अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को ‘एसबीआई जैसे’ 4-5 बैंकों की जरूरत: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को कहा कि भारत को अर्थव्यवस्था और उद्योग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए 4-5 ‘एसबीआई जैसे आकार वाले’ बैंकों की जरूरत है।

मंत्रालयों में पत्रकारों की एंट्री बंद

कुछ मामलों में तो कोरोना वायरस की आपदा ने अवसर का काम किया है और कुछ मामलों में मंत्रियों ने सीधे सीधे पत्रकारों की एंट्री बंद कर दी है। संसद में भी पत्रकारों की एंट्री बहुत सीमित हो गई है।

जीएसटी कौंसिल में बड़े फैसले संभव

वस्तु व सेवा कर, जीएसटी कौंसिल की 45वीं बैठक शुक्रवार को होगी। कोराना वायरस की महामारी शुरू होने के बाद यह पहली बैठक है, जिसमें सारे सदस्य आमने-सामने होंगे।

क्या सचमुच पेट्रोल-डीजल जीएसटी में आएंगे?

सवाल है कि क्या सचमुच सरकार ऐसा कर सकती है या यह सिर्फ दिखावा है? पहली नजर में तो ऐसा सोचने का भी कोई कारण नजर नहीं आता है।

इस बार क्या महिला राष्ट्रपति?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर जगह महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करते हैं लेकिन राजभवनों में महिलाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है और किसी भाजपा शासित राज्य में महिला मुख्यमंत्री नहीं है।

मोनेटाइजेशन प्लान पर चिदंरबम ने पूछे 20 सवाल

चिदंबरम ने सवाल किया-क्या सरकार ने मौजूदा राजस्व और चार साल की अवधि में मिलने वाले छह लाख करोड़ रुपए के राजस्व में अंतर का आकलन किया?

राहुल गांधी ने निजीकरण मामले में केंद्र को घेरा, कहा-  पहले ईमान बेचा और अब…

राष्ट्रीय हितों के संरक्षण की बात करने वाली इस सरकार ने अब अपना ईमान भी बेच दिया है. श्री गांधी ने कहा कि यह सरकार अपना ईमान पहले ही बेच चुकी है और अब देश की संपत्ति को बेचने में जुट गयी है

जब झूठ ही आधार हो!

सीतारमन ने पहले के अनेक मौकों की तरह ही इस बार ना सिर्फ अर्धसत्य, बल्कि आंशिक सत्य बोला।

ऑयल बांड का नया बहाना!

भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार दोनों पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी को सही ठहराने और अपनी जिम्मेदारी से बचने के बहाने खोज रहे हैं।

निर्मला सीतारमण की और तरक्की संभव

Nirmala Sitharaman parliamentary board promotion : नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में ठीक-ठाक काम कर रहे एक दर्जन मंत्रियों को बाहर कर दिया लेकिन देश की अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठे होने के बावजूद निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री के पद पर बनी रहीं। अब कहा जा रहा है कि उनको और तरक्की मिल सकती है। उनको भाजपा संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया जा सकता है। पहले उनको राज्यसभा में सदन का नेता बनाए जाने की चर्चा भी थी, लेकिन भाजपा ने उनकी बजाय पीयूष गोयल पर दांव लगाया है। गौरतलब है कि थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक का राज्यपाल बनाए जाने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है और इसके साथ ही राज्यसभा में सत्तापक्ष के नेता का पद खाली हो गया है। Read also:  सिद्धू के लिए आप में क्या जगह है? राज्यसभा में नेता पद के लिए भाजपा में निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान के नाम की चर्चा थी। ध्यान रहे पीयूष गोयल काफी समय से अरुण जेटली की जगह के दावेदार थे। नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में जब जेटली बीमार हो गए थे तब कार्यकारी वित्त मंत्री के रूप में गोयल ने काम किया था। लेकिन दूसरे कार्यकाल में जब वित्त मंत्री बनाने की बारी… Continue reading निर्मला सीतारमण की और तरक्की संभव

