इस बात की चर्चा संसद के चालू सत्र के दौरान हो रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की तैयारी हो रही है। ध्यान रहे संसद की नई इमारत में पहला विधेयक नारी शक्ति वंदन कानून पास हुआ था। 2023 के सितंबर में यह विधेयक पास किया गया था। संविधान का 106वां संशोधन विधेयक पास करके महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया। हालांकि उसी समय यह भी प्रावधान किया गया है कि यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। इस वजह से यह लंबे समय तक के लिए टल गया।
गौरतलब है कि सरकार ने जनगणना की अधिसूचना जारी कर दी है। पहला चऱण इस साल होगा और दूसरे चऱण में जाति सहित नागरिकों की गिनती अगले साल होगी। अगर सब कुछ तय रूटीन के हिसाब से चला तो फिर 2027 के अंत तक या 2028 के शुरू में जनगणना के आंकड़े आएंगे। उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा, जिसको दो साल या उससे ज्यादा समय भी लग सकता है। सो, 2029 के चुनाव तक परिसीमन नहीं हो पाएगा और परिसीमन नहीं हुआ तो महिला आरक्षण भी लागू नहीं होगा। तभी कहा जा रहा है कि महिला आरक्षण को परिसीमन के दायरे से अलग करने की तैयारी हो रही है ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू किया जा सके। बताया जा रहा है कि लॉटरी के जरिए महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने का फैसला हो सकता है।
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