजपोशी

सबको पीछे छोड़ देंगे हिमंता सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐसा लग रहा है कि बेसिरपैर के बयानों में सभी नेताओं को पीछे छोड़ देने का संकल्प किया है। उनका मुकाबला भाजपा के ही नेताओं से है और इस मुकाबले वे फिलहाल आगे निकलते दिख रहे हैं। वे रिकार्ड बना रहे हैं। चुनाव से पहले बिना मास्क के प्रचार करते देख कर उनसे रिपोर्टर ने इस बारे में पूछा था तब सरमा ने कहा था कि सब लोग मास्क लगाने लगेंगे तो ब्यूटी पार्लर वालों का कामकाज कैसे चलेगा। जब उन्होंने यह बयान दिया था तब लगा था कि यह इतिहास में दर्ज होने वाली बात हो गई और अब वे इससे फूहड़ बयान नहीं दे सकते हैं। लेकिन उन्होंने खुद ही अपना रिकार्ड तोड़ दिया। यह भी पढ़ें: बंगाल की चुनावी लड़ाई अब अदालत में हिमंता सरमा ने असम के सभी विपक्षी विधायकों से कहा है कि वे भाजपा में शामिल हो जाएं। कांग्रेस के चार बार के विधायक रूपज्योति कुर्मी के भाजपा में शामिल होने के मौके पर सरमा ने कहा कि विपक्ष के विधायक पांच साल विपक्ष में रह कर क्या करेंगे। इसलिए उनको भाजपा में शामिल होकर राज्य के विकास के लिए काम करना चाहिए। सोचें, उनको लोकतंत्र का… Continue reading सबको पीछे छोड़ देंगे हिमंता सरमा

Two Child Norm in Assam : दो बच्चों से ज्यादा हुए तो सरकारी फायदों से होना पड़ सकता है वंचित!

नई दिल्ली। Two Child Norm in Assam : ‘बच्चे दो ही अच्छे’ नारे को सही ठहराते हुए असम सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। असम के मुख्यमंत्री (Assam Chief Minister) हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि, राज्य में दो से अधिक बच्चों के माता-पिता को सरकारी योजनाओं के फायदे से वंचित किया जा सकता है। इसलिए जनाब, अब बच्चे एक या दो ही कीजिए, नहीं तो कई फायदे आपके हाथ से निकल सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण नीति असम में सभी योजनाओं पर तुरंत लागू नहीं होगी। ये भी पढ़ें :- Weekly rashifal astrology : कैसा रहेगा सप्ताह, क्या कहते हैं आपके सितारे और ग्रह—नक्षत्र कई योजनाओं पर लागू नहीं हो सकती ये नीति असम के सीएम सरमा ने कहा कि, केन्द्र सरकार की कुछ ऐसी योजनाएं ऐसी हैं जिनके लिए हम दो बच्चे की नीति लागू नहीं कर सकते हैं। लेकिन, राज्य सरकार की कुछ योजनाओं में दो बच्चों के मानदंड को रखा जा सकता है। ये भी पढ़ें :- Monsoon सक्रिय, आज कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, गंगा खतरे के निशान से ऊपर, हर की पौड़ी सील पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों का मानदंड बता दें कि वर्तमान में असम पंचायत… Continue reading Two Child Norm in Assam : दो बच्चों से ज्यादा हुए तो सरकारी फायदों से होना पड़ सकता है वंचित!

क्षत्रपों को मजबूत करेगी भाजपा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र में सात साल तक एकछत्र राज करने के बाद अब लग रहा है कि संघ और भाजपा की रणनीति बदल रही है। अब पार्टी राज्यों में अपने क्षत्रपों को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। तभी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात निकली है। इससे पहले भी भाजपा अपने मुख्यमंत्रियों के चेहरे पर लड़ती रही है और उसमें अपेक्षाकृत अच्छी सफलता मिली है। जैसे महाराष्ट्र में पार्टी दूसरा चुनाव देवेंद्र फड़नवीस के चेहरे पर लड़ी थी, झारखंड में रघुवर दास और हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के चेहरे पर लड़ी। गुजरात में भी पार्टी ने विजय रूपानी को मुख्यमंत्री का दावेदार बता कर चुनाव लड़ा था। इनमें हरियाणा और गुजरात में पार्टी जीती। महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनने का कारण दूसरा रहा पर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा और झारखंड में भी पार्टी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। यह भी पढ़ें: मोदी का चेहरा बचाना या कुछ और बात? तभी कहा जा रहा है कि जिन प्रदेशों में भाजपा के पास मजबूत नेता हैं उनको आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी नेतृत्व और संघ की ताकत उनके पीछे लगेगी। पार्टी को लग रहा है कि उनके जरिए ही… Continue reading क्षत्रपों को मजबूत करेगी भाजपा

