घुप्प अंधकार की खाई
इस्लामी व्यवस्था की समर्थक शक्तियां अब बांग्लादेश की राजनीतिक मुख्यधारा का हिस्सा हैं, जिनका वैचारिक या सांगठनिक मुकाबला करने वाली कोई शक्ति प्रभावशाली नहीं रह गई है। समाज उग्रता एवं चरमपंथ की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है। बांग्लादेश में हिंसा और उपद्रव की ताजा घटनाओं का संकेत है कि वहां ऐसी चिनगारियां लगातार सुलग रही हैं, जो कभी भी देश को दीर्घकालिक अराजकता में धकेल सकती हैँ। महजबी कट्टरपंथ ने सूरत-ए-हाल को और खतरनाक बना रखा है। यह साफ है कि पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन के कारण हुए तख्ता पलट के बाद बनी अस्थायी सरकार सामाजिक स्थिरता...