kishori-yojna
यूपीए पर ममता के बोलने का मतलब

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने यूपीए पर बयान क्यों दिया? उन्होंने मुंबई में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने के बाद सवालिया लहजे में कहा कि कौन सा यूपीए?

वित्त मंत्री के दावे और हकीकत

दुनिया की सभी सरकारों का अपने कामकाज, पिछली सरकारों के कामकाज और विपक्ष के प्रति व्यवहार लगभग एक जैसा होता है। जैसे दुनिया की सभी सरकारें अपने बुरे कामों और गलत फैसलों को भी अच्छा कहती हैं। इसी तरह दुनिया की सभी सरकारें अपनी तुलना पिछली सरकारों के काम से करती हैं और अपने काम को बेहतर बताती हैं। दुनिया की सभी सरकारें कमियों का ठीकरा पहले की सरकारों पर फोड़ती हैं और उसके अच्छे कामों का श्रेय लेती हैं। दुनिया की सभी सरकारें विपक्ष को गैर जिम्मेदार बताती हैं, चाहे विपक्ष वहीं काम क्यों न कर रहा हो, जो सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष में रहते हुए किया हो। ये सब यूनिवर्सल नियम हैं और भारत की मौजूदा सरकार भी अपवाद नहीं है। फर्क सिर्फ डिग्री का है। मौजूदा सरकार ये सारे काम बहुत ज्यादा बड़े पैमाने पर कर रही है या ऐसे भी कह सकते हैं कि सिर्फ ये ही काम कर रही है। प्रधानमंत्री के भाषणों, मंत्रियों की प्रेस कांफ्रेंस और पार्टी प्रवक्ताओं की टेलीविजन बहसों को देख कर इसे समझा जा सकता है। यह भी पढ़ें: अदालते है लोकतंत्र का दीया! यह भी पढ़ें: भारत भी तो कुछ कहे चीन को! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक… Continue reading वित्त मंत्री के दावे और हकीकत

सवाल तो पूछे जाएंगे

चूंकि नाविक इटली के थे और जाहिर है, उसे सोनिया गांधी के मूल से भी जोड़ दिया गया। लेकिन ऐसी अल्पकालिक सोच की अतार्किक राजनीति कभी कभी घूम फिर कर उसी के गले पड़ जाती है, जिसने उसकी शुरुआत की हो। अब यही प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुआ है। अब वे सवालों के घेरे में हैं। अगर यह अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के सिद्धांतो के अनुरूप हुआ, तो उस पर किसी को एतराज नहीं हो सकता। बल्कि अगर यह कूटनीति का तकाजा भी रहा हो, तो उसे समझा जा सकता है। उसके पीछे भारत सरकार की मंशा पर सवाल उठाने की वजह नहीं बनती। लेकिन ये मुद्दा भारत में संवेदनशील बना, तो उसका एक बड़ा श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है। मोदी, जब भारत के प्रधानमंत्री नहीं थे। तब उन्होंने इतालवी नाविकों के सवाल को भारत की कमजोरी से जोड़ा था। और चूंकि नाविक इटली के थे और जाहिर है, उसे सोनिया गांधी के मूल से भी जोड़ दिया गया। लेकिन ऐसी अल्पकालिक सोच की अतार्किक राजनीति कभी कभी घूम फिर कर उसी के गले पड़ जाती है, जिसने उसकी शुरुआत की हो। अब यही प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुआ है। ये सवाल तो पूछा ही जाएगा कि आखिर उन नाविकों… Continue reading सवाल तो पूछे जाएंगे

पेट्रोल, डीजल के दाम फिर बढ़े

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की पेट्रोलियम कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में फिर बढ़ोतरी की। जून महीने के पहले 14 दिन में आठवीं बार कीमत बढ़ी है। इससे पहले पेट्रोलियम कंपनियों ने मई में 16 बार दाम बढ़ाए थे। इस तरह चार मई से लेकर 14 जून तक कुल 24 बार कीमत बढ़ाई जा चुकी है। इस अवधि में पेट्रोल छह रुपए नौ पैसे और डीजल छह रुपए 30 पैसे महंगा हुआ है। बहरहाल, रविवार को एक दिन की राहत के बाद सोमवार को फिर दामों में बढ़ोतरी हुई। सोमवार को पेट्रोल 29 पैसे प्रति लीटर और डीजल 30 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। इसके पहले शुक्रवार और शनिवार लगातार दो दिन पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे। लगातार हो रही बढ़ोतरी की वजह से पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम कई जगह एक सौ रुपए प्रति लीटर से ज्यादा हो गए हैं। सोमवार की बढ़ोतरी के बाद लद्दाख में भी पेट्रोल एक सौ रुपए के पार चला गया। देश के कुल 10 राज्यों में पेट्रोल की कीमत शतक लगा चुकी है। गौरतलब है कि फरवरी के अंत में पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव की घोषणा के बाद केंद्र सरकार की पेट्रोलियम कंपनियों ने दाम… Continue reading पेट्रोल, डीजल के दाम फिर बढ़े

