Supreme Court

  • सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

    नई दिल्ली। सोमवार, 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने और आंसू गैस के गोले छोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने न सिर्फ सुनवाई से इनकार किया, बल्कि यह भी कहा कि अदालत के पास ऐसे वीडियो देखने के लिए समय नहीं है। अदालत ने याचिका दायर करने वाले वकील से यह भी कहा कि वे समय बरबाद कर रहे हैं। असल में बुधवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच...

  • उचित प्रक्रिया पर जोर

    जब हर व्यक्ति की नागरिकता को लेकर अनिश्चय खड़ा कर दिया गया है, सुप्रीम कोर्ट की ये व्यवस्था बेहद अहम है कि नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से “उचित, विधि-सम्मत और विवेकपूर्ण” होनी चाहिए। जिस समय नरेंद्र मोदी सरकार ने हर भारतीय की नागरिकता को सवालों के घेरे में डाल दिया है, असम के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राहत बन कर आया है। ताजा संदर्भ में कोर्ट की ये टिप्पणी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि ‘सरकार की कोई मनमानी कार्रवाई सिर्फ इसलिए (न्यायिक) संरक्षण पाने का दावा नहीं कर सकती कि उसे वैधानिक जामा पहना दिया गया...

  • अपनी इज्जत, अपने हाथ!

    क्या न्यायपालिका का रुख अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है और वह खुद को नागरिकों का ‘सेवक’ समझने लगी है? अथवा, उसे अहसास है कि असंतोष की अभिव्यक्ति को दंडित करने की कोशिश विपरीत परिणाम देगी? सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के सामने अपनी याचिका की खुद पैरवी के लिए पेश हुए एक व्यक्ति ने जजों को “मिस्टर जुडिशियल सर्वेंट” कह कर संबोधित किया। कहा कि नागरिक होने के नाते ‘मैं’ संप्रभु हूं और आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें। इसके बाद उस व्यक्ति ने...

  • सुप्रीम कोर्ट में वकील का हंगामा

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस का नाम लेकर अपशब्द कहे और हंगामा किया। हालांकि बाद में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हंगामा करने वाले वकील को माफ करते हुए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। लेकिन बार एसोसिएशन की ओर से वकील के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हंगामा करने वाले वकील का नाम प्रबल प्रताप है और वह उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। शुक्रवार को वकील प्रबल प्रताप की याचिका पर सुनवाई थी, जिसके दौरान उसने हंगामा किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपशब्द कहे और फाइल भी फेंकी। इस दौरान...

  • अदालत के सवाल और असली फैसले

    बहुत समय पहले मशहूर कानूनविद् एजी नूरानी ने ‘फ्रंटलाइन’ पत्रिका में ‘टॉकिंग जजेज’ शीर्षक से एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज कल अदालतों में सुनवाई के दौरान जज बहुत बोलने लगे हैं। जजों का काम बोलना नहीं होता है। नूरानी का कहना था कि जज बोल ज्यादा रहे हैं और उनके फैसलों की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। पहले के विद्वान जज जैसे फैसले लिखते थे, जो नजीर बनती थी वैसे फैसले अब नहीं हो रहे हैं। एजी नूरानी तो अब रहे नहीं, रहते तो देखते कि आज कल अदालतों में क्या हो रहा है।...

  • वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेजों में आधार के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई। इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान के सबूत के तौर पर हो न कि नागरिकता, निवास, पते या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर।   भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों व केंद्रशासित प्रदेशों, ईसीआई और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी...

  • गृहिणियां ‘नेशन बिल्डर’, ‘घरेलू देखभाल के नुकसान’ का आर्थिक मूल्य 30,000 रुपये प्रति माह : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के अवैतनिक घरेलू श्रम को महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक मान्यता देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के निर्णय से दुर्घटना पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलने में सहायता मिलेगी और समाज में गृहिणियों के योगदान को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।  सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गृहिणी का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानव संसाधन विकास और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए उन्हें केवल 'होममेकर' कहने के बजाय 'नेशन बिल्डर' कहा जाना चाहिए। जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने दुर्घटना की शिकार गृहिणियों...

  • मुकदमों के समयबद्ध निपटारे की याचिका खारिज

    नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने हल्के फुल्के अंदाज में ही सही लेकिन यह माना है कि मुकदमों का समयबद्ध निपटारा करने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने माना है कि इससे वकीलों के साथ पंगा हो सकता है। असल में मुकदमों के समयबद्ध निपटारे का आदेश देने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में देश भर की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में स्थगन मांगने पर भी दिशा निर्देश बनाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पर सुनवाई से इनकार कर...

  • नियुक्ति का पैनल बदलने से क्या होगा?

    मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का जो कानून बना है उस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस पर आने वाले फैसला दिलचस्प होगा। लेकिन उससे पहले सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सरकार के सामने एक बड़ा अहम मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तीन सदस्यों की कमेटी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का फैसला करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ साथ एक कैबिनेट मंत्री होगा तो फिर हमेशा सरकार के पास दो का बहुमत होगा। फिर इसकी निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित हो पाएगी? यही सवाल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी...

