अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने 18 साल पुराने सीरियल ब्लास्ट के मामले में आरोपियों की सजा बरकरार रखी है। हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर लगाई है। असल में 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाके में विशेष अदालत ने 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी और 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस सजा को बरकरार रखा।
दोषियों ने विशेष अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को जस्टिस एवाई कोगजे और समीर दवे की बेंच ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों की सजा को सही ठहराया। हाई कोर्ट ने सरकार को 56 मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपए और दो सौ से ज्यादा घायलों को एक एक लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि मुआवजा राशि का भुगतान 30 मार्च 2027 तक कर दिया जाए। धमाकों के बाद पुलिस ने अहमदाबाद में अलग अलग जगहों पर हुए धमाके और सूरत में मिले बमों के मामलों में अलग अलग एफआईआर दर्ज की थी। बाद में करीब 35 मामलों को मिलाकर एक बड़ा केस बनाया गया। सभी मामलों को एक साथ जोड़ने के बाद 2009 में इस केस का ट्रायल शुरू हुआ। जांच और अदालत की सुनवाई 12 साल तक चली।


