विदेश नीति में क्या होता हुआ?

भारत अपनी बदहाली, अपने सियासी गृहयुद्ध में ऐसा खोया है कि न दुनिया में भारत का मतलब बचा है और न वह खुद मतलब बनाने की हैसियत में हैं।

भारतीय विदेश नीति की अच्छी पहल

पड़ौसी देशों के बारे में इधर भारत ने काफी अच्छी पहल शुरु की हैं। अगस्त माह में अफगानिस्तान के बारे में हमारी नीति यह थी कि ‘लेटो रहो और देखते रहो’

विदेश नीति और भ्रम

अब इससे इस धारणा का क्या होगा कि भारत ने अपने रणनीतिक उद्देश्यों को अमेरिका के साथ जोड़ लिया है? अगर भारत के रणनीतिकारों में दूरदृष्टि हो, तो वे ताजा बिंदु से एक बेहतर विदेश नीति विकसित कर सकते हैँ।

विदेश नीतिः हमारी दो नई पहल

ढाई महिने से गिरती-लुढ़कती हमारी विदेश नीति अपने पावों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है, यह बात मेरे लिए विशेष खुशी की है।

भारत तमाशबीन क्यों बना हुआ है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने अलग-अलग मौकों पर अफगानिस्तान के बारे में जो भी कहा है, वह शतप्रतिशत सही है

जयशंकर के रहते भला पुरी क्यों ?

तो क्या माना जाए कि विदेश मंत्री के तौर पर एस जयशंकर प्रधानमंत्री की उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं कर पा रहे हैं? अगर ऐसा नहीं है तो फिर जयशंकर के रहते हरदीप सिंह पुरी की क्या जरूरत पड़ गई?

विदेश नीति और कूटनीति

रूस पाकिस्तान का करीबी बन जाए, तो उससे भारतीय विदेश नीति के कर्ताधर्तां को चिंता में डूब जाना चाहिए। विदेश नीति और कूटनीति का एक अहम मकसद यही होता है

भारत क्यों बने किसी का पिछलग्गू?

यह कोई विचित्र संयोग नहीं है कि अमेरिका के विदेश मंत्री भारत आए हुए हैं और पाकिस्तान के विदेश मंत्री चीन गए हुए हैं। दोनों का मकसद एक-जैसा ही है।

ब्लिंकेन से वार्ता की प्राथमिकताएं

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन अपनी पहली भारत यात्रा पर दिल्ली आ रहे हैं। दो दिन की इस यात्रा में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ दोपक्षीय वार्ता करेंगे।

Rajasthan : बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, कहा- कीमतें वापस ना ली तो भाजपा नेताओं के चेहरे काले…

जयपुर | Congress’s Protest on petrol/diesel prices : देशभऱ में कांग्रेस शासित राज्यों में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के विरोध में मार्च निकाला गया. राजस्थान में भी शनिवार को जयपुर में प्रदर्शन मार्च निकाल कर केन्द्र सरकार से बढ़ती महंगाई को रोकने और ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की मांग की गई. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से शहीद स्मारक तक रैली निकाली और वहां धरना दिया. डोटासरा ने कहा कि जब तक महंगाई नियंत्रित नहीं की जाती कांग्रेस, केन्द्र सरकार पर लगातार दबाव बनाती रहेगी. डोटासरा ने कहा केन्द्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार महंगाई, विदेश नीति के मुद्दे पर झूठे वादे करके सत्ता में आई लेकिन वह सभी मोर्चों पर विफल रही है. उन्होंने कहा कि महंगाई आसमान छू रही है लेकिन केन्द्र सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है. राजस्थान: कांग्रेस पार्टी ने महंगाई के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए जयपुर में पैदल मार्च निकाला। pic.twitter.com/5potwbNily — ANI_HindiNews (@AHindinews) July 17, 2021 सिलंडर की कीमतें नहीं हुआ वापस तो भाजपा नेताओं के चेहरे काले कर देंगे Congress’s Protest on petrol/diesel prices : परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि… Continue reading Rajasthan : बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, कहा- कीमतें वापस ना ली तो भाजपा नेताओं के चेहरे काले…

हमारी विदेश नीति की फिसलन

हमारी विदेश नीति आजकल बड़ी दुविधा में फंस गई है। एक तरफ चीन ने हमारे लिए कई फिसलपट्टियां लगा दी हैं और दूसरी तरफ हमारे दोनों दोस्त- इस्राइली और फलस्तीनी हमें कोस रहे हैं। हमारे विदेश मंत्रालय की घिग्घी बंधी हुई है, जबकि हमारा विदेश मंत्री एक ऐसा आदमी है, जो विदेश मंत्री बनने के पहले कई देशों में हमारा राजदूत और विदेश सचिव भी रह चुका है। जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवाल है, उनको ज्यादा दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हमारे ज्यादातर प्रधानमंत्री विदेशी मामलों के जानकर नहीं होते। वे अफसरों के लिखे भाषण पढ़ देते हैं और विदेशी नेताओं के साथ फोटो खिंचाने का मौका हाथ से निकलने नहीं देते। खैर, अभी तो हमारा ध्यान अफगानिस्तान पर होनेवाली उस त्रिराष्ट्रीय वार्ता ने खींचा है, जो चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हो रही है। उनके बीच यह चौथी वार्ता है। कितने आश्चर्य की बात है कि अफगानिस्तान की सबसे ज्यादा आर्थिक मदद करनेवाला देश, भारत की इस वार्ता में कोई भूमिका नहीं है। और मैं यह भी देख रहा हूं कि चीन हमें चपत लगाने का कोई मौका नहीं चूक रहा है। चपत भी प्यारी-सी ! पहले उसने ब्रिक्स की बैठक में भारत की तारीफ… Continue reading हमारी विदेश नीति की फिसलन

पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

भारत के विदेश मंत्री डा. जयशंकर आजकल अमेरिका के नेताओं, अफसरों और विदेश नीति विशेषज्ञों से गहन संवाद कर रहे हैं। यह बहुत सामयिक है, क्योंकि इस कोरोना-काल में सबका ध्यान महामारी पर लगा हुआ है और विदेश नीति हाशिए में सरक गई है। लेकिन चीन-जैसे राष्ट्र इसी मौके को अवसर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत के पड़ौसी राष्ट्रों और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन ने अपने पांव पसारने शुरु कर दिए हैं। पाकिस्तान के साथ चीन की इस्पाती-दोस्ती या लौह-मैत्री तो पहले से ही है। पाकिस्तान अब अफगान-संकट का लाभ उठाकर अमेरिका से भी सांठ-गांठ करना चाहता है, इसलिए उसके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल ही में एक ताजा बयान भी दिया है कि पाकिस्तान किसी खेमे में शामिल नहीं होना चाहता है याने वह चीन का चप्पू नहीं है लेकिन उसकी पुरजोर कोशिश है कि अमेरिका की वापसी के बाद वह अफगानिस्तान पर अपना पूर्ण वर्चस्व कायम कर ले। यों भी अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में पाकिस्तान की असीम दखलंदाजी है। कल ही हेलमंद घाटी में तालिबान के साथ घायल एक पाकिस्तानी फौजी अफसर की मौत हुई है। अफगानिस्तान आजाद रहे, भारत यही चाहता है। इसीलिए हमारे विदेश मंत्री की कोशिश है कि अमेरिका… Continue reading पड़ौसी देशः नई पहल जरुरी

सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

जिन्हें इतिहास की समझ है, वे जानते हैं कि हुक़्मरान जब-जब कलंदरी पर उतारू होते हैं, जनता भी तब-तब चीमटा बजाने लगती है। जिन्हें समझ कर भी यह इतिहास नहीं समझना, उनकी समझ को नमन कीजिए। लेकिन एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए। जनता जब अपनी पर आती है तो वह किसी गांधी-वांधी, पवार-फवार, अण्णा-केजरी की मोहताज़ नहीं होती। वह अपने नायक स्वयं निर्मित कर लेती है। मैं ने पहले भी कहा है और दोबारा कह रहा हूं कि इस साल की दीवाली गुज़रने दीजिए, उसके बाद सियासी हालात का ऊंट इतनी तेज़ी से करवट लेगा कि उसकी कुलांचें देख कर अच्छे-अच्छों की घिग्घी बंध जाएगी। जिन्हें लगता है कि नरेंद्र भाई ने अपनी मातृ-संस्था के प्रमुख मोहन भागवत के नीचे की कालीन इस तरह अपनी मुट्ठी में कर ली है कि जिस सुबह चाहेंगे, सरका देंगे, उनकी खुशफ़हमी अगली वसंत पंचमी आते-आते काफ़ूर हो चुकी होगी। कल नरेंद्र भाई मोदी को दोबारा भारत माता के माथे पर सवार हुए सात साल पूरे हो जाएंगे। अपने हर काम को करतब में तब्दील करने की ललक से सराबोर नरेंद्र भाई ने 2014 में दक्षेस देशों के शासन-प्रमुखों की मौजूदगी में भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री के तौर पर सिंहासन-सप्तपदी की थी और… Continue reading सिंहासन-सप्तपदी के सात बरस बाद

दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

जिस तरह से दूसरे कार्यकाल के दो साल में घरेलू मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अजेय होने और सब कुछ संभाल लेने वाले नेता की छवि टूटी और लोगों को लगा कि वे भी एक आम नेता की तरह हैं, जो किसी बड़े संकट में फेल हो सकते हैं तो उसी तरह दुनिया में डंका बजने का मिथक भी टूटा। ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने भाषणों से, उनकी पार्टी के आईटी सेल ने, उनके प्रवक्ताओं और समर्थकों ने यह प्रचार किया हुआ है कि पहली बार दुनिया में भारत की आवाज गंभीरता से सुनी जा रही है और यह मोदी की वजह से हुआ है। यह भी पढ़ें: भारतः ये दो साल! मोदी ने इसके लिए सबसे ज्यादा मेहनत की। अमेरिका के राष्ट्रपतियों से दोस्ती दिखाने से लेकर चीन के राष्ट्रपति को झूला झुलाने और रूस के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक वार्ता करने तक सब कुछ किया। उन्होंने अपनी वैश्विक छवि चमकाने के लिए दुनिया भर के देशों को पीपीई किट्स, मास्क आदि भिजवाए और जब वैक्सीन बन कर आ गई तो अपने लोगों को लगवाने की बजाय दुनिया के कई देशों को अनुदान में बांटने लगे। लेकिन इन सबका अंत नतीजा यह है कि भारत… Continue reading दुनिया में डंका बजने का मिथक टूटा

एक थे शास्त्री, एक हैं मोदी: दो विपदा, दो प्रधानमंत्री!

हम हिंदू इतिहास-याद्दाश्त में कच्चे हैं। आंखें मोतियाबिंद की मारी व बुद्धि मंद! सिर्फ वर्तमान के कुएं में जीते हैं। कितनों को भान है कि 1947 में आजादी के बाद भूख और भूखे पेट की विपदा कब थी? तो जवाब है

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