रांची में इन दिनों यह सवाल मजाक के तौर पर पूछा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में भाजपा के महेश केवट जीत गए तो झारखंड में परिमल नाथवानी को कौन रोक लेगा? सवाल सही है। कोई नहीं रोक सकता है। कांग्रेस के लोग ही बता रहे हैं कि उनके 16 विधायकों में से आधा दर्जन विधायकों को छोड़ दें तो बाकी का भरोसा नहीं है। उधर राजद के बारे में कहा जा रहा है कि पटना से उनको संदेश चला गया है और कहा गया है कि चार में से तीन लोग नाथवानी का समर्थन करें। ध्यान रहे पूरा लालू परिवार मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में मुंबई पहुंचा था। अपनी पार्टी के इकलौते विधायक जयराम महतो का रूझान भी नाथवानी की ओर है। सोचें, उनको एनडीए के 24 वोट के अलावा सिर्फ चार वोट की जरुरत है लेकिन कम से कम 14 विधायक उनका समर्थन करने को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी पिछले कुछ दिनों से बहुत आक्रामक होकर भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला कर रही है। राजनीति से इतर विदेश और सामरिक मामलों को लेकर भी जेएमएम के सोशल मीडिया हैंडल से केंद्र सरकार पर हमला किया जा रहा है। तभी जेएमएम की मंशा पर सवाल उठे हैं। कहा जा रहा है कि यह पोजिशनिंग हैं क्योंकि अंत में मदद तो भाजपा समर्थित उम्मीदवार की ही करनी है। अपनी एक सीट जीतने के बाद हेमंत सोरेन के पास छह विधायक बचेंगे लेकिन उनमें से कितने लोग कांग्रेस को वोट करेंगे यह नहीं कहा जा सकता है। सो, कुल मिला कर कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणब झा की स्थिति काफी कमजोर दिख रही है। यह भी कहा जा रहा है कि उनको अंदाजा है तभी वे मेहनत नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस या सहयोगी पार्टियों के विधायकों के साथ बैठक आदि करने की पहल नहीं की है। जानकारों का कहना है कि उनको 28 वोट आवंटित होंगे लेकिन 20 वोट भी मिल जाएं तो बड़ी बात होगी।


