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युद्ध क्षेत्र के जोखिम

भारतीय नाविकों के सामने भी नौकरी की मजबूरी है, जिससे जहाज मालिकों का निर्देश मानने के लिए वे विवश बने हुए हैं। जबकि फारस की खाड़ी, लाल सागर, और काला सागर में जोखिम बढ़ता जा रहा है।

लाल सागर में यमन के पास भारतीय झंडे वाला एक व्यावसायिक जहाज डूब गया। राहत की बात है कि जहाज पर सवार 14 नाविकों को बचा लिया गया, जिनमें 13 भारतीय हैं। भारतीय जहाज एसएसवी फैज नूर ओलिया पर यमन के हुदैदा/ मोखा बंदरगाह के पास मिसाइल अथवा ड्रोन से हमला हुआ। हमला किसने किया, तुरंत यह मालूम नहीं हो सका, लेकिन यमन के पास इस जलमार्ग में जहाजों को अक्सर अंसारुल्लाह (हुती) विद्रोही निशाना बनाते रहे हैं। अंसारुल्लाह ने लाल सागर में मौजूद बाब-ए-मंदाब जल मार्ग को आम नौवहन के लिए बंद कर रखा है। इसके पहले खाड़ी में पांच महीनों से जारी युद्ध के दौरान होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर हुए हमलों में कम-से-कम 14 भारतीय नाविक मारे जा चुके हैं।

इस बीच पिछले महीने काला सागर से गुजरने का प्रयास भी भारतीय नाविकों के लिए जानलेवा साबित हुआ। बीते 18 जुलाई और 19 जुलाई को दो हमलों में पांच भारतीय नाविक मारे गए। ये हमले यूक्रेन ने किए। ऐसे मामलों में भारत सरकार की प्रतिक्रिया “कड़ी निंदा” करने तक सीमित रही है। पिछले महीने यह खबर जरूर मीडिया में आई थी कि भारत सरकार ने शिपिंग कंपनियों को खतरनाक इलाकों में जाने वाले जहाजों में भारतीय नाविकों की ड्यूटी ना लगाने का निर्देश दिया है। ऐसे कथित निर्देश के औचित्य पर तभी कई सवाल उठे थे। बहरहाल, अब यह साफ हो चुका है कि अगर सचमुच वैसा कोई दिशा-निर्देश दिया गया था, तो वह बेअसर साबित हुआ है।

तमाम नाविकों की तरह भारतीय नाविकों के सामने भी नौकरी की मजबूरी है, जिससे जहाज मालिकों का निर्देश मानने के लिए वे विवश हैं। जबकि फारस की खाड़ी, लाल सागर, और काला सागर में जोखिम बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के युद्ध में अब सबसे बड़ा मसला होरमुज का ही रह गया है, जिस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए ईरान अडिग है। उधर हूतियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई छिड़ने से लाल सागर में भी खतरा बढ़ा है। इन सबके बीच भारतीय नाविकों को कैसे बचाया जाए, यह सवाल रोज अधिक बड़ा होता चला गया है।

By NI Editorial

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