Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

Myanmar Army Cruelty म्यांमार की सेना अब गांवों में आगजनी कर रही है। उसने 2017 में भी सैकड़ों गांवों में आग लगा दी थी। उस समय वह रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चला रही थी। अब ये तरीका बाकी आबादी के खिलाफ अपनाया जा रहा है। जाहिर है, विश्व समुदाय लाचार होकर सब देख रहा है। म्यांमार में सेना क्रूरता से बर्बरता ( Myanmar Army Cruelty म्यांमार ) की तरफ बढ़ रही है। अब खबर यह है कि उसने उन गांवों को जलाना शुरू कर दिया है, जहां के लोगों ने सैनिक शासन के विरोध में जारी आंदोलन को अपना समर्थन दिया। पिछले हफ्ते एक ऐसे गांव को जलाने की खबर दुनिया भर में चर्चित हुई। उसके मुताबिक मागवे क्षेत्र में स्थित किन मा गांव में आग लगा दी गई। इस गांव की आबादी 800 है। ताजा खबर के बाद अब ये इल्जाम लगा है कि सेना विरोधी आंदोलनकारियों को दंडित करने के लिए गांवों में सामूहिक सजा दी जा रही है। इसी सिलसिले में गांवों में आगजनी की गई है। किन मा में हुई घटना से सेना ने इनकार नहीं किया। उसने सिर्फ यह कहा कि आग उसने नहीं लगाई। आग आतंकवादियों ने लगाई, जिसका दोष उस पर मढ़ दिया… Continue reading Myanmar Army Cruelty म्यांमार में सैन्य बर्बरता

विश्व मंच पर तानाशाहों के साथ भारत

संयुक्त राष्ट्र संघ में दो दिन पहले म्यामांर का मसला आया था। एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार में सैन्य तख्ता पलट के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। माना जा रहा था कि बिना वोटिंग के एक राय से सभी 193 देश इसका समर्थन करेंगे। लेकिन ऐन मौके पर रूस और चीन की शह पर बेलारूस ने वोटिंग की मांग कर दी। वोटिंग के दौरान म्यांमार के सैन्य तख्ता पलट की आलोचना करने और म्यांमार को हथियारों का आपूर्ति पर रोक लगाने के प्रस्ताव का 119 देशों ने समर्थन किया और बेलारूस ने विरोध किया, जबकि 35 देश वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने वाले देशों में भारत भी है। कहा जा सकता है कि भारत पहले भी ऐसे मसले पर वोटिंग से गैरहाजिर रह चुका है। लेकिन अभी अभूतपूर्व स्थिति है। एक तरफ भारत सरकार के मंत्री अपनी बात के हर दूसरे वाक्य में कह रहे हैं कि कोई भारत को लेक्चर न दे क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दूसरी ओर पड़ोस के देश में लोकतंत्र का चीरहरण हो गया और भारत उसका परोक्ष समर्थन कर रहा है। दूसरी अहम बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में वोटिंग… Continue reading विश्व मंच पर तानाशाहों के साथ भारत

एक उम्मीद तो जगी

म्यांमार की हालत के बारे में दुनिया में एक तरह का असहाय होने का भाव रहा है। म्यांमार के सैनिक शासक बेरहमी से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों की जान लेते रहे हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से वहां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ है। पश्चिमी देशों ने जो पहल की उसे चीन और रूस ने नाकाम कर दिया। म्यांमार के सैनिक शासकों को अलग लगता हो कि इन दो बड़ी ताकतों के हाथ उनकी पीठ पर हैं, तो यह गलत नहीं है। इसीलिए एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) की पहल से एक हलकी से उम्मीद जगती दिखी है। उसने म्यांमार के संकट को हल करने के लिए जो पहल की है, उस पर पश्चिमी देशों और चीन में सहमति बन सकने के शुरुआती संकेत दिखे हैं। आसियान की योजना को असल में बड़ा बल तब मिला, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आसियान के बयान की भाषा के अनुरूप अपील जारी की। सुरक्षा परिषद ने अपने बयान की भाषा इस रूप में तैयार की गई, जिससे चीन और रूस को कोई आपत्ति ना हो। सुरक्षा परिषद ने आसियान से कहा कि वह अपने फैसले के मुताबिक म्यांमार के लिए अपना दूत तुरंत नियुक्त करे। यानी एक तरह से परिषद ने… Continue reading एक उम्मीद तो जगी

