Supreme Court

  • नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की

    उच्चतम न्यायालय ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियों को अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए मंगलवार को रद्द कर दिया। न्यायालय के इस आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में आगामी पांच सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस लेने का ऐलान कर दिया। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां रद्द कर दीं।...

  • मौजूदा दौर के अनुरूप

    ताजा फैसला श्रमिक कल्याण की उस समझ के विपरीत है, जिससे प्रेरित होकर पांच दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय ने ही श्रमिक समर्थक परिभाषा तय की थी। ताजा निर्णय से बेशक मजदूर अधिकारों को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने मौजूदा दौर में प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक तय कर दिया है कि वैधानिक रूप से अब ‘कारखाना’ का मतलब क्या होगा? इस तरह 1978 में सात जजों की बेंच ने जो परिभाषा तय की थी, वह अब अमान्य हो गई है। उस फैसले को मजदूर अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक ठोस न्यायिक निर्णय समझा...

  • सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को दर्द रहित वैकल्पिक तरीकों से बदलने की याचिका खारिज की

    उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को फांसी के जरिए मौत की सजा देने के प्रावधान को खत्म करने और इसके स्थान पर कम दर्दनाक तरीका अपनाने की मांग करने वाली करीब नौ वर्ष पुरानी याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने हालांकि यह साफ कर दिया कि यदि भविष्य में वैज्ञानिक, चिकित्सा या व्यावहारिक साक्ष्यों के आधार पर यह साबित होता है कि फांसी की संवैधानिक वैधता का आधार बदल चुका है, तो यह फैसला भविष्य की संवैधानिक समीक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 23 सितंबर 1983 के 'दीना बनाम...

  • अर्धसैनिक बलों के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

    देश में बहुत सारी चीजें पहली बार हो रही हैं। यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारी औऱ कर्मचारी किसी कानून का विरोध करने के लिए अदालत पहुंचे हैं। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी पहले भी सरकार की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। वे हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता लेते हैं। उसमें भी सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की ओर से हड़ताल या प्रदर्शन की खबर नहीं के बराबर आती है। लेकिन केंद्र सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया है, जिसके विरोध में अर्धसैनिक बलों के करीब तीन हजार लोग, जिनमें अधिकारी और...

  • कोर्ट का मध्यम मार्ग

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यावहारिक अर्थ है कि बिना पर्यावरण मंजूरी लिए शुरू की गईं परियोजनाओं को बाद में हरी झंडी देने का आम रास्ता बंद किया गया है, लेकिन अनेक गलियां खुली रखी गई हैँ। बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के शुरू कर दी परियोजनाओं को बाद में हरी झंडी देने के लिए 2021 में जारी ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऊपर से केंद्र और कॉरपोरेट सेक्टर के लिए भले बड़ा झटका मालूम पड़े, लेकिन असल में न्यायालय ने बीच का रास्ता निकाला है। इससे सिर्फ यह होगा कि ऐसी परियोजनाओं को सामान्य आदेश...

  • सीजेपी सुप्रीम कोर्ट की शर्त से सहमत नहीं

    नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से शर्त लगाए जाने से कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी सहमत नहीं है। उसने कहा है कि कोर्ट ने जो कहा वह अपनी जगह है लेकिन सरकार के साथ उनका जो समझौता हुआ है उसमें सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस करने की बात हुई है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनको सुप्रीम कोर्ट की शर्तें मंजूर नहीं हैं और सरकार को उनकी मांगों को बिना किसी किंतु परंतु के पूरा करना चाहिए। असल में...

  • सुप्रीम कोर्ट का बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को रिहा करने के निर्देश

    उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने पर गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए उन सभी छात्रों को मंगलवार को रिहा करने का आदेश दिया जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार और असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा केरल सरकारों से जवाब मांगा है। न्यायालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिस कर्मियों को आई चोटों के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। न्यायालय ने इस मामले में अंतरिम निर्देशों की एक श्रृंखला जारी करते हुए...

  • पुलिस ‘बर्बरता’ को सुप्रीम कोर्ट ने गलत बताया

    नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ प्रदर्शन या आंदोलन होने के आधार पर पुलिस की बर्बरता या सख्ती को सही नहीं ठहराया जा सकता। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर...

  • सुप्रीम कोर्ट में 27 जुलाई को सुनवाई होगी

    नई दिल्ली। जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस की कार्रवाई के वीडियो देखने से इनकार करने और समय नहीं होने की बात कहने के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार है। नीट यूजी पेपर लीक मामले में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादती के आरोपों वाली दो अलग अलग याचिकाओं पर 27 जुलाई को सुनवाई करने पर अदालत ने सहमति जताई है। यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने उठाया गया। पेपर लीक मामला उठाए जाने के...

  • अदालत की कार्यवाही पोस्ट करने पर रोक

    नई दिल्ली। पारदर्शिता के लिए उच्च अदालतों की कार्यवाही की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग शुरू हुई और इसे बहुत बड़ा कदम माना गया। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही सोशल मीडिया में पोस्ट करने पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से अदालत की कार्यवाही पोस्ट किए जाने के बाद कुछ बातों को लेकर विवाद हुआ और ज्यादा चर्चा हुई, जिसकी वजह से अदालत ने यह फैसला किया। अदालत ने कार्यवाही सोशल मीडिया में पोस्ट करने पर रोक लगाई है लेकिन कार्यवाही की न्यूज रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगाई गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत...

  • सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

    नई दिल्ली। सोमवार, 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने और आंसू गैस के गोले छोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने न सिर्फ सुनवाई से इनकार किया, बल्कि यह भी कहा कि अदालत के पास ऐसे वीडियो देखने के लिए समय नहीं है। अदालत ने याचिका दायर करने वाले वकील से यह भी कहा कि वे समय बरबाद कर रहे हैं। असल में बुधवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच...

  • उचित प्रक्रिया पर जोर

    जब हर व्यक्ति की नागरिकता को लेकर अनिश्चय खड़ा कर दिया गया है, सुप्रीम कोर्ट की ये व्यवस्था बेहद अहम है कि नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से “उचित, विधि-सम्मत और विवेकपूर्ण” होनी चाहिए। जिस समय नरेंद्र मोदी सरकार ने हर भारतीय की नागरिकता को सवालों के घेरे में डाल दिया है, असम के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राहत बन कर आया है। ताजा संदर्भ में कोर्ट की ये टिप्पणी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि ‘सरकार की कोई मनमानी कार्रवाई सिर्फ इसलिए (न्यायिक) संरक्षण पाने का दावा नहीं कर सकती कि उसे वैधानिक जामा पहना दिया गया...

  • अपनी इज्जत, अपने हाथ!

    क्या न्यायपालिका का रुख अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है और वह खुद को नागरिकों का ‘सेवक’ समझने लगी है? अथवा, उसे अहसास है कि असंतोष की अभिव्यक्ति को दंडित करने की कोशिश विपरीत परिणाम देगी? सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के सामने अपनी याचिका की खुद पैरवी के लिए पेश हुए एक व्यक्ति ने जजों को “मिस्टर जुडिशियल सर्वेंट” कह कर संबोधित किया। कहा कि नागरिक होने के नाते ‘मैं’ संप्रभु हूं और आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें। इसके बाद उस व्यक्ति ने...

  • सुप्रीम कोर्ट में वकील का हंगामा

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस का नाम लेकर अपशब्द कहे और हंगामा किया। हालांकि बाद में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हंगामा करने वाले वकील को माफ करते हुए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। लेकिन बार एसोसिएशन की ओर से वकील के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हंगामा करने वाले वकील का नाम प्रबल प्रताप है और वह उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। शुक्रवार को वकील प्रबल प्रताप की याचिका पर सुनवाई थी, जिसके दौरान उसने हंगामा किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपशब्द कहे और फाइल भी फेंकी। इस दौरान...

  • अदालत के सवाल और असली फैसले

    बहुत समय पहले मशहूर कानूनविद् एजी नूरानी ने ‘फ्रंटलाइन’ पत्रिका में ‘टॉकिंग जजेज’ शीर्षक से एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज कल अदालतों में सुनवाई के दौरान जज बहुत बोलने लगे हैं। जजों का काम बोलना नहीं होता है। नूरानी का कहना था कि जज बोल ज्यादा रहे हैं और उनके फैसलों की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। पहले के विद्वान जज जैसे फैसले लिखते थे, जो नजीर बनती थी वैसे फैसले अब नहीं हो रहे हैं। एजी नूरानी तो अब रहे नहीं, रहते तो देखते कि आज कल अदालतों में क्या हो रहा है।...

  • वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेजों में आधार के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई। इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान के सबूत के तौर पर हो न कि नागरिकता, निवास, पते या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर।   भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों व केंद्रशासित प्रदेशों, ईसीआई और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी...

  • गृहिणियां ‘नेशन बिल्डर’, ‘घरेलू देखभाल के नुकसान’ का आर्थिक मूल्य 30,000 रुपये प्रति माह : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के अवैतनिक घरेलू श्रम को महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक मान्यता देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के निर्णय से दुर्घटना पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलने में सहायता मिलेगी और समाज में गृहिणियों के योगदान को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।  सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गृहिणी का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानव संसाधन विकास और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए उन्हें केवल 'होममेकर' कहने के बजाय 'नेशन बिल्डर' कहा जाना चाहिए। जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने दुर्घटना की शिकार गृहिणियों...

  • मुकदमों के समयबद्ध निपटारे की याचिका खारिज

    नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने हल्के फुल्के अंदाज में ही सही लेकिन यह माना है कि मुकदमों का समयबद्ध निपटारा करने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने माना है कि इससे वकीलों के साथ पंगा हो सकता है। असल में मुकदमों के समयबद्ध निपटारे का आदेश देने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में देश भर की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में स्थगन मांगने पर भी दिशा निर्देश बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पर सुनवाई से इनकार कर...

  • नियुक्ति का पैनल बदलने से क्या होगा?

    मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का जो कानून बना है उस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस पर आने वाले फैसला दिलचस्प होगा। लेकिन उससे पहले सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सरकार के सामने एक बड़ा अहम मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तीन सदस्यों की कमेटी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का फैसला करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ साथ एक कैबिनेट मंत्री होगा तो फिर हमेशा सरकार के पास दो का बहुमत होगा। फिर इसकी निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित हो पाएगी? यही सवाल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी...

  • अपेक्षा के अनुरूप ही

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला उचित होने के बावजूद उससे बुल्डोजरी अंदाज में कराए गए एसआईआर पर उठे सवालों का जवाब नहीं मिला है। ना ही इससे निर्वाचन आयोग की मंशा पर जताए गए शक दूर होंगे। मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण संवैधानिक रूप से उचित है, इसको लेकर कभी किसी को शक नहीं था। निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया संपन्न कराने का अधिकार है, इस पर भी कोई भ्रम कभी नहीं रहा। अब सुप्रीम कोर्ट ने यही व्यवस्था दी है, तो वह अपेक्षा के अनुरूप ही है। विवाद इसे कराने के लिए चुने गए वक्त पर था। बिहार में...

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