nayaindia pathan movie review देश का‘पठान’ और क्या गजब उत्साह!
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देश का‘पठान’ और क्या गजब उत्साह!

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केवल तीन दिन में तीन सौ करोड़ के पार। ‘पठान’ की रिलीज से पहले बॉलीवुड के लिए ये आंकड़े कल्पनातीत थे। लेकिन कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण इस फिल्म के प्रति लोगों का उत्साह है। आपको अपनी याददाश्त पर जोर डालना पड़ेगा कि पिछली बार आपने किसी फिल्म का ऐसा स्वागत कब देखा था। दर्शकों का यह वैसा ही उत्साह है जो राजेश खन्ना के तूफानी स्टारडम के तीन-चार सालों में या अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन वाली कुछ फिल्मों को लेकर दिखा था

वे 2009 के मार्च महीने के शुरूआती दिन थे। लोकसभा चुनाव की गहमागहमी बस मचने ही वाली थी। उन दिनों एक खबर आई कि भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी के विरुद्ध कांग्रेस जिन लोगों को खड़ा करने पर विचार कर रही है उनमें फिल्म अभिनेता शाहरुख खान भी हैं। उस चुनाव में आडवाणी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। शायद उन्हें अपनी ही सीट पर घेरने की गरज से कांग्रेस में किसी या किन्हीं नेताओं ने ऐसे कुछ नाम सोचे होंगे और किसी पत्रकार को बता दिया होगा। एक बार नई दिल्ली में राजेश खन्ना के कारण आडवाणी केवल डेढ़ हजार वोट से जीत पाए थे, इसलिए भी शाहरुख का नाम आगे किया गया होगा। लेकिन इस खबर पर एक साहब ने पूरे विश्वास से कहा था कि शाहरुख नहीं लड़ेगा, क्योंकि जैसी उसकी ब्रांडिंग है उसके हिसाब से वह अपने करियर में अभी कम से कम दस हजार करोड़ और कमा सकता है, तो वह क्यों अपनी ब्रांडिंग खतरे में डालेगा?

जिन साहब ने यह दावा किया था वे न कोई नेता थे और न कोई पत्रकार, लेकिन वे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब थे, संभव है कि आज भी हों। बहरहाल, इस प्रकरण के इतने साल बाद, अभी हाल में वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने शाहरुख को दुनिया का तीसरा सबसे अमीर अभिनेता बताया है, करीब छह हजार करोड़ रुपए की संपत्ति वाला। उन्हीं शाहरुख की ‘पठान’ की सफलता पिछले कई दिनों से देश की एक प्रमुख खबर बनी हुई है।

केवल तीन दिन में तीन सौ करोड़ के पार। ‘पठान’ की रिलीज से पहले बॉलीवुड के लिए ये आंकड़े कल्पनातीत थे। लेकिन कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण इस फिल्म के प्रति लोगों का उत्साह है। आपको अपनी याददाश्त पर जोर डालना पड़ेगा कि पिछली बार आपने किसी फिल्म का ऐसा स्वागत कब देखा था। दर्शकों का यह वैसा ही उत्साह है जो राजेश खन्ना के तूफानी स्टारडम के तीन-चार सालों में या अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन वाली कुछ फिल्मों को लेकर दिखा था या फिर ‘शोले’ या ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी सर्वकालीन हिट के लिए देखा गया था। मगर इन अभिनेताओं और इन फिल्मों का कोई विरोध नहीं कर रहा था। ‘पठान’ की कामयाबी इस लिहाज से और ज्यादा बड़ी है कि उसने एक व्यापक और तीखे विरोध का मुकाबला किया है। ऐसा विरोध जो प्रधानमंत्री के टोकने के बाद भी नहीं रुका।