  • अपेक्षा के अनुरूप ही

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला उचित होने के बावजूद उससे बुल्डोजरी अंदाज में कराए गए एसआईआर पर उठे सवालों का जवाब नहीं मिला है। ना ही इससे निर्वाचन आयोग की मंशा पर जताए गए शक दूर होंगे। मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण संवैधानिक रूप से उचित है, इसको लेकर कभी किसी को शक नहीं था। निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया संपन्न कराने का अधिकार है, इस पर भी कोई भ्रम कभी नहीं रहा। अब सुप्रीम कोर्ट ने यही व्यवस्था दी है, तो वह अपेक्षा के अनुरूप ही है। विवाद इसे कराने के लिए चुने गए वक्त पर था। बिहार में...

  • ईसीआई की संवैधानिक शक्तियों के दायरे में हैं एसआईआर: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लागू करने का निर्णय लिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह पुनरीक्षण चुनाव आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के भीतर है और इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखना है।  भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने फैसला सुनाया कि एसआईआर प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए), 1950 या उसके तहत बनाए गए नियमों का उल्लंघन नहीं करती। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324...

  • विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, एसआईआर संविधान की कसौटी पर खरा

    बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में निर्णय दिया।  याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर की वैधता को चुनौती दी गई थी। अदालत को यह तय करना था कि क्या चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत वर्तमान स्वरूप में एसआईआर कराने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण सवालों पर...

  • एनटीए को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

    नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए हुई नीट की परीक्षा के पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। पहले दिन की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने परीक्षा कराने वाली केंद्र सरकार की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीओ को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘यह दुखद है कि एनटीए ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया’। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सोमवार को फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की ओर से...

  • अदालत की मौखिक टिप्पणियों और फैसलों का फर्क

    सुप्रीम कोर्ट की दो जजों जस्टिस उज्ज्वल भुइंया और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने सोमवार को जमानत के बारे में बड़ी टिप्पणी की। दोनों माननीय जजों ने कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। उन्होंने यह भी कहा कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून यानी यूएपीए के मामले में भी यही नियम लागू होता है। यानी यूएपीए मामले में भी जमानत का नियम होना चाहिए और अपवाद के तौर पर ही किसी को जेल भेजा जाना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए दोनों जजों ने जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत खारिज होने का भी जिक्र...

  • लाचारी जनित निर्ममता

    आवारा कुत्तों से बेशक इनसान की सुरक्षा खतरे में पड़ी है। चूंकि इसका कोई संवेदनशील और व्यावहारिक समाधान सामने नहीं है, अतः कोर्ट एक विवादास्पद निर्णय पर पहुंचा है। एक तरह से यह लाचारी जनित फैसला है। सर्वोच्च न्यायालय ने रेबीज या किसी अन्य गंभीर रोगों से ग्रस्त आवारा कुत्तों को मार डालने का रास्ता साफ कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने दो टूक कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों- विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले अगस्त में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर....

  • सुप्रीम कोर्ट के अंतर्विरोध

    सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ही आलोचना आए, यह असाधारण है। इससे खालिद और इस्लाम के लिए क्यूरेटिव पीटीशन डालने का रास्ता खुला है। मगर मामला उससे कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच की बेंच ने एक पैमाना तय किया, मगर उसके बाद दो जजों की खंडपीठ ने उसकी अनदेखी कर दी। अब दो न्यायाधीशों की एक अलग पीठ ने उन दो जजों वाली बेंच के निर्णय की आलोचना की है और तीन न्यायाधीशों वाली पूर्व बेंच के निर्णय के अनुरूप आगे बढ़ी है। इससे जाहिर होता है कि सर्वोच्च...

  • खालिद की जमानत पर सुप्रीम मतभेद

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के मामले में पुराने सिद्धांत को दोहराया है और कहा है कि आरोपियों को जमानत मिलनी चाहिए और जेल भेजना एक अपवाद की तरह होना चाहिए। इस क्रम में सर्वोच्च अदालत ने जमानत के मामले में अपने ही एक फैसले से असहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उमर खालिद की जमानत खारिज किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि फैसला देने वाली बेंच ने अदालत की बड़ी बेंच के फैसले का सम्मान नहीं किया। दिल्ली दंगे की साजिश से जुड़े मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत...

  • चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सफाई दी

    नई दिल्ली। आमतौर पर देश के नेताओं को अपने बयानों पर सफाई देनी पड़ती है या यह कहना पड़ता है कि उनकी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। संभवतः पहली बार हुआ है कि देश के चीफ जस्टिस को यह बात कहनी पड़ रही है। वह सुनवाई के दौरान अदालत में कही गई बात पर। उन्होंने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘मेरी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी,...

  • सुप्रीम कोर्ट में दो दिन वर्क फ्रॉम होम

    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हफ्ते में दो दिन घर से कामकाज की अनुमति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोलियम उत्पाद किफायत से खर्च करने की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कामकाज को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए। अब सर्वोच्च अदालत के हर विभाग के कर्मचारी दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर रहेंगे। साथ ही यह भी फैसला किया गया है कि सभी जज कार पूल करेंगे। यानी कई जज कार साझा करके एक साथ अदालत पहुंचेंगे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक...

  • चुनावी याचिकाओं से कुछ भी हासिल नहीं होगा

    सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को नई याचिकाएं दायर करने की अनुमति दे दी है। ममता की पार्टी के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल में 31 सीटें ऐसी हैं, जहां जीत और हार का अंतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में काटे गए वोट से कम है। संख्या को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन अभी तक बना हुआ है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 49 सीटों पर एसआईआर में काटे गए वोट से कम अंतर से नतीजा आय़ा है। इसमें से 26 सीटें...

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