गर्भावस्था के दौरान कमर या पीठ में दर्द होना आम बात है, खासकर शुरुआती कुछ महीनों में। कई महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है। कुछ सरल आयुर्वेदिक उपायों और जीवनशैली में बदलाव से इस दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दरअसल, प्रेगनेंसी के दौरान लिगामेंट्स और जोड़ स्वाभाविक रूप से नरम और खिंचाव वाले हो जाते हैं। इसके कारण न सिर्फ कमर, बल्कि पेल्विक यानी कमर के निचले हिस्से और हिप्स में भी खिंचाव और दर्द महसूस होता है।
इसके साथ ही कभी-कभी गलत पोजिशन में सोने या सॉफ्ट और असमान बिस्तर पर सोने से भी कमर दर्द बढ़ जाता है। इसलिए अपनी नींद और बैठने की आदतों पर ध्यान दें। कोशिश करें कि आप ऐसी पोजिशन में सोएं जिसमें कमर और पीठ को पूरी तरह सपोर्ट मिले। गर्भवती महिलाओं के लिए साइड पर सोना काफी आरामदायक होता है।
Also Read : स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस
आयुर्वेदिक उपायों में सबसे आसान तरीका है तेल मालिश और गर्म सिकाई। हल्का तिल या नारियल का तेल लेकर पीठ और कमर की मालिश करें। इसके बाद हल्की गर्म पानी की सिकाई करने से मांसपेशियों में खिंचाव कम होता है और दर्द में आराम मिलता है। इसे दिन में एक या दो बार करें।
इसके अलावा योगासन भी बहुत मददगार होते हैं। एक्सपर्ट की सलाह से गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ आसान योगासन जैसे भुजंगासन, वृक्षासन और शिशु मुद्रा अपनाए जा सकते हैं। ये आसन न सिर्फ कमर दर्द कम करते हैं, बल्कि पेट के निचले हिस्से और हिप्स की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।
खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है। कुछ ऐसे भोजन हैं जो गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ाते हैं, जैसे आलू, मटर, चना और बेसन। इसके बजाय खाने में जीरा, हींग, अजवाइन, अदरक और घी शामिल करें। ये चीजें पाचन को सुधारती हैं और पेट के साथ कमर दर्द में भी आराम पहुंचाती हैं।
साथ ही, मानसिक तनाव कम करना भी जरूरी है। तनाव और चिंता से मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द बढ़ सकता है। हल्की वॉक, ध्यान या गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।
Pic Credit : ANI
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