क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

will indias myanmar policy change : अब क्या म्यांमार के प्रति भारत की नीति बदलेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका के एसएंडपी डाउ जोंस के इंडेक्स से अडानी पोर्ट एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को हटाने का फैसला किया गया है। डाउ जोंस की ओर से कहा गया है कि 15 अप्रैल को एपीएसईजेड को इंडेक्स से हटा दिया जाएगा क्योंकि कंपनी के कारोबारी रिश्ते म्यांमार की सेना के साथ हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक मानव अधिकारियों का गंभीर उल्लंघन किया है। गौरतलब है कि म्यांमार में चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करके सत्ता हासिल करने और उसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की हत्या कर रहे सैन्य शासन के खिलाफ अमेरिका ने पहले से पाबंदी लगाई हुई है। देवास जिला ने जीती कोरोना से जंग, पिछले 9 दिनों में एक भी मरीज नहीं अमेरिका की पाबंदी के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि कंपनी यंगून में जो बंदरगाह बना रही है उस प्रोजेक्ट में सेना के कई अधिकारी की साझेदारी वाली कंपनियां भी शामिल हैं। म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ जुड़े कोई 10 सैन्य… Continue reading क्या बदलेगी भारत की म्यांमार नीति?

शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमार के शरणार्थियों के मामले में भारत सरकार ने क्यों निर्मम रुख अपना रखा है, इसे समझना मुश्किल है। रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में सरकार के ऐसे रुख पर समझा गया था कि चूंकि रोहिंग्या मुसलमान हैं, इसलिए ये मौजूदा भाजपा सरकार की हिंदुत्व की नीति से मेल नहीं खाते। सरकार किसी रूप में मुस्लिम शरणार्थियों के प्रति नरम रुख अपनाते नहीं दिखना चाहती। लेकिन अब आ रहे शरणार्थी बौद्ध हैं, जिन्हें बेरहमी से म्यांमार लौटाने पर सरकार तुली हुई है। क्या वह म्यांमार के सैनिक शासकों को नाराज नहीं करना चाहती, ताकि वे पूरी तरह चीन की गोद में ना चले जाएं? या उसे लगता है कि आज लोकतंत्र और मानव अधिकार के नाम पर जो दबाव उन सैनिक शासकों पर पड़ा है, वह कभी घूम फिर कर भारत सरकार पर भी आ सकता है? इन तथ्यों पर गौर करें। पिछले दिनों म्यांमार के कई निर्वाचित जन प्रतिनिधि भाग कर भारत आ गए। पूर्व नेशनल लीड फॉर डेमोक्रेसी सरकार (जिसका तख्ता पलटा गया) से जुड़ी संस्था सीआरपीएच के मुताबिक उन जन प्रतिनिधियों को डर था कि कई और जन-प्रतिनिधियों की तरह सेना उन्हें भी हिरासत में ले लेगी। उधर भारत के पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है और कहा… Continue reading शरणार्थियों से बेरुखी क्यों?

म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

म्यांमार में सेना का दमन जारी है। 600 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। आजादी के बाद भारत के पड़ौसी देशों— पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल, मालदीव— आदि में कई बार फौजी और राजनीतिक तख्ता-पलट हुए और उनके खिलाफ इन देशों की जनता भड़की भी लेकिन म्यांमार में जिस तरह से 600 लोग पिछले 60-70 दिनों में मारे गए हैं, वैसे किसी भी देश में नहीं मारे गए। म्यांमार की जनता अपनी फौज पर इतनी गुस्साई हुई है कि कल कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों ने फौज का मुकाबला अपनी बंदूकों और भालों से किया। म्यांमार के लगभग हर शहर में हजारों लोग अपनी जान की परवाह किए बिना सड़कों पर नारे लगा रहे हैं। लेकिन फौज है कि वह न तो लोकनायक सू ची को रिहा कर रही है और न ही अन्य छोटे-मोटे नेताओं को! उन पर उल्टे वह झूठे आरोप मढ़ रही है, जिन्हें हास्यास्पद के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता। यूरोप और अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद म्यांमार की फौज अपने दुराग्रह पर क्यों डटी हुई है ? इसके मूल में चीन का समर्थन है। चीन ने फौज की निंदा बिल्कुल नहीं की है। अपनी तटस्थ छवि दिखाने की खातिर उसने कह दिया है कि फौज और… Continue reading म्यांमारः भारत दृढ़ता दिखाए

भारत की विदेश नीति खत्म!

