वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के समय में भारत दुनिया के लिए ब्राइट स्पॉट है और स्थिरता के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आर्थिक सर्वेक्षण के बारे में की गई पोस्ट में कहा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है और प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह प्रदर्शन लगातार चौथे वर्ष भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है।
उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हमारे व्यापक आर्थिक आधार पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। हमने वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए भारत को उच्च विकास पथ पर अग्रसर किया है और जीडीपी वृद्धि दