नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के पहले चरण का काम पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने समय सीमा एक हफ्ते बढ़ा दी है लेकिन इसे लेकर विरोध जारी है। इसके साथ ही एसआईआर के काम में लगे बूथ लेवल अधिकारियों की जान जाने का सिलसिला भी जारी है। कई राज्यों में बीएलओ के आत्महत्या करने और मौत की खबरें आ रहीं हैं। उत्तर प्रदेश के संभल में सोमवार को सहायक बीएलओ की सोते सोते मौत हो गई। बताया जा रहा है कि काम के दबाव से उनकी जान गई है।
इससे एक दिन पहले 30 नवंबर को मुरादाबाद में एसआईआर काम में लगे एक शिक्षक ने सुसाइड कर लिया था। यूपी में अब तक आठ कर्मचारियों की जान जा चुकी है। तीन ने आत्महत्या की, तीन की हार्ट अटैक से और एक की ब्रेन हेमरेज से मौत हुई थी। सात राज्यों में अब तक 29 बीएलओ की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में नौ बीएलओ की जान गई है।
इस बीच एसआईआर के विरोध में सोमवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर बीएलओ अधिकार रक्षा कमेटी के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। जिस समय प्रदर्शन हो रहा था उसी समय भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी और पार्टी के कई विधायक चुनाव अधिकारियों के साथ तय मीटिंग के लिए वहां पहुंचे थे। वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं से भी प्रदर्शनकारियों की बहस हुई।


