करियर में आगे बढ़ने और प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे निकलने की दौड़ में आज जीवन की बुनियादी जरूरतें पीछे छूटती जा रही हैं। खाने की अनदेखी हो रही है और सेहत हाशिये पर चली गई है। शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए लोग रोज़ाना कुछ घंटे जिम में पसीना तो बहाते हैं, लेकिन मानसिक सेहत पर ध्यान देना अक्सर भूल जाते हैं।
मन और मस्तिष्क में बनी रहने वाली अशांति धीरे-धीरे तनाव, अनिद्रा और बेचैनी का रूप ले लेती है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है और व्यक्ति मानसिक के साथ-साथ शारीरिक बीमारियों की चपेट में आ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिटेशन मन और मस्तिष्क के लिए संजीवनी का काम कर सकता है, जो भीतर की शांति लौटाने के साथ जीवन को संतुलन में लाने में मदद करता है?
ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की असीम ऊर्जा से जुड़ने का विज्ञान है। दिन में 20 मिनट का मेडिटेशन मन, मस्तिष्क और पूरे शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ असीम शांति देता है। आयुर्वेद में ध्यान को तन और मन के स्वास्थ्य से जोड़ा गया है, जो तन और मन दोनों को शांत कर प्रसन्न रखने की कोशिश करता है। वहीं विज्ञान में मेडिटेशन को मस्तिष्क का री-स्टार्ट बटन कहा जाता है, जो मस्तिष्क में ‘अल्फा’ और ‘थीटा’ तरंगों का उत्सर्जन करता है और ‘ओवरक्लॉकिंग’, यानी ओवर थिंकिंग, को रोकने की कोशिश करता है।
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ध्यान कई मायनों में मन और तन दोनों के लिए जरूरी है। रोजाना 20 मिनट ध्यान करने से तनाव में कमी आती है और ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) शरीर में कम बनता है। ध्यान शरीर में हैप्पी हार्मोन की वृद्धि करता है और अच्छे ख्यालों और खुश रहने पर फोकस करता है। दूसरा, याददाश्त की मजबूती। आजकल छोटी उम्र से ही चीजों को भूलने की परेशानी बच्चों से लेकर बड़ों में देखी जा रही हैं।
गर्भावस्था के दौरान और गर्भावस्था के बाद भी महिलाओं में भूलने की परेशानी अधिक देखी जाती है और ये हार्मोन के असंतुलन की वजह से होता है। ऐसे में ध्यान याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है और सीखने की क्षमता भी बढ़ती है। ये जानकर हैरानी होगी कि ध्यान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक है। रोजाना ध्यान करने से बीमार होने का खतरा भी कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलता है।
तीसरा है गहरी और अच्छी नींद। पूरे दिन सिस्टम पर काम करके और फोन चलाने की आदतों की वजह से नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। ध्यान ‘मेलाटोनिन,’ यानी नींद के हार्मोन, को बनने में मदद करता है, जिससे अच्छी और गहरी नींद आ सके। इसके अलावा, नियमित ध्यान से बुढ़ापा देरी से आता है और कोशिकाएं की मरम्मत सही तरीके से करती रहती हैं।
Pic Credit : ANI
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