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असंतोष से अप्रभावित

जो जीतने के लिए मैदान में उतरा हो, अपने प्रति विश्वास जगाकर वोट अर्जित करना उसका कर्त्तव्य है। यह आत्म-निरीक्षण एनएसयूआई को करना है कि अपने एक लोकप्रिय छात्र नेता को उसने टिकट क्यों नहीं दिया?

शिक्षा और परीक्षा के नाकाम होते सिस्टम तथा रोजगार के सिकुड़ते अवसरों के कारण नौजवानों के सामने चिंताजनक भविष्य की हकीकत है। इससे उपजे असंतोष की झलक देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखती रही है। उसका अधिक सघन रूप कुछ समय पहले कॉकरोच आंदोलन के रूप में दिखा। इसलिए ये आकलन गलत नहीं हैं कि इन हालात का सियासी इज़हार चुनावों के दौरान होना चाहिए। मगर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजे से ऐसे अनुमानों के विपरीत आए। सत्ताधारी भाजपा से संबंधित एबीवीपी इसमें तीन केंद्रीय पद जीतने में कामयाब रही। जिस एक पद- उपाध्यक्ष- पर वह हारी, उसमें भी जीत एक निर्दलीय उम्मीदवार की हुई, जो कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से बगावत कर मैदान में उतरा था।

हालिया दशकों में डूसू एबीवीपी का गढ़ रहा है। इसलिए सामान्य स्थितियों में ये नतीजे ज्यादा ध्यान नहीं खींचते। लेकिन इस बार चुनाव का संदर्भ कॉकरोच आंदोलन, उससे उपजे छात्र असंतोष के कथानक, तथा सत्य निकेतन में इमारत गिरने से हॉस्टलों के अभाव के उठे मुद्दों से बना। यानी इसे युवाओं की राजनीतिक प्राथमिकता को मापने के बैरोमीटर के रूप में देखा जा रहा था। सामने यह आया कि युवाओं के बहुत बड़े हिस्से को उम्मीद जगाने वाला कोई विकल्प फिलहाल नज़र नहीं आता। नतीजतन, भाजपा के कथानक अभी भी प्रभावी बने हुए हैं। परिणाम आने के बाद से विपक्षी खेमों के बीच सोशल मीडिया पर तू तू-मैं मैं का माहौल है।

नतीजे को विपक्षी वोटों के बंटवारे के सामान्य गणित से समझने की कोशिश की गई है। लेकिन अल्प-दृष्टि से प्रेरित ऐसी प्रतिक्रियाएं चुनाव के व्यापक संदर्भ को नजरअंदाज कर जताई जाती हैं। इसलिए कि जो जीतने के लिए मैदान में उतरा हो, अपने प्रति विश्वास जगाकर वोटों को अर्जित करना उसका कर्त्तव्य है। बल्कि यह आत्म-निरीक्षण एनएसयूआई को करना है कि अपने एक लोकप्रिय छात्र नेता को उसने टिकट क्यों नहीं दिया? पार्टियां नेताओं के अपने स्वार्थी समीकरणों से चलती रहें और हार का ठीकरा किसी और फोड़ें, तो उससे कोई फायदा नहीं होगा। सच यही है कि असंतोष को राजनीतिक जनादेश में तब्दील करने में विपक्ष अब तक नाकाम है।

By NI Editorial

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