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चुनाव में विदेश नीति कितना बड़ा मुद्दा?

ByNI Editorial,
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भाजपा ने भरोसा दिया है कि वह एक जिम्मेदार एवं भरोसेमंद पड़ोसी की भूमिका में ‘नेबरहुड फर्स्ट’ की नीति पर कायम रहेगी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भूटान से लेकर बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ संबंधों में नई ताजगी लाने का वादा किया है।

भारत के आम चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के प्रयास में जुटी है, तो मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने दस साल के राजनीतिक वनवास को खत्म करने के लिए कमर कसे हुए है। दोनों प्रमुख दल जनता को लुभाने के लिए अपने-अपने दांव आजमा रहे हैं। इसी कड़ी में एक मोर्चा विदेश नीति का भी है।भारत की भौगोलिक स्थिति और बदलते वैश्विक ढांचे में उसकी बढ़ती भूमिका एवं आकांक्षा के कारण विदेश नीति का चुनाव में चर्चा पहले से कुछ ज्यादा होने लगी है। इस समय विश्व के कई हिस्सों में तनाव एवं टकराव की स्थिति से भी इसका महत्व बढ़ा है। बीजेपी के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में विदेश नीति को खासी प्राथमिकता दी है।

सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च में फेलो और राजनीतिक विश्लेषक राहुल वर्मा ने डीडब्लू से बातचीत में कहा, “कुछ समय पहले तक भारत में विदेश नीति का अर्थ मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष या उस संदर्भ में कश्मीर पर केंद्रित था, बीच-बीच में कभी चीन उभर आता था, लेकिन पिछले दस-पंद्रह वर्षों में विदेश नीति पर मुख्यधारा और घरेलू राजनीति में अधिक चर्चा होने लगी है।”

विदेश नीति पर दोनों दलों के दृष्टिकोण में अंतर के सवाल पर राहुल वर्मा कहते हैं, “दोनों दलों के स्वर में वैचारिक रूप से भले ही अंतर हो, लेकिन उनके रवैये अलग नहीं हैं। इस मामले में निरंतरता ही रही है।” वर्मा ने यह भी कहा, “घोषणा पत्र में दोनों दलों ने एक जैसी बातें ही अलग-अलग तरीके से कही हैं। जैसे आतंकवाद को खत्म करने की बात कांग्रेस संवाद आधारित दृष्टिकोण के साथ करती है, तो बीजेपी आक्रामक रूख दिखाती है।”

भारत की सीमा चीन और पाकिस्तान से लगती है। दोनों के साथ ही नई दिल्ली के रिश्ते बहुत सहज नहीं रहे। चीन, भारत के पड़ोसी देशों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है तो इससे भी भारत पर दबाव बढ़ रहा है। मालदीव के साथ तल्ख होते भारत के रिश्ते इसकी मिसाल हैं।भाजपा ने भरोसा दिया है कि वह एक जिम्मेदार एवं भरोसेमंद पड़ोसी की भूमिका में ‘नेबरहुड फर्स्ट’ की नीति पर कायम रहेगी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भूटान से लेकर बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ संबंधों में नई ताजगी लाने का वादा किया है।

सीमा पार आतंकवाद भी भारत में एक बड़ा मुद्दा है। चीन और पाकिस्तान की सीमा पर बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने का वादा भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किया है। इस संदर्भ में सामरिक विश्लेषक एवं नई दिल्ली स्थित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में वाइस-प्रेसिडेंट हर्ष वी. पंत ने डीडब्लू से कहा, “चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कैसे होंगे, इस बारे में घोषणा पत्र में कोई रूपरेखा नहीं दी गई है। हालांकि मुझे लगता है बीजेपी का घोषणा पत्र यह कहना चाह रहा है, कि भारत के पास समस्याएं बहुत हो सकती हैं, लेकिन जो आकांक्षाएं और उन पर अमल की क्षमता है, वह निश्चित ही बड़े लक्ष्य पर केंद्रित हैं।”

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