क्या आपने कभी आसमान में लहरों की तरह नाचते सफेद बादल देखे हैं? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स अक्सर ऐसी तस्वीरें ले चुके हैं। फ्रेंच दक्षिणी और अंटार्कटिक क्षेत्र के क्रोजेट द्वीपों के ऊपर ऐसे भी ऐसे ही लहरदार बादलों की शानदार दृश्य देखने को मिली थी। इन बादलों को ‘वेव क्लाउड्स’ कहा जाता है, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
वेव क्लाउड्स न सिर्फ खूबसूरत नजारा पेश करते हैं बल्कि मौसम विज्ञान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। वेव क्लाउड्स को अंडुलेटस या बिलो क्लाउड्स भी कहा जाता है। ये बादल आमतौर पर पहाड़ी इलाकों या द्वीपों के ऊपर बनते हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की साझा की गई एक तस्वीर दक्षिण हिंद महासागर में स्थित क्रोजेट द्वीपों पर ली गई थी। ये द्वीप दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका के बीच स्थित हैं।
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अब सवाल है कि वेव क्लाउड्स कैसे बनते हैं? वैज्ञानिक बताते हैं कि वेव क्लाउड्स का निर्माण वायुमंडलीय गुरुत्वाकर्षण तरंगों के कारण होता है। जब तेज हवा किसी पहाड़ या द्वीप से टकराती है तो वह ऊपर की ओर उठती है। इस दौरान हवा ठंडी हो जाती है और उसमें मौजूद नमी संघनित होकर बादल का रूप ले लेती है। फिर ग्रैविटी की वजह से यह हवा पहाड़ के दूसरी तरफ नीचे की ओर गिरती है। नीचे आने पर हवा गर्म हो जाती है, जिससे बादल गायब हो जाते हैं। लेकिन हवा की यह गति रुकती नहीं। हवा फिर से ऊपर उठती है, ठंडी होती है और नया बादल बनाती है। यह चक्र बार-बार दोहराता रहता है, जिससे लहरों जैसा पैटर्न बन जाता है। ठीक वैसे ही जैसे पानी में एक पत्थर फेंकने पर लहरें उठती हैं।
वहीं, क्रोजेट द्वीपों जैसे ऊबड़-खाबड़ इलाकों में हवा के प्रवाह में क्रॉस-करेंट्स बनते हैं, जिससे बादलों का यह लहरदार रूप और भी स्पष्ट दिखाई देता है। इन द्वीपों के ऊपर पहले भी कई बार वेव क्लाउड्स देखे जा चुके हैं। ये द्वीप पूरी तरह निर्जन हैं। यहां कोई स्थायी आबादी नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ये महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र हैं। यहां मुख्य रूप से किंग पेंगुइन और अन्य समुद्री जीवों का अध्ययन किया जाता है।
Pic Credit : ANI
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