असली सरोकार और चुनावी प्राथमिकता
देश के नागरिकों के असली सरोकार अलग हैं और उनकी राजनीतिक चिंताएं या प्राथमिकताएं अलग हैं। यह पिछले 12 साल की राजनीतिक उपलब्धि है। पहले लोगों के जीवन की समस्या का रिफ्लेक्शन उनकी चुनावी प्राथमिकता में दिखता था। लोग सरकार से नाराज होते थे तो सरकार बदल देते थे। विपक्षी पार्टियों की रैलियों में नारा लगता था कि ‘जो सरकार महंगाई न रोके वो सरकार निकम्मी है’ और ‘जो सरकार निकम्मी है वो सरकार बदलनी है’। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। विपक्ष नारे तो लगा रहा है और लोग समझ भी रहे हैं कि सरकार महंगाई...