बहुत बुरा लगा अपनी ही प्रजा पर गोलियां चलाने वाली सेना के साथ भारतीय सेना की उपस्थिति की खबर सुन कर! उफ! क्या हो गया है भारत? हम किन मूल्यों, आदर्शों और संविधान में जीते हुए हैं? जो हमारा धर्म है, हमारा संविधान है, हमारी व्यवस्था है, उसमें कैसे यह संभव जो हम खूनी के साथ खड़े हों। खूनी का, लोगों का कत्लेआम करने वाली सेना, तानाशाही का भारत हौसला बढ़ाए यह हम भारतीयों के लिए, दुनिया के कथित सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात है या जिंदा रहने की बात? पता नहीं आपने जाना या नहीं कि प्रजा के खून से रंगी म्यांमारी सेना के 27 मार्च के सालाना दिवस के समारोह में भारतीय सेना के प्रतिनिधिसैनिक अटैची ने तानाशाह सेनापति का हौसला बढ़ाया। दुनिया में भारत की खबर बनी। फालतू का तर्क है कि जब बर्मा याकि म्यांमार से कूटनीतिक संबंध है तो डिफेंस अटैची को सेना की परेड में जाना ही होगा। खूनी सेनापति को सैल्यूट मारनी होगी। पर क्या अमेरिका, ब्रिटेन व यूरोपीय संघ के लोकतांत्रिक देशों के म्यांमार से कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं? म्यांमार में जब इनके दूतावास हैं और इन्होंने सेना की परेड में उपस्थिति दर्ज नहीं… Continue reading भारत की विदेश नीति खत्म!

म्यांमार में हुए नरसंहार पर आखिर क्यों चुप हैं सबसे ‘ताकतवर लोकतंत्र’ के पीएम नरेंद्र मोदी

दुनिया के सबसे पुरानी और ताकतवर लोकतंत्र  (powerful democracy)_कहे जाने वाले भारत के प्रधानमंत्री म्यांमार (Myanmar) में हुए नरसंहार की खिलाफ एक लफ्ज़ भी नहीं बोलते. इसे लेकर देशभर में चर्चाओं का बाजार गर्म है.   इस मुद्दे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कोई बयान नहीं दिया है. मारे गए लोग कौन थे… वो कहां से आए थे…. 100 से ज्यादा की संख्या में लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों की मौत हो जाती है और दुनिया का सबसे ताकतवर लोकतंत्र का प्रधानमंत्री एक शब्द भी नहीं बोलता.सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले पीएम मोदी के इस मुद्दे पर शांत रहने पर दूसरे देशों से भी प्रतिक्रियाएं आ रही है. यह बात इतनी सामान्य नहीं है जितनी सामान्य लग रही है. ऐसे दावे सोशल मीडिया में किये जा रहे हैं. बात अगर सोशल मीडिया की हो फिर भी ये सवाल तो मन में आता ही है कि पीएम मोदी चुप क्यों हैं…. क्या चुप्पी की वजह है अदानी ग्रुप म्यांमार में हुई मौतों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को सीधे तौर पर अदानी ग्रुप से साथ जोड़ा जा रहा है. इस मुद्दे में सोशल मीडिया पर तरह तरह के विचार भी व्यक्त किए जा… Continue reading म्यांमार में हुए नरसंहार पर आखिर क्यों चुप हैं सबसे ‘ताकतवर लोकतंत्र’ के पीएम नरेंद्र मोदी

आखिर क्या अच्छा हो रहा है भारत में?

म्यांमार में लोकतंत्र खत्म करके सैनिक तानाशाही आई तो भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके भारत सरकार को ललकारा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस पर चुप नहीं बैठे

फेसबुक ने म्यांमार के मिलिट्री कंटेंट पर प्रतिबंध लगाया

दक्षिण एशियाई देश म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच फेसबुक ने म्यांमार की सेना द्वारा ‘गलत सूचना’ के प्रसार को रोकने के लिए चलाए जा रहे

म्यांमार में सेना ने किया तख्तापलट

म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर आंग सान सु की और राष्ट्रपति विन मिंट तथा सत्तारूढ पार्टी के अन्य सदस्यों को सोमवार को हिरासत में लेने के बाद एक साल के लिए देश में आपातकाल स्थिति की घोषणा की।

भारत ने म्यांमार से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया

भारत ने म्यांमार में तख्तापलट की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पड़ोसी देश से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है

म्यांमार ने कोविड-19 के खिलाफ राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया

म्यांमार ने बुधवार को देशभर में कोविड -19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत उन चिकित्सा कर्मचारियों के साथ हुई

म्यांमार के आम चुनावों के लिए मतदान शुरू

म्यांमार में रविवार को आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसमें देश भर के 3.7 करोड़ मतदाता अपना उम्मीदवार चुनेंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावों के लिए

मोदी ने कोरोना पर आंग सान सू की से चर्चा की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की।

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