राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

अभिषेक बनर्जी पर हमले से गरमाई राजनीति

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे पर हमले को लेकर टीएमसी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई है।

टीएमसी सांसद पर हुए हमले के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उन्होंने अभिषेक बनर्जी को हेलमेट पहनाया और उन्हें सुरक्षा घेरे में ले लिया। इस घटना के बाद टीएमसी ने कहा कि भाजपा की राजनीति का असली चेहरा आज बेनकाब हो गया। हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला यह दिखाता है कि इस बेशर्म शासन के तहत कानून-व्यवस्था कितनी तेजी से बिगड़ी है। 

अगर विपक्ष के एक मौजूदा सांसद को दिन-दहाड़े निशाना बनाया जा सकता है, तो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बाकी है? क्या भाजपा के लिए लोकतंत्र का यही मतलब है? क्या यही वह सुशासन है, जिसके कसीदे पीएम मोदी पढ़ना बंद नहीं करते? हिंसा, डराना-धमकाना और राजनीतिक गुंडागर्दी भाजपा के शासन की पहचान बन गए हैं। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें आज भले ही राजनीतिक संरक्षण मिला हो, लेकिन वे हमेशा के लिए जवाबदेही से बच नहीं सकते। बंगाल देख रहा है। भारत देख रहा है। पूरी दुनिया देख रही है।

Also Read : पृथ्वी से ज्यादा गड्ढों से भरा है चंद्रमा, जानें क्यों नहीं मिटते क्रेटर्स के निशान

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के ऊपर जानलेवा हमला करवाकर बंगाल की अराजक भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि भाजपा नफरत भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति के सिवा और कुछ नहीं कर सकती है। इतने संवेदनशील वातावरण में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है। घोर निंदनीय।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए चौंकाने वाले हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं। वे राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए थे। एक प्रमुख विपक्षी नेता को जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न देना भाजपा की बदले की राजनीति और उत्पीड़न की मानसिकता को साफ तौर पर उजागर करता है। पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और ऐसे हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। राजनीतिक मतभेद किसी भी प्रकार की हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहरा सकते।

Pic Credit : ANI

By Naya India

Naya India, A Hindi newspaper in India, was first printed on 16th May 2010. The beginning was independent – and produly continues to be- with no allegiance to any political party or corporate house. Started by Hari Shankar Vyas, a pioneering Journalist with more that 30 years experience, NAYA INDIA abides to the core principle of free and nonpartisan Journalism.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

two + 17 =