पीएम की नसीहत, कैबिनेट में शिकायत सुनों!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को बड़ी नसीहत दी है। सरमा ने बताया है कि प्रधानमंत्री ने उनको अपनी सरकार को अधिकतम लोकतांत्रिक बनाना चाहिए ताकि उनके पास तक निगेटिव फीडबैक पहुंचे। इसके लिए प्रधानमंत्री ने उनको कैबिनेट की बैठक में एक जीरो आवर यानी शून्य काल रखने को कहा। जिस तरह संसद और विधानसभाओं में शून्य काल के दौरान जरूरी मुद्दे उठाए जाते हैं उसी तरह से कैबिनेट की बैठक में शून्य काल के दौरान मंत्री अलग अलग स्रोत से मिली निगेटिव फीडबैक मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। निगेटिव फीडबैक का मतलब है कि सरकार के कामकाज को लेकर जनता की जो शिकायतें हैं वो मुख्यमंत्री के पास पहुंचेंगी। इसके लिए सारे मंत्री विधायकों से मिलते रहेंगे और उनसे उनके क्षेत्र के बारे में फीडबैक लेंगे और उनसे जो भी शिकायतें मिलेंगी उनको कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले वरिष्ठ या इस काम के लिए निर्धारित मंत्री या मंत्रियों को दिया जाएगा और फिर वरिष्ठ मंत्री इस बारे में मुख्यमंत्री को बताएंगे। फिर तत्काल उन शिकायतों के समाधान पर विचार होगा। सोचें, कितनी अच्छी बात है। क्या प्रधानमंत्री इसे अपनी सरकार में भी लागू करेंगे? कम से कम अभी तक तो केंद्र सरकार में… Continue reading पीएम की नसीहत, कैबिनेट में शिकायत सुनों!

तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

देश के अलग अलग राज्यों के कम से कम तीन विधायक केंद्र सरकार में मंत्री बनने के दावेदार बताए जा रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को केंद्र में मंत्री बनना है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उनको हरी झंडी मिली हुई है। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? ध्यान रहे वे नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में मंत्री थे और 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उनको असम का मुख्यमंत्री बनाया था। इस बार भी उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी जीती है पर उनकी बजाय हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया है। तभी से सोनोवाल को एक बार फिर दिल्ली लाने की चर्चा तेज हो गई है। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है। हिमंता सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी के पास करने को कुछ नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार बहरहाल, सोनोवाल के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं, जिनको पिछले दिनों ही हटाया गया था। वे एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और कहा जा रहा है कि केंद्र में मंत्री… Continue reading तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

छह साल पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हिमंता बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला भाजपा के लिए आसान नहीं था। भाजपा ने वैचारिक प्रतिबद्धता की कसौटी को किनारे करके सरमा को मुख्यमंत्री बनवाया। भाजपा नेताओं को पता है कि सरमा की एकमात्र प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री की कुर्सी है। आज वे भले बदरूद्दीन अजमल को गालियां देते हैं और उनके नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं लेकिन एक समय था, जब कांग्रेस में रहते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने अजमल के साथ मिल कर तब के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सत्ता पलटने का खेल रचा था। यह अलग बात है कि उसमें उनको सफलता नहीं मिली थी। सो, सरमा की वैचारिक प्रतिबद्धता और कुर्सी के लिए उनके मोह के बारे में जानते हुए भी भाजपा आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनवाया तो इसका कारण मजबूरी है। असम की भी मजबूरी और समूचे पूर्वोत्तर की चिंता में पार्टी ने उनको राज्य की कमान सौंपी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार सरमा मुख्यमंत्री से कम किसी चीज पर राजी नहीं होने वाले थे। उन्होंने विधानसभा का चुनाव इसी शर्त पर लड़ा था कि चुनाव के बाद वे मुख्यमंत्री बनेंगे। अन्यथा उन्होंने चुनाव लड़ने से मना… Continue reading पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

कांग्रेस से बाहर जाकर सीएम बनते नेता

अगर इस बात की पड़ताल की जाए कि सबसे ज्यादा किस पृष्ठभूमि का लोग मुख्यमंत्री हैं तो हैरान करने वाला नतीजा आएगा। इस समय भले 18 राज्यों में भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकार है पर हकीकत यह है कि देश में इस समय सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले हैं। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की पृष्ठभूमि वालों के मुकाबले ज्यादा मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जो या तो कांग्रेस के हैं या कांग्रेस छोड़ कर दूसरी पार्टी में गए हैं या कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई है। इस कड़ी में सबसे ताजा नाम हिमंता बिस्वा सरमा का है। उन्होंने तो महज छह साल पहले ही कांग्रेस छोड़ी। राहुल गांधी की अनदेखी से नाराज होकर उन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़ी थी और सोमवार को उन्होंने असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भाजपा ने उनको मुख्यमंत्री बनाया है। इसी महीने में दो और नेताओं ने मुख्यमंत्री पद की शपथ, जो पहले कांग्रेस में थे। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और पुड्डुचेरी में एन रंगास्वामी ने इस महीने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ये दोनों पहले कांग्रेस में थे और कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी। कांग्रेस से अलग होने के बाद रंगास्वामी दूसरी बार और ममता बनर्जी… Continue reading कांग्रेस से बाहर जाकर सीएम बनते नेता

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