देश में एक तरफ नई जनसंख्या नीति लाकर दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगाने की मांग हो रही है तो दूसरी ओर कई राज्यों में सरकारें दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं। राजस्थान इस श्रेणी का नवीनतम राज्य है। इस विरोधाभास की वजह से लग नहीं रहा है कि सरकार कोई जनसंख्या नीति लाएगी, जबकि नई नीति लाने और जन्मदर नियंत्रित करने की मांग भाजपा के सांसद और नेता ज्यादा कर रहे हैं। ध्यान रहे भारत दुनिया का पहला दैश है, जिसने जनसंख्या नीति बनाई। इसके बावजूद ऐसा जनसंख्या विस्फोट हुआ की भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन गया। इसी वजह से नई नीति लाने और जनसंख्या बढ़ने की दर नियंत्रित करने की मांग उठती रही।
इस मांग के बीच राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सहित तमाम हिंदुवादी नेता हिंदुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करने लगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के बाद परिसीमन का संकेत दिया तो दक्षिण भारत के राज्य अपने लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करने लगे और उन्हें प्रोत्साहित करने लगे। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू ने दूसरा और तीसरा बच्चा पैदा करने वालों को नकद राशि देने का ऐलान किया। दक्षिण के राज्यों ने दो से ज्यादा बच्चे वालों के निकाय चुनाव लड़ने पर लगी रोक भी हटा दी है। अब इस सूची में राजस्थान भी शामिल हो गया है। राजस्थान सरकार ने भी दो से ज्यादा बच्चे वालों को निकाय चुनाव लड़ने से रोकने का नियम बदल दिया है।


