नई दिल्ली। 2022-23 के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में 2023-24 के आगामी वित्त वर्ष के लिए दृष्टिकोण पर विचार करते हुए कहा गया है कि महामारी से भारत की रिकवरी अपेक्षाकृत तेज थी और नए वित्तीय वर्ष में वृद्धि को ठोस घरेलू मांग और पूंजी निवेश (investment) में तेजी से समर्थन मिलेगा। इसने आगे कहा कि स्वस्थ वित्तीय सहायता से, एक नए निजी क्षेत्र के पूंजी निर्माण चक्र के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पूंजीगत व्यय में निजी क्षेत्र की सावधानी की भरपाई करते हुए, सरकार ने पूंजीगत व्यय में काफी वृद्धि की।
सर्वेक्षण में आगे कहा गया, 2015-16 से 2022-23 तक, पिछले सात वर्षों में बजटीय पूंजीगत व्यय 2.7 गुना बढ़ गया, जिससे कैपेक्स चक्र फिर से सक्रिय हो गया। वस्तु एवं सेवा कर और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की शुरुआत जैसे संरचनात्मक सुधारों ने अर्थव्यवस्था की दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाया और वित्तीय अनुशासन और बेहतर अनुपालन सुनिश्चित किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा मंगलवार को संसद में पेश किए गए दस्तावेज में आगे कहा गया है कि आईएमएफ (IMF) के वर्ल़्ड इकोनॉमिक आउटलुक, अक्टूबर 2022 के अनुसार वैश्विक विकास दर 2022 में 3.2 प्रतिशत से घटकर 2023 में 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बढ़ी हुई अनिश्चितता के साथ मिलकर आर्थिक उत्पादन में धीमी वृद्धि व्यापार वृद्धि को कम कर देगी। यह विश्व व्यापार संगठन द्वारा 2022 में 3.5 प्रतिशत से 2023 में 1.0 प्रतिशत तक वैश्विक व्यापार में वृद्धि के लिए कम पूर्वानुमान में देखा गया है।
सर्वेक्षण ने 2023-24 के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा गया, बाहरी मोर्चे पर, चालू खाता शेष के जोखिम कई स्रोतों से उत्पन्न होते हैं। जबकि कमोडिटी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से पीछे हट गई हैं, वे अभी भी पूर्व-संघर्ष के स्तर से ऊपर हैं। उच्च जिंस कीमतों के बीच मजबूत घरेलू मांग भारत के कुल आयात बिल को बढ़ाएगी और चालू खाता शेष में प्रतिकूल विकास में योगदान देगी। वैश्विक मांग में कमी के कारण निर्यात वृद्धि को स्थिर करके इन्हें और बढ़ाया जा सकता है। यदि चालू खाता घाटा और अधिक बढ़ता है, तो मुद्रा अवमूल्यन के दबाव में आ सकती है।
उसी समय हालांकि यह नोट किया गया कि फंसी हुई मुद्रास्फीति कसने के चक्र को लंबा कर सकती है और इसलिए, उधार लेने की लागत ‘लंबे समय तक अधिक’ रह सकती है और ऐसे परि²श्य में, वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2023-24 में कम वृद्धि की विशेषता हो सकती है। (आईएएनएस)
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