योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं बल्कि मन और आत्मा को संतुलित करने की एक प्राचीन कला भी है। योग के इन्हीं आसनों में से एक उत्तानमंडूकासन है, जो शरीर में लचीलापन बढ़ाने के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
संस्कृत के दो शब्दों, ‘उत्तान’ (खिंचा हुआ) और ‘मंडूक’ (मेंढक), से मिलकर बने इस आसन की अंतिम मुद्रा में शरीर एक मेंढक के समान दिखाई देता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन रहता है, जिससे पीठ और कमर दर्द होता है। कंधों और गर्दन की मांसपेशियां खिंचती हैं, जिससे जकड़न कम होती है और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इसके अभ्यास को लेकर अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, उत्तानमंडूकासन (उठने वाले मेंढक की मुद्रा) एक महत्वपूर्ण योगासन है। यह आसन पीठ, कंधे और फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। साथ ही, यह पाचन तंत्र पर भी गहरा प्रभाव डालता है। पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ने से पाचन क्रिया सक्रिय होती है, जिससे गैस, अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिल सकता है।
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आज की अनियमित लाइफस्टाइल में जहां लोग घंटों एक ही मुद्रा में रहते हैं, वहां यह आसन मांसपेशियों को ठीक करने, रक्त संचार बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करता है।
योग एक्सपर्ट के अनुसार, इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। इसके बाद दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर पीठ के पीछे ले जाएं। रीढ़ को सीधा रखें, आगे देखें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आएं। शुरुआत में यह 2 से 3 बार करना चाहिए, फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
गंभीर पीठ दर्द या स्लिप डिस्क से पीड़ित लोग, घुटनों में तेज दर्द (अर्थराइटिस) या टखने की समस्या होने पर, पेट की सर्जरी या माइग्रेन होने पर भी इसका अभ्यास न करें।
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