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आक्रामक तेवर में रूस

ByNI Editorial,
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Vladimir Putin Russian presidential elections
Vladimir Putin Russian presidential elections

चाहे यूक्रेन हो या फिलस्तीन- यही जाहिर हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका निष्प्रभावी हो चुकी है। ऐसे में दुनिया के तीसरे विश्व युद्ध की तरफ जाने की चर्चा हर रोज अधिक तेज होती जा रही है।

मास्को में पिछले हफ्ते हुए खूंखार आतंकवादी हमले ने रूस के रुख में अचानक अति आक्रामकता ला दी है। इस कारण अब यूक्रेन युद्ध एवं पश्चिमी देशों के साथ चल रहे रूस के टकराव में बड़ा परिवर्तन आने की आशंका पैदा हो गई है। एक संगीत कॉन्सर्ट के दौरान हुए हमले में तकरीबन डेढ़ सौ लोग मारे गए। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने तुरंत इसके लिए आईएसआईएस को दोषी ठहरा। उधर एक बयान भी सामने आया, जिसे आईएसआईएस का बताया गया और जिसमें इस आतंकवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली। मगर रूस ने इस पर यकीन करने से इनकार किया है।

हमले के अगले ही दिन इसमें शामिल रहे चार आतंकवादियों समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। रूस ने कहा है कि उनसे पूछताछ और अपनी अन्य जांच के आधार पर यह तय करेगा कि हमलावरों को निर्देश कहां से मिला। चूंकि आतंकवादी यूक्रेन भागने की कोशिश करते समय पकड़े गए, इसलिए रूस में आम राय यही है कि घटना के पीछे यूक्रेन का हाथ है और इसकी साजिश में संभवतः पश्चिमी एजेंसियां भी शामिल रही हैं।

इसीलिए रूस ने यूक्रेन पर हमलों में अचानक तेजी ला दी है। राजधानी कीव पर दागी गई मिसाइलों में सोमवार को भारी क्षति पहुंची। यह पहली बार है, जब क्रेमलिन के प्रवक्ता जारी घटनाक्रम को युद्ध कहकर संबोधित किया है। वरना, रूस 24 फरवरी 2022 को शुरू हुए हमलों को विशेष सैनिक कार्रवाई कहता रहा है। रूस के रुख में आए इस बदलाव से युद्ध के और व्यापक रूप लेने और धीरे-धीरे उसके नए क्षेत्रों में फैलने की आशंका पैदा हो गई है।

यह एक खतरनाक स्थिति है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब ऐसे हालात बन रहे हों, कोई ऐसी शक्ति या एजेंसी नहीं है, जो मध्यस्थ की भूमिका निभाकर आग को ठंडा कर सके। चाहे यूक्रेन हो या फिलस्तीन- यही जाहिर हुआ है कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका निष्प्रभावी हो चुकी है। ऐसे में दुनिया के तीसरे विश्व युद्ध की तरफ जाने की चर्चा हर रोज अधिक तेज होती जा रही है। इस बीच विश्व का विवेकशील जनमत लाचार दिख रहा है।

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