कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री मन्नान मलिक का मंगलवार को रांची के एक अस्पताल में निधन हो गया। चिकित्सा संस्थान के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मलिक 83 वर्ष के थे।
उन्होंने बताया कि मलिक को फेफड़ों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह फेफड़ों संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उनका उपचार किया जा रहा था।
अधिकारी के अनुसार, मलिक ने मंगलवार सुबह अंतिम सांस ली। मलिक का पार्थिव शरीर दोपहर में झारखंड विधानसभा लाया गया, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो और अन्य विधायकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सोरेन ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा श्री मन्नान मलिक जी ने जनसेवा और सार्वजनिक जीवन के अपने लंबे कार्यकाल के माध्यम से झारखंड, विशेषकर धनबाद के लोगों की आवाज को मजबूती से उठाया। उनके निधन से राज्य ने एक अनुभवी जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यों से जुड़े नेता को खो दिया है।
महतो ने कहा मलिक जी अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के प्रति समर्पित रहे और उन्होंने लगातार जनता की आवाज उठाई। उनका निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने मलिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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उन्होंने कहा मलिक जी ने अपना पूरा जीवन जनसेवा, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपनी सादगी, ईमानदारी और जनहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से झारखंड की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई थी। उनका निधन न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है।
मलिक दो दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने 2009 में धनबाद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज सिन्हा को 890 मतों से हराया था। इसके बाद वह पशुपालन, मत्स्य पालन और आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री बने थे।
मलिक ने 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में भी धनबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह राज सिन्हा से हार गए थे।
धनबाद की, सांसदों और विधायकों के मामलों की एक विशेष अदालत ने 10 जुलाई को 2011 के मटकुरिया गोलीकांड मामले में पूर्व कांग्रेस विधायक सहित 30 आरोपियों को दोषी ठहराया था।
यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है, जब धनबाद के मटकुरिया में बीसीसीएल की जमीन से कथित अवैध निर्माण ढांचों को हटाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
Pic Credit : ANI
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