चेन्नई। एनडीए के बाद अब डीएमके की अगुवाई वाले सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस के बीच सीट बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला तय हो गया है। इस बार गठबंधन में 26 पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन की नेतृत्व कर रही डीएमके 165 सीटों पर लड़ेगी, जबकि कांग्रेस के खाते में 28 सीटें छोड़े जाने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में यानी 2021 में कांग्रेस 25 सीटों पर लड़ी थी और 18 पर जीती थी। इस बार सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने के लिए मैदान में उतरा है। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा।
बताया जा रहा है कि 26 पार्टियों वाले इस गठबंधन में डीएमकी की सहयोगी पार्टियों के लिए कुल 66 सीटें छोड़ी गई हैं। कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा आठ सीटें विदुथलाई चिरुथइगल कच्ची यानी वीसीके को दी गई हैं। सीपीआई और सीपीएम दोनों को पांच पांच सीटें मिली हैं। वाइको की पार्टी एमडीएमके को चार सीट मिली है, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और ह्यूमनिस्ट पीपुल्स पार्टी को दो दो सीटें दी गई हैं। हालांकि गठबंधन की कई पार्टियां डीएमके के चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगी।
मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने बताया कि डीएमके और उसके सहयोगी दल 175 विधानसभा सीटों पर डीएमके के चुनाव चिन्ह उगता सूरज पर साझा रूप से लड़ेंगे। गठबंधन की जानकारी देते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को लिखे पत्र में स्टालिन ने कहा कि सीट बंटवारे की प्रक्रिया सहयोगी दलों के साथ व्यापक विचार विमर्श के बाद पूरी की गई है, ताकि संतुलन और लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में डीएमके सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र करते हुए कहा कि द्रविड़ मॉडल की शासन व्यवस्था ने राज्य में विकास और स्थिरता को फिर से स्थापित किया है।
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