पेट्रोल बना सिरदर्द

पेट्रोल और डीजल के दाम आज जितने बढ़े हुए हैं, पहले कभी नहीं बढ़े। वे जिस रफ्तार से बढ़ रहे हैं, यदि उसी रफ्तार से बढ़ते रहे तो देश की कारें, बसें, ट्रेक्टर, रेलें आदि खड़े-खड़े जंग खाने लगेंगी। देश की अर्थ-व्यवस्था चौपट हो जाएगी। मंहगाई आसमान छूने लगेगी। देश में विरोधी दल इस बारे में कुछ चिल्ल-पों जरुर मचा रहे हैं लेकिन उनकी आवाज का असर नक्कारखाने में तूती की तरह डूबता जा रहा है। कोरोना महामारी ने इतनी जोर का डंका बजा रखा है कि इस वक्त कोई भी कितना ही चिल्लाए, उसकी आवाज कोई कंपन पैदा नहीं कर पा रही है। इस समय देश के छह राज्यों में पेट्रोल की कीमत 100 रु से ऊपर पहुंच गई है। राजस्थान के गंगानगर में यही पेट्रोल 110 रु. तक चला गया है। पिछले सवा महिने में पेट्रोल की कीमतों में 22 बार बढ़ोतरी हो चुकी है। उसकी कीमत को बूंद-बूंद करके बढ़ाया जाता है। दूसरे शब्दों में चांटा मारने की बजाय चपत लगाई जाती है। सरकार ने इधर किसानों को राहत देने के लिए उनकी फसलों के न्यूनतम खरीद मूल्य को बढ़ा दिया है। यह अच्छा किया है लेकिन कितना बढ़ाया है ? एक से छह प्रतिशत तक !… Continue reading पेट्रोल बना सिरदर्द

देश नहीं तो और क्या बिक रहा?

केंद्र की मौजूदा सरकार में शामिल लगभग हर नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को धरती, आकाश और पाताल में सारी चीजें बेच देने और इन सबकी बिक्री में भारी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था। आज वहीं काम तो यह सरकार भी कर रही है।

विपक्ष न तब था न अब है!

इन दिनों जनता में नंबर एक चर्चा, नंबर एक सवाल है विपक्ष कहां है? पेट्रोल-डीजल के दाम रिकार्ड तोड़ ऊंचाई पर है, महंगाई बढ़ रही है और लोगों का रोना है कि विपक्ष नहीं है।

विपक्ष मजबूत होता तो क्या कर लेता?

विपक्ष के मजबूत होने के क्या-क्या लक्षण होते हैं? किस तरह के विपक्ष को मजबूत विपक्ष माना जाना चाहिए? अगर सदन में विपक्षी पार्टियों के ज्यादा सदस्य होंगे तब विपक्ष मजबूत माना जाएगा

कमजोर विपक्ष की बात में राजनीतिक फायदा

देश में राजनीतिक विकल्प नहीं होने का विमर्श कोई नया नहीं है। देयर इज नो ऑल्टरनेटिव यानी टीना फैक्टर की पहले भी चर्चा होती थी

संप्रग की सरकार बनी तो बिहार के युवाओं को मिलेगा रोजगार : राहुल

बिहार में नवादा के हिसुआ में चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शुक्रवार को भागलपुर के कहलगांव पहुंचे और केंद्र सरकार पर सियासी हमला बोलते हुए महागठबंधन के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे।

कांग्रेस नेताओं का नया समूह

कांग्रेस पार्टी के अंदर नेताओं का एक नया समूह बन रह है। इसमें नए नेता भी हैं और पुराने भी हैं। इसको ऐसा समझा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर अब नए और पुराने नेताओं के झगड़े का रूप बदल गया है।

और लोड करें