स्कूलों में पढ़ाई के मामले में कुछ बिंदुओं पर सुधार है, मगर कहीं-कहीं गिरावट भी है। बहरहाल, समग्र सूरत पर नज़र डालें, तो यह प्रश्न प्रासंगिक है क्या 75 साल की आजादी के बाद मौजूदा हाल पर संतोष किया जा सकता है?
ताजा सालाना शिक्षा की स्थिति रिपोर्ट (असर) का निष्कर्ष है कि 2024 में स्कूलों में सीखने की क्षमता का स्तर कोरोना काल से पहले के स्तर पर आ गया है। रिपोर्ट में प्रशंसा की गई है कि 2022 के बाद से स्कूलों में सीखने के स्तर में ‘भारी’ सुधार हुआ है। मसलन, तीसरी कक्षा में छात्रों को गणित में घटाव के जिस साधारण सवाल को हल कर लेना चाहिए, अब ऐसा करने वाले छात्रों की संख्या 33 फीसदी से अधिक हो गई है। 2022 में 28 प्रतिशत छात्र ही ऐसा करने में सक्षम थे। खास कर सरकारी स्कूलों में हुए सुधार की तरफ ध्यान खींचते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि उपरोक्त क्षमता 16 प्रतिशत से बढ़ कर करीब 23 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह रिपोर्ट प्रथम नाम की गैर-सरकारी संस्था तैयार करती है।
संस्था की एक पदाधिकारी ने एक अखबार में लिखे लेख में इसका श्रेय नई शिक्षा नीति को दिया है। कहा है कि इस नीति के तहत सीखने की क्षमता सुधारने पर खास जोर दिया गया है। बहरहाल, कक्षा बढ़ने के साथ सुधार की रफ्तार घटती चली जाती है। मसलन, आठवीं कक्षा में 45.8 प्रतिशत छात्र अंकगणित के बुनियादी सवाल हल करने में सक्षम हैं। 2022 में भी ये संख्या यहीं थी। उधर निचली कक्षाओं में भी, प्राइवेट स्कूलों में सुधार की दर उपरोक्त अनुपात में नहीं रही। वैसे कुल मिला कर हुआ सुधार स्वागतयोग्य है।
मगर यह भी अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि अब भी तीसरी कक्षा के दो तिहाई छात्र गणित के साधारण सवाल को हल करने में अक्षम बने हुए हैं। और बात सिर्फ यह नकारात्मक पैमाना अपनाने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि छह से 14 वर्ष उम्र वर्ग में स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या गिरी है। 2022 में यह संख्या 72.9 फीसदी थी, जो 2024 में 66.8 प्रतिशत हो गई। तो कुछ बिंदुओं पर सुधार है, मगर कहीं-कहीं गिरावट भी है। बहरहाल, अगर समग्र सूरत पर नज़र डालें, तो यह प्रश्न प्रासंगिक है क्या 75 साल की आजादी के बाद मौजूदा हाल पर संतोष किया जा सकता है?
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Image Source: ANI