कुछ लोगों का मानना है कि क्योंकि ‘पठान’ का विरोध हो रहा है इसलिए प्रतिक्रिया स्वरूप इस फिल्म को देखने ज्यादा लोग आ रहे हैं। लेकिन अगर ऐसा होता तो वायकॉम18 और आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ क्यों पिटती? वैसे इंटरनेट मूवी डेटाबेस यानी आईएमडीबी पर ‘पठान’ को 6.8 की रेटिंग मिली है जो कि औसत मानी जाती है। 49.3 प्रतिशत लोगों ने इसे पूरे अंक यानी 10 की रेटिंग दी, मगर बाकी ने कम अंक दिए और 34.3 फीसदी लोगों ने तो केवल 1 रेटिंग दी। यह कम रेटिंग भी विरोध का नतीजा हो सकती है। दीपिका पादुकोन के लिबास के जिस रंग और उनके जिन दृश्यों को लेकर बवाल उठा था उन्हें हटा दिए जाने के बाद भी विरोध जारी है। कई जगह मारपीट और तोड़फोड़ भी हुई है। फिर भी यह फिल्म रिकॉर्ड तोड़ने में जुटी है।

कहने को यह सफलता यशराज फिल्म्स, निर्देशक सिद्धार्थ आनंद या दीपिका, जॉन अब्राहम या फिल्म के दूसरे कलाकारों और सलमान खान की भी है जो कुछ मिनट के लिए ‘पठान’ में अवतरित हुए और शाहरुख को अपनी ‘टाइगर’ सीरीज़ की अगली फिल्म में आने के लिए आमंत्रित भी कर गए। मगर जहां तक विरोध की बात है तो उसका सामना मानो अकेले शाहरुख खान को करना पड़ा है। और शाहरुख ने पूरी शालीनता से इसे झेला है। देशभक्ति में पिरोई हुई अपनी इस पहली खालिस एक्शन फिल्म को लेकर वे इस कदर आश्वस्त थे कि रात दो बजे उन्होंने असम के मुख्यमंत्री को फोन किया कि प्लीज़ थिएटरों में तोड़फोड़ मत होने दीजिए।

कभी कोई फिल्म ऐसी होती है जिसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं और कभी कोई कलाकार ऐसा होता है जो बच्चे, जवान और बूढ़े सभी का लाड़ला बन जाता है। ‘पठान’ के मामले में फिल्म और शाहरुख दोनों को ज्यादातर दर्शक पसंद कर रहे हैं। इस फिल्म ने न केवल शाहरुख के करियर पर चार साल से मंडरा रहे बादल हटा दिए हैं बल्कि इसकी वजह से बॉलीवुड का लुप्त होता आत्मविश्वास भी लौट सकता है। शाहरुख की दो और फिल्में ‘जवान’ और ‘डंकी’ भी इसी साल रिलीज़ होंगी। ‘पठान’ के चलते इन फिल्मों के प्रति भी लोगों का नज़रिया अब बदल जाएगा। इसीलिए कहा जाता है कि सफलता का कोई विकल्प नहीं होता।

फिल्मों का सफ़र भी हमारे जीवन जैसा ही है। वैसी ही धूप और छांव वहां भी है। साल भर पहले अक्षय कुमार और रणवीर सिंह देश के सबसे सफल अभिनेता गिने जा रहे थे। अपनी कई फिल्में पिटने के बाद, आज शाहरुख के मुकाबले वे कितने पीछे लग रहे हैं। कौन जाने, कल फिर वे आगे बढ़ जाएं और शाहरुख को हाथ मलने पड़ें। निजी जिंदगी में भी हम इसी तरह कभी रोशनी में पहुंचते हैं तो कभी अंधेरे में ठेल दिए जाते हैं।

By सुशील कुमार सिंह

वरिष्ठ पत्रकार। जनसत्ता, हिंदी इंडिया टूडे आदि के लंबे पत्रकारिता अनुभव के बाद फिलहाल एक साप्ताहित पत्रिका का संपादन और लेखन।

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