कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हिंदू मंदिर के पास हुई हिंसा को अस्वीकार्य बताया है। लेकिन उनकी जिम्मेदारी सिर्फ इसी से पूरी नहीं हो जाती। उन्हें इस शिकायत को दूर करना चाहिए कि कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों को संरक्षण दिया गया है।
कनाडा में सड़कों पर भारतीय मूल के लोग मजहबी पहचान के आधार पर लड़ने-भिड़ने लगें, तो समझा जा सकता है कि वहां स्थिति कितनी खतरनाक बन गई है। वैसे भी गुजरे सवा साल में भारत- कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में बढ़ी टकराहट ने वहां रहने वाले लाखों भारतवंशियों को आशंकित कर रखा है। रविवार को इसमें नया अध्याय जुड़ा, जब ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर के बाहर खालिस्तान समर्थक सिख पहुंच गए, जब वहां भारतीय वाणिज्य दूतवास का शिविर लगा हुआ था। खालिस्तान समर्थकों की नारेबाजी पर हिंदू समुदाय के लोगों ने आपत्ति की, जिस पर झगड़ा शुरू हो गया। कनाडा पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जो सभी हिंदू समुदाय के हैं।
इस घटनाक्रम ने भावनाओं में और उबाल ला दिया है। घटना पर पहले कनाडा स्थित भारतीय उच्चायोग, फिर भारतीय विदेश मंत्रालय, और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान जारी किया। मोदी ने कहा- “मैं कनाडा में हिंदू मंदिर पर जानबूझ कर किए गए हमले की कड़ी निंदा करता हूं। हमारे राजनयिकों को डराने के कायरतापूर्ण प्रयास भी उतने ही भयावह हैं।” इसके पहले भारतीय उच्चायोग ने “भारत विरोधी तत्वों के हमले” की निंदा की थी। स्पष्ट है, भारत सरकार ने घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। बहरहाल, प्रमुख मुद्दा यह है कि कनाडा में भारतवंशियों के बीच ऐसे विस्फोटक हालात क्यों बनते जा रहे हैं और अब समाधान क्या है?
क्या कनाडावासी भारतीय मूल के लोगों में फिर से आपसी संवाद कायम करना संभव है, ताकि मतभेदों के बावजूद वे हिंसा का शिकार ना बनें? ऐसे प्रयासों में दोनों देशों की सरकारों की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर के पास हुई हिंसा को अस्वीकार्य बताते हुए शांति की अपील की है। लेकिन उनकी जिम्मेदारी सिर्फ इसी से पूरी नहीं हो जाती। उन्हें भारतवंशियों के मन में बैठी इस शिकायत का समाधान निकालना चाहिए कि उनकी सरकार कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों को संरक्षण देती है। उधर भारत सरकार से अपेक्षा है कि वह सभी समुदायों की तरफ बोले और कनाडा में सामुदायिक शांति के पक्ष में समझौताविहीन संदेश दे।
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Image Source: ANI