संसदीय बोर्ड में किसे मिलेगी जगह

parliamentary board : केंद्र सरकार में बदलाव के साथ साथ अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा संगठन में भी बदलाव किया जाएगा। भाजपा संगठन में बदलाव का सबसे अहम हिस्सा संसदीय बोर्ड ( parliamentary board  )भी है। इसमें चार स्थान खाली हैं। इन चार जगहों पर किसको लाया जाएगा, यह यक्ष प्रश्न है। यह भी कहा जा रहा है कि एक साथ शायद चारों जगहों को नहीं भरा जाए। लेकिन कम से कम दो सदस्य जरूर तत्काल नियुक्त किए जाएंगे। सुषमा स्वराज के निधन के बाद से ही संसदीय बोर्ड में कोई महिला सदस्य नहीं है। इसलिए एक नियुक्ति महिला सदस्य की होनी है। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बन जाने के बाद संसदीय बोर्ड में दलित की जगह भी खाली हो गई है। वे इकलौते दलित सदस्य थे बोर्ड में। सो, अगले साल उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले  विधानसभा चुनावों से पहले एक दलित सदस्य भी नियुक्त करना है। यह भी पढ़ें: थावरचंद से तीन वैकेंसी बनी है! सो, अगर चार सदस्यों की नियुक्ति parliamentary board एक साथ नहीं होती है तब भी कम से कम दो सदस्य नियुक्त होंगे। महिला सदस्य के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम की… Continue reading संसदीय बोर्ड में किसे मिलेगी जगह

कर्ज लेकर काम चलाएं!

coronavirus pandemic relief package : भारत के एक मनीषी ने कर्ज लेकर घी पीने की सलाह दी थी। घी तो दूभर है लेकिन भारत सरकार चाहती है कि लोग कर्ज लेकर अपना काम चलाएं। काम चलाने का मतलब है कि अगर छोटे छोटे काम धंधे हैं या लघु-सूक्ष्म उद्योग धंधे हैं या किसी दूसरे असंगठित उद्योग से जुड़े हैं तो बैंकों से कर्ज लीजिए और अपना काम चलाइए। कर्ज के बदले में गारंटी केंद्र सरकार देगी। यानी सरकार यह सुनिश्चित कर देगी कि आपको कर्ज मिले लेकिन यह नहीं बताएगी कि आप वह कर्ज कैसे चुकाएंगे! जब बाजार में मांग नहीं है, लोगों के पास पैसे नहीं हैं और प्राइमरी मार्केट यानी नौकरीपेशा या स्वरोजगार करने वालों का भट्ठा बैठा हुआ है तो सामान खरीदेगा कौन? अगर एमएसएमई सेक्टर या माइक्रो यूनिट्स चलाने वाले लोग कर्ज ले लें और उत्पादन शुरू करें या बढ़ाएं तो उसे बेचेंगे कहां? अगर सामान बेच नहीं पाए तो कर्ज कहां से चुकाएंगे? बैंकों और डाकघरों की एकाध बचत योजनाओं को छोड़ दें तो सरकार किसी भी जमा पर छह फीसदी से ज्यादा ब्याज नहीं दे रही है लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो आर्थिक पैकेज घोषित किया उसमें बताया कि लोन गारंटी योजना… Continue reading कर्ज लेकर काम चलाएं!

Corona काल में नौकरी गंवाने वालों के लिए केन्द्र सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा इस योजना का लाभ

नई दिल्ली | PF Account Holders : कोरोना महामारी की दूसरी लहर में बुरी तरह से बर्बाद हुई देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार चिंतित है और इसमें सुधार करने के लिए प्रत्नशील है। ऐसे में केन्द्र सरकार (Central Government) ने आर्थिक संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था में सुधार और देश के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कई नए राहत पैकेज की घोषणाएं की है। भारत सरकार द्वारा चलाई गई कई आर्थिक योजनाओं से लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। जिससे पीएफ अकाउंट धारकों (PF Account Holders) को राहत मिल सकेगी। वित्त मंत्री ने कहा है कि प्राइवेट कंपनियों में नई नियुक्तियों के संदर्भ में पीएफ अकाउंट (PF account) में कर्मचारियों के हिस्से की राशि भी सरकार ही वहन करेगी। यह भी पढ़ें:- Petrol Diesel Price: श्रीगंगानगर में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर पार, दिल्ली में शतक के करीब, जानें आज कितने बढ़े दाम सीधा लाभ कर्मचारियों को बता दें कि पिछले साल लागू की गई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना (Self-Reliant India Employment Scheme) के अन्तर्गत पहले कर्मचारियों के PF Account में दी जाने वाली कंपनियों के हिस्से की राशि सरकार ने… Continue reading Corona काल में नौकरी गंवाने वालों के लिए केन्द्र सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा इस योजना का लाभ

Vaccination in India : समस्याएं सुलझ नहीं, बढ़ रही हैं!

