population

  • विशाल जनसंख्या वरदान है या बोझ?

    यदि भारत सही प्राथमिकताओं में सही नीतियां अपनाए तो उसकी जनसंख्या निश्चित रूप से एक वरदान बनेगी, न कि अभिशाप। भारत की विशाल और युवा जनसंख्या एक ऐसी संपत्ति है जो इसे वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बना सकती है। समय की माँग है कि भारत अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति को पहचाने और इसे आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए उपयोग करे।  भारत 140 करोड आबादी का दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। यह जनसंख्या, विशेष रूप से इसकी युवा शक्ति, देश के लिए एक अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करती है। इसकी महिमा जनसांख्यिकीय लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) के रूप में भी है।...

  • भारत के सामने जनसंख्या घटने का खतरा नहीं है

    भारत के सामने बहुत सारे खतरे हैं। सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है, आर्थिक असमानता बढ़ रही है, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत खराब स्थित है, पर्यावरण का बड़ा संकट मंडराता दिख रहा है लेकिन तमाम खतरों में Population कम होना कोई खतरा नहीं है। भारत के सामने कम से कम अगले सौ साल तक जनसंख्या घटने का खतरा नहीं है। दक्षिण कोरिया में जरूर संकट आया हुआ है क्योंकि वहां युवा शादियां नहीं कर रहे हैं और शादी कर रहे हैं तो बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं। तभी यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि धरती पर...

  • डेटा ही तो दिक्कत है!

    population census: आम तजुर्बा है कि मौजूदा सरकार को आंकड़ों की पारदर्शिता पसंद नहीं है। वरना, यह समझना मुश्किल है कि भारत में अब तक दशकीय जनगणना क्यों नहीं हुई, जबकि कोविड-19 महामारी का साया हटे लंबा अरसा गुजर चुका है। केंद्र ने जब कुछ महीने पहले सांख्यिकी स्थायी समिति बनाई, तो उसमें शामिल 14 विशेषज्ञों में से कुछ नामों को देख कर आश्चर्य हुआ था। खास कर यह देख कर हैरत हुई कि समिति की अध्यक्षता प्रणब सेन को सौंपी गई है, जिनकी छवि आंकड़ों के प्रति ईमानदारी बरतने की रही है। बताया गया कि समिति राष्ट्रीय सैंपल सर्वे...

  • चांद लाने जैसी बात

    चंद्र बाबू नायडू ने नायाब फॉर्मूला दिया है। सीआईआई) के एक समारोह में उन्होंने कहा कि अगर देश के सबसे धनी 10 फीसदी लोग सबसे गरीब 20 फीसदी लोगों को “गोद” ले लें, तो समस्या खुद हल हो जाएगी! गरीबों को पहले तो चंद्र बाबू नायडू का शुक्रगुज़ार होना चाहिए कि उन्होंने उनके वजूद से इनकार नहीं किया। जिस दौर में नीति आयोग जैसी सरकारी संस्थाओं और सरकार प्रायोजित विशेषज्ञों के बीच होड़ गरीबी का प्रतिशत कम-से-कम बताने की लगी हो, उन्होंने इतना तो माना कि भारत में लगभग 20 फीसदी आबादी अभी गरीबी रेखा के नीचे है। यह बात...

  • World Population Day 2024: आज है विश्व जनसंख्या दिवस , क्या है इसे मनाने का कारण..

    World Population Day 2024: विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day)मनाने का महत्वपूर्ण कारण है कि लोगों को जागरूक करना. विश्व जनसंख्या दिवस हमें तेजी से बढ़ती जनसंख्या और उससे जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक करता है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि बढ़ती हुई जनसंख्या एक बहुते बड़ा मुद्दा है. जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है. 2023 के अनुमान के अनुसार, भारत की जनसंख्या 1.4 अरब के करीब है और जनसंख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है. और 2030 तक भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश बनने की संभावना...

  • योग के युग में!

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाए पैमाने पर देखें, भारत की आधी आबादी को निष्क्रिय माना जाएगा। ब्रिटिश जर्नल लासेंट के मुताबिक साल 2000 में भारत में निष्क्रिय श्रेणी में आने वाली वयस्क आबादी का प्रतिशत 22.3 था, जो 2022 में 49.4 हो गया। जिस दौर में योग (वास्तव में योगासन) को सरकारी तौर पर ‘राष्ट्रीय कर्म’ बना दिया गया है, उस समय यह खबर कौतुक पैदा करती है कि भारत की लगभग आधी वयस्क आबादी तंदुरुस्त नहीं है। और ऐसा पोषण संबंधी किसी अभाव या महामारी की चपेट में आने के कारण नहीं है। बल्कि इसकी वजह है लोगों की...

  • चुनाव के बीच आबादी का विवाद

    केंद्र सरकार ने जनगणना नहीं कराई है। एक तरफ तो विपक्षी पार्टियां जाति गणना की बात कर रही हैं लेकिन दूसरी ओर पिछले डेढ़ सौ साल में पहली बार ऐसा हो रहा है कि देश में हर 10 साल पर होने वाली जनगणना ही नहीं हुई। कोरोना के नाम पर स्थगित हुई जनगणना अभी तक नहीं हुई है। लेकिन इस बीच आबादी के आंकड़ों के आधार पर सांप्रदायिक विभाजन शुरू हो गया है। सोचें, अभी लोकसभा का चुनाव चल रहा है और इस बीच यह आंकड़ा आया है कि पिछले 75 साल में हिंदुओं की आबादी देश में घटी है...

  • चीन में घटती आबादी, बढ़ते बुढ़े!

