दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के आगे बेबस तंत्र
कागज़ पर सरकार ने कड़े कदमों का एक पूरा ढांचा बनाया है, लेकिन ज़मीनी असर सीमित है। यह वही कहानी है, जिसमें ज़िम्मेदारी सबकी है और जवाबदेही किसी की नहीं। बेबसी महज़ संसाधन समस्या नहीं, राजनीतिक प्राथमिकताओं की भी कहानी है। चुनावी बहस में प्रदूषण अभी भी हाशिये का मुद्दा है। इसलिए ‘आपातकालीन’ प्रेस कांफ्रेंस तो दिखती हैं, लेकिन संरचनात्मक सुधारों का साहस नदारद है। हर साल की तरह दिल्ली–एनसीआर की हवा फिर ज़हरीली है। दिसंबर 2025 में एक बार फिर AQI प्लस श्रेणी तक पहुंचा, जिसने सरकार की नीतियों, इच्छाशक्ति और क्षमता—तीनों पर कठोर सवाल खड़े कर दिए हैं।...