Vaccination in India : इस सप्ताह दो दिन योग दिवस-टीकाकरण महाअभियान का हल्ला था। अगले तीन दिन कश्मीर की हेडलाइंस! दोनों से क्या रियलिटी उभरी? क्या लगा देश टीकाकरण में जुट गया है? क्या माना जा सकता है कश्मीर ‘नॉर्मल’ होने की दिशा में है? टीकाकरण भी अब घसीटता हुआ तो अगले सप्ताह कश्मीर भी ठंडे बस्ते में। ले देकर मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दफ्तर का हर सप्ताह दो-तीन बातों का नैरेटिव-हेडलाइंस बनवाने भर का है ताकि लोग मूर्ख बने रहें कि देखो कितना काम हो रहा है। प्रधानमंत्री लगातार फोकस में कभी कश्मीर, कभी कोरोना, कभी स्कूली परीक्षा का मसला सुलझाते हुए! …. यह सिलसिला सात सालों से चला आ रहा है! लेकिन ईमानदारी से, दिल पर हाथ रख कर सोचें कि 140 करोड़ लोगों के जीवन में समस्याओं के सुलझने का तनिक भी सुख या चैन बना है? यह भी पढ़ें: पर मोदीजी मेहनत तो कर रहे! उलटे समस्याओं का अंबार बनता जा रहा है, समस्याएं इतनी जटिल-रामभरोसे होती जा रही हैं कि पूरी व्यवस्था, सभी सरकारें लाचार-बेबस हैं। तभी महामारी के भारत अनुभव को देख वैश्विक राय में भारत अब ‘असफल राष्ट्र’ (failed State) करार है! ‘अव्यवस्था’ याकि केहोस (chaos) का वह आलम है, जिसके… Continue reading Vaccination in India : समस्याएं सुलझ नहीं, बढ़ रही हैं!

पर मोदीजी मेहनत तो कर रहे!

Modi is working hard : निःसंदेह मेहनत हर दिन फोटो शूट और हेडलाइन मे दिखलाई देती है। कभी वे उत्तर प्रदेश को ठीक करते लगते हैं, कभी मंत्रियों-मंत्रालयों की समीक्षा करते दिखलाई देते हैं। कभी योग करवाते, वैक्सीन लगवाते दिखते हैं तो कभी कश्मीर की बैठक बुलाने और कश्मीर की समस्या सुलटाते दिखते हैं। उस नाते भारत ही वह चमत्कारी देश है, जिसका प्रधानमंत्री हर रोज एक समस्या, एक एजेंडा लेता है और जादू-मंतर करके उसे निपटा देता है। उन कश्मीरी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री का क्या गजब फोटोशूट हुआ, जिन्हें देशद्रोही करार दे कर जेल में डाला हुआ था! प्रधानमंत्रियों की पहले भी कश्मीरी नेताओं के साथ बैठकें हुईं हैं। लेकिन गुरूवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सबके साथ खड़े हो कर जैसा ग्रुप फोटो खिंचवाया वैसा अपन ने कभी खींचा नहीं देखा। हो सकता है इसके पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को फोटो दिखाना हो। उन्हें अहसास कराना हो कि जम्मू-कश्मीर की समस्या सुलझा दी है। आगे चुनाव होंगे और सब ठीक हो जाएगा। यह भी पढ़ें: समस्याएं सुलझ नहीं, बढ़ रही हैं! ठीक होने की यह मैसेजिंग भारत के लोगों के लिए भी है। सब ठीक है, सब ठीक हो रहा है इसकी मैसेजिंग के लिए… Continue reading पर मोदीजी मेहनत तो कर रहे!

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