महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 36,585 करोड़ रुपये की कृषि कर्ज माफी की घोषणा की है। सरकार के इस कदम से राज्य के 56 लाख से अधिक किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के तीसरे दिन इसकी घोषणा करते हुए कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि यह पहल कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विधानसभा में नियम 293 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए श्री भरणे ने कहा, “महायुति सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के आश्वासनों के मुताबिक, हम एक व्यापक कर्जमाफी लागू कर रहे हैं। यह योजना वर्ष 2009, 2017 और 2019 के पिछले प्रयासों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।
सभी को साथ लेकर चलने के सरकार के रुख पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसी सत्र में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक’ पेश करेगी। इसका उद्देश्य खेतों में पुरुषों का काम करने वाली महिलाओं को औपचारिक कानूनी मान्यता और समान अधिकार देना है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किये जाने के भी अनुकूल है।
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किसान दुर्घटना बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए श्री भरणे ने घोषणा की कि अब इसके तहत खेतिहर मजदूरों को भी सुरक्षा दी जायेगी। इसके अलावा लगातार बढ़ रहे लू के प्रकोप के मद्देनजर अब इससे होने वाली मौतों को भी इस योजना के तहत वित्तीय राहत के लिए योग्य माना जायेगा। मंत्री ने साझा चिंताओं को दूर करते हुए खरीफ सीजन के लिए आश्वस्त किया कि खेती की जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं है। राज्य में 42 लाख टन रासायनिक उर्वरक और 28 लाख टन बीज पहले ही उपलब्ध कराये जा चुके हैं।
उन्होंने ‘लिंकिंग’ बिक्री की गैर-कानूनी प्रथा के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की। इसमें डीलर किसानों को अनुदानित खाद के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। मंत्री ने किसानों को शिकायत दर्ज कराने के लिए एक टोल-फ्री नंबर (1800-233-4000) भी जारी किया। कृषि मंत्री ने फसल बीमा में ‘बीड़ पैटर्न’ (80-110 मॉडल) की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसने बीमा कंपनियों के मुनाफे की सीमा को प्रभावी ढंग से तय कर दिया है, जिसके तहत 96 प्रतिशत योग्य किसानों को पहले ही 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा मिल चुका है।
मंत्री ने किसानों से अपील की कि मानसून की शुरुआत के बावजूद जब तक मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो जाये, तब तक बुवाई के काम में जल्दबाजी न करें। अपने संबोधन के दौरान भावुक होते हुए श्री भरणे ने कहा मैं खुद एक किसान हूं और जब तक मैं अपने खेतों में न चला जाऊं, मुझे नींद नहीं आती। यह सरकार किसानों की है और हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट के समय उन्हें अपने हाल पर न छोड़ दिया जाये।
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