भोजन में पौष्टिकता की कमी की वजह से बच्चों से लेकर महिलाओं में रक्त की कमी साधारण समस्या बन चुकी है।
सिर दर्द, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होने पर डॉक्टर आयरन की दवा देते हैं, जिससे शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाया जा सके, लेकिन कई बार दवा लेने के बाद भी शरीर एनीमिया की कमी से जूझने लगता है और कई बीमारियां घेर लेती हैं। आज हम आपको आयुर्वेद के उन तीन नियमों के बारे में बताएंगे, जिन्हें सात दिन करने से शरीर में बदलाव देखने को मिल जाएंगे।
पहला उपाय है आयुर्वेदिक पंचामृत। इस उपाय में आयुर्वेद ने कुछ ऐसी घरेलू चीजों के सेवन की सलाह दी है जो रसोईघर में ही मौजूद हैं और जिनके फायदों के बारे में कम ही लोग जानते हैं। रक्त की कमी होने पर 2 मुनक्का और 2 अंजीर को रात में भिगोकर सुबह सेवन करना चाहिए, लौह भस्म और शहद को मिलाकर चाटना चाहिए, सुबह खाली पेट सफेद पेठे और आंवला का रस पीना चाहिए, तिल और गुड़ का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए और रात के समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। ये सभी उपाय प्रभावी तरीके से काम करते हैं।
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दूसरा उपाय है आहार तालिका, यानी भोजन में ऐसा क्या शामिल करें जो शरीर में रक्त को बढ़ाने में मदद करे। इसके लिए भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, सहजन की पत्ती और डंडी, और चुकंदर शामिल कर सकते हैं। फलों में अनार, अंगूर, सेब और खजूर का सेवन कर सकते हैं। अपने भोजन में दिन के समय छाछ जरूर शामिल करें। ये पेट को साफ रखने से लेकर शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाने में सपोर्ट करती है।
अब ये भी जानना जरूरी है कि किन चीजों के सेवन से बचना है। ज्यादा मात्रा में हरी मिर्च, बैंगन, ज्यादा खट्टे फल, पैक्ड खाना या पेय पदार्थों से परहेज करना जरूरी है।
तीसरा उपाय है रक्त के शोधन और निर्माण में सहायता करने वाले कुछ तरीके, जैसे लोहे के बर्तन में खाना बनाना। शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाने के लिए आयरन का होना बहुत जरूरी है। दूसरा तरीका है सूर्य स्नान। सर्दी हो या गर्मी, सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए बहुत जरूरी होती है। सुबह की धूप शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ाती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को मजबूती देता है।
Pic Credit : ANI
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