राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

न्यायमूर्ति ने हटाया परदा

सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति उज्जल भूइंया ने यह सटीक प्रश्न उठाया है कि किसी जज का एक से दूसरे हाई कोर्ट में सिर्फ इसलिए क्यों तबादला होना चाहिए कि उसने सरकार के लिए कोई ‘असुविधाजनक निर्णयदिया हो?

जब संभल के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का विवादित तबादला चर्चा में है, सुप्रीम कोर्ट ने जज उज्जल भूइंया ने उच्चतर न्यायपालिका के जजों के तबादले के पीछे की राजनीतिक कहानी पर से परदा हटा कर काफी कुछ उजाले में ला दिया है। न्यायमूर्ति भूइंया ने पूछा कि किसी जज का एक से दूसरे हाई कोर्ट में सिर्फ इसलिए क्यों तबादला होना चाहिए कि उसने सरकार के लिए कोई ‘असुविधाजनक निर्णय’ दिया हो? हालांकि न्यायमूर्ति ने कोई नाम नहीं लिया, लेकिन अनुमान लगाया गया है कि उनका इशारा बीते अक्टूबर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज अतुल श्रीधरन के तबादले की ओर था।

जस्टिस श्रीधरन ने कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में मध्य प्रदेश के एक मंत्री के बयान का संज्ञान लिया था। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने पहले उनका तबादला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट किया, लेकिन तुरंत ये फैसला बदल कर उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया। अब साफ है कि ऐसा केंद्र के “अनुरोध” पर किया गया। आम चर्चा है कि इस रूप में सरकार कॉलेजियम के तबादला संबंधी कई फैसलों के प्रभावित कर चुकी है। और जब उच्चतर न्यायपालिका में ये हाल हो, तो निचली अदालतों के बारे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है। सीजेएम सुधीर ने संभल की हिंसा के मामले में पुलिस अधिकारी पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। उसके कुछ ही दिन बाद उनका तबादला हो गया।

जस्टिस भूइयां ने उचित चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाएं भारतीय न्यायपालिका की साख पर बट्टा लगा रही हैं। उन्होंने कहा- ‘अगर हमने अपनी साख खो दी, तो न्यायपालिका में कुछ नहीं बचेगा। जज रहेंगे, अदालतें भी रहेंगी, मुकदमों पर फैसले भी होंगे, लेकिन दिल और आत्मा का लोप हो जाएगा।’ तमाम जजों को न्यायमूर्ति भूइयां की इन बातों पर भी गौर करना चाहिए कि न्यायापालिका के पास ना तो धन होता है, ना तलवार। उसमें लोगों का भरोसा ही उसकी कुल जमा-पूंजी है। बड़े परिदृश्य में देखें, तो मुद्दा सिर्फ न्यायपालिका नहीं है। सबको इसका ख्याल रखना चाहिए कि इसकी साख चूकने का अर्थ पूरी शासन व्यवस्था के औचित्य को संदिग्ध कर देगा।

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

19 − two =