    एक समय (और यह बहुत पहले की बात नहीं है) चीन दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश था। अब वह एकदम दूसरे किस्म की समस्या की गिरफ्त में हैं। उसकी आबादी में कमी आ रही है। और कमी आने की दर बढ़ती जा रही है। सन 2023 लगातार दूसरा ऐसा साल था जब देश में जन्मदर इतिहास में सबसे कम थी। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स के अनुसार, सन 2023 में चीन की कुल आबादी में 27.5 लाख, अर्थात 0.2 प्रतिशत की कमी आई है। अब वहां की आबादी 140.9 करोड़ है। सन 2022 में भी आबादी कम...

  • आबादी को समस्या न माने उस पर सही विमर्श हो!

    भारत में मुश्किल यह रही है कि आबादी को समस्या समझा जाता है। …ऐसा करते समय इस पहलू को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि अगर आजादी के 75 साल बाद भी बड़ी संख्या में लोग एक खास जीवन स्तर को प्राप्त नहीं कर पाए हैं या आर्थिक और सांस्कृतिक कसौटियों पर उन्नति नहीं कर पाए हैं, तो उसके लिए सरकारों की भटकी प्राथमिकताएं ही दोषी रही हैं। अब जबकि भारत दुनिया में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बनने जा रहा है, तो इन प्राथमिकताओं को ठीक करने की जरूरत है। लेकिन इसके लिए दबाव तभी बनेगा, जब बहस सही मुद्दों...

  • सबसे बड़ी आबादी बिना गिनती के!

    भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ का जनसंख्या डैशबोर्ड बता रहा है कि भारत की आबादी 142.86 करोड़ हो गई है, जो चीन से करीब 57 लाख ज्यादा है। लेकिन भारत के पास इसका आधिकारिक आंकड़ा नहीं है क्योंकि 2011 के बाद 2021 में जो जनगणना होनी थी वह नहीं हुई है। सो, आखिरी जनगणना के 12 साल बाद आबादी का आंकड़ा अनुमानों पर आधारित है। सब जानते हैं कि पिछले 12 साल में दुनिया तेजी से बदली और आबादी नियंत्रित करने के जो उपाय हुए थे उनका व्यापक असर दिखा है।...

  • सर्वाधिक आबादी की चुनौती

    कुपोषण-ग्रस्त, अर्ध-शिक्षित और आज के तकाजे को पूरा ना करने वाले डिग्रीधारी नौजवानों की भीड़ के साथ भारत उन संभावनाओं को हासिल नहीं कर सकता है, जिन्हें चीन ने सबसे बड़ी आबादी का देश रहते हुए प्राप्त किया। पूरे ज्ञात मानव इतिहास में यह संभवतः पहली बार होने जा रहा है, जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनेगा। ऐतिहासिक रूप से हकीकत यही रही है कि चीन और भारत में हमेशा सबसे अधिक मानव जनसंख्या बसती रही है। इसकी वजह इन दोनों का मनुष्य के रहने लायक अधिक अनुकूल वातावरण और उपजाऊ जमीन रही हैं। आधुनिक तकनीक...

  • भारत का ऐसे बड़ा होना अशुभ!

    ढोल बजाइए, बधाईयां गाईए। हम सबसे बड़े बन गए हैं। आगे अब और बड़े बनते जाएंगे। हमने चीन और दुनिया के सारे अगड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। हम दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गए हैं। यदि इसके धन्यवाद में यदि भाषण करना होता तो हम शायद सभी धर्मों, जातियों और पंथों के लोगों और राजनैतिक नीतियों का शुक्रिया अदा करता जिनके चलते अब हम सर्वाधिक आबादी के हैं! आपने जरूर सुना होगा, सोशल मीडिया पर इससे संबंधित मीम्स का मजा भी लिया होगा कि भारत की 'युवा और ऊर्जावान आबादी' जून के अंत तक चीन...

  • विकास से उपजी समस्या

    हाल में चीन में आबादी में गिरावट एक बड़ी खबर बनी। लेकिन ऐसी समस्या से सिर्फ चीन ही नहीं जूझ रहा है। बल्कि इससे वैसे तमाम देशों को जूझना पड़ रहा है, जिन्होंने विकास का एक खास स्तर हासिल कर लिया है। देखा यह गया है कि जब समाज में विकास के साथ महिलाएं सशक्त होती हैं और निर्णय लेने में स्वतंत्र हो जाती हैं, तो वहां जन्म दर में गिरावट आने लगती है। वैसे भी समृद्ध और सक्षम परिवार अधिक बच्चों के साथ नहीं जीना चाहते। लेकिन जन्म दर गिरने के कारण आबादी घटने लगती है, जिससे अर्थव्यवस्था और...

  • 140-170 करोड़ लोगों में कमाने वाले और खाने वाले!

    भारत में पिछले पच्चीस वर्षों में नौजवान आबादी तेजी से बढ़ी है। अगले चालीस सालों में और बढ़ेगी। मतलब काम कर सकने की उम्र की वर्कफोर्स का बढ़ना! सोचें यदि आबादी में 60-65 प्रतिशत नौजवान हुए और बाकी 60-65 साल से ऊपर के बूढ़े तो भारतीयों का आगे जीवन कैसा होगा? अनुमान लगाएं कि अप्रैल 2023 के 140 करोड़ लोगों में 100 करोड़ नौजवान वर्किंग आबादी व रोजगार कर सकने की कगार पर पंहुचे नौजवानों की है तो पहली बात क्या इतने रोजगार हैं? दूसरी बात ये नौजवान इतना कमाते हुए होंगे कि अपने बूढ़ों के खाने-पीने, रखरखाव, इलाज का...

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