हमारी विदेश नीति की फिसलन

हमारी विदेश नीति आजकल बड़ी दुविधा में फंस गई है। एक तरफ चीन ने हमारे लिए कई फिसलपट्टियां लगा दी हैं और दूसरी तरफ हमारे दोनों दोस्त- इस्राइली और फलस्तीनी हमें कोस रहे हैं। हमारे विदेश मंत्रालय की घिग्घी बंधी हुई है, जबकि हमारा विदेश मंत्री एक ऐसा आदमी है, जो विदेश मंत्री बनने के… Continue reading हमारी विदेश नीति की फिसलन

पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

भारत के विदेश मंत्री डा. जयशंकर आजकल अमेरिका के नेताओं, अफसरों और विदेश नीति विशेषज्ञों से गहन संवाद कर रहे हैं। यह बहुत सामयिक है, क्योंकि इस कोरोना-काल में सबका ध्यान महामारी पर लगा हुआ है और विदेश नीति हाशिए में सरक गई है। लेकिन चीन-जैसे राष्ट्र इसी मौके को अवसर की तरह इस्तेमाल कर… Continue reading पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

जिन्हें इतिहास की समझ है, वे जानते हैं कि हुक़्मरान जब-जब कलंदरी पर उतारू होते हैं, जनता भी तब-तब चीमटा बजाने लगती है। जिन्हें समझ कर भी यह इतिहास नहीं समझना, उनकी समझ को नमन कीजिए। लेकिन एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए। जनता जब अपनी पर आती है तो वह किसी गांधी-वांधी, पवार-फवार, अण्णा-केजरी… Continue reading सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

जिस तरह से दूसरे कार्यकाल के दो साल में घरेलू मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अजेय होने और सब कुछ संभाल लेने वाले नेता की छवि टूटी और लोगों को लगा कि वे भी एक आम नेता की तरह हैं, जो किसी बड़े संकट में फेल हो सकते हैं तो उसी तरह दुनिया में… Continue reading दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

हम हिंदू इतिहास-याद्दाश्त में कच्चे हैं। आंखें मोतियाबिंद की मारी व बुद्धि मंद! सिर्फ वर्तमान के कुएं में जीते हैं। कितनों को भान है कि 1947 में आजादी के बाद भूख और भूखे पेट की विपदा कब थी? तो जवाब है साठ का दशक। यों भारत आजादी पहले से भूख, अकाल का मारा था। तेज… Continue reading एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

विदेश नीतिः मौलिक पहल जरुरी

अन्तरराष्ट्रीय राजनीति का खेल कितना मजेदार है, इसका पता हमें चीन और अमेरिका के ताजा रवैयों से पता चल रहा है। चीन हमसे कह रहा है कि हम अमेरिका से सावधान रहें और अमेरिका हमसे कह रहा है कि हम चीन पर जरा भी भरोसा न करें। लेकिन मेरा सोचना है कि भारत को चाहिए… Continue reading विदेश नीतिः मौलिक पहल जरुरी

भारत की विदेश नीति खत्म!

बहुत बुरा लगा अपनी ही प्रजा पर गोलियां चलाने वाली सेना के साथ भारतीय सेना की उपस्थिति की खबर सुन कर! उफ! क्या हो गया है भारत? हम किन मूल्यों, आदर्शों और संविधान में जीते हुए हैं? जो हमारा धर्म है, हमारा संविधान है, हमारी व्यवस्था है, उसमें कैसे यह संभव जो हम खूनी के… Continue reading भारत की विदेश नीति खत्म!

56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 56 इंची छाती वाले हैं और वे इसी अकड़ के साथ घरेलू राजनीति करते हैं। घरेलू राजनीति में उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के सहारे सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, गैर सरकारी संगठनों, मीडिया समूहों आदि को उनकी हैसियत दिखा कर रखी है। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बात आती है तो 56 इंची… Continue reading 56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

रूस-पाकः भारत हाशिए में

भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला अभी-अभी मास्को होकर आए हैं। कोविड के इस भयंकर माहौल में हमारे रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और विदेश सचिव को बार-बार रूस जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है

अमेरिका वापस आ गया है!

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दो रोज पहले अपनी विदेश नीति के बारे में पहला भाषण दिया। इससे साफ संकेत मिला कि बाइडेन के कार्यकाल में पिछले प्रशासन की तुलना में कई चीजें बदलेंगी।

पड़ौसी देशों के साथ सक्रियता

पिछले एक हफ्ते में हमारे विदेश मंत्रालय ने काफी सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्री जयशंकर, सुरक्षा सलाहकार अजित दोभाल और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला एक के बाद एक हमारे पड़ौसी देशों की यात्रा कर रहे हैं

राजनीतिक नेतृत्व की चुप्पी खतरनाक

नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद जब पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को सीधे कैबिनेट मंत्री बना कर विदेश मंत्रालय का जिम्मा दिया तो लग रहा था कि अब भारत की कूटनीतिक प्रो-एक्टिव होगी।

कोरोना के दौर में विदेश नीति

कोरोना के इस दौर में भारत की विदेश नीति का क्या हाल है ? इसमें शक नहीं कि भारत की केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना से लड़ने में जी-जान से जुटी हुई हैं।

ईरान मसले पर भारत के प्रति अमेरिकी रुख दुखद : कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा है कि ईरान पर कार्रवाई करने से पहले अमेरिका ने पिछले सप्ताह चीन तथा पाकिस्तान जैसे देशों से बात की लेकिन भारत से चर्चा करना उचित नहीं समझा, यह दुखद है और इसकी वजह मोदी सरकार की लचर विदेश नीति है।

सिर पीटे कुछ नहीं होना! क्यों?

मैं शुक्रवार को दिल्ली की दमघोटू हवा से बाहर निकला। और दिल्ली से दूर होने से प्राणवायु याकि जीने का जो फर्क महसूस किया तो विचार बना कि हम हिंदुओं के इतिहास का यही तो सबक है कि दिल्ली से जितना दूर रहो उतना अच्छा!