बहुजन समाज पार्टी खत्म होने की कगार पर है। उसका वोट आधार सिमट कर 10 फीसदी के आसपास आ गया है। उसके पास लोकसभा में कोई सांसद नहीं है और राज्य की विधानसभा में सिर्फ एक विधायक हैं और वह भी अपने दम पर जीते हुए। राज्यसभा में एक रामजी गौतम हैं, जो रिटायर हो जाएंगे तो उस सदन में भी बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा। पार्टी का संगठन भी बहुत कमजोर हो गया है। पिछले कई चुनावों से आरोप लगते हैं कि बसपा की भाजपा से मिलीभगत है। यह भी चर्चा रही है कि किसी लालच या भय से पार्टी पूरी ताकत से चुनाव नहीं लड़ रही है और इस वजह से उसका वोट भाजपा या दूसरी पार्टियों में शिफ्ट हो रहा है।
उनको चैलेंज करने वाले चंद्रशेखर बसपा की पारंपरिक नगीना सीट से चुनाव जीत कर लोकसभा सांसद बन गए हैं। मायावती का पारंपरिक जाटव वोट उनकी ओर भी शिफ्ट हो रहा है। लेकिन पार्टी में ड्रामे खत्म नहीं हो रहे हैं। चंद्रशेखर से मुकाबले के लिए मायावती को अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे करने की मजबूरी है। उन्होंने आकाश को आगे किया भी। लेकिन इतनी बार उनको आगे किया गया और पीछे हटाया गया कि नेता बनने से पहले ही तमाशा बन गए। इसी तरह उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ का मामला है। मायावती उनसे कामकाज वापस लेती हैं, फिर पार्टी से निकालती हैं, बाद में फिर पार्टी में वापस लेती हैं, फिर पार्टी से निकालती हैं। यह ड्रामा पिछले कई सालों से चल रहा है। चुनाव से पहले भी यह ड्रामा दोहराया गया है। इससे पार्टी की स्थिति और कमजोर होगी। माना जा रहा है कि पार्टी की टिकट बांटने के खेल की वजह से यह ड्रामा चल रहा है।
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