‘टिपिंग प्वाइंट’ से बच पाएगा भारत?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाल में सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका अदालती प्रक्रिया से विश्वास उठ गया है। ..सिब्बल ने उल्लेख किया कि अदालत को मतदाताओं के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाने और जोड़ने के बारे में बार-बार सूचित किया गया, फिर भी उसने कोई राहत नहीं दी, जबकि बाद के ट्रिब्यूनल डेटा से पता चला कि बहुत से नामों को हटाना गलत था। कई ओर से खिंचाव और दबाव की शिकार हो रही भारत की संवैधानिक व्यवस्था का अंतिम खंभा भी इस परिघटना के दायरे में आ गया है। 12 अक्टूबर इस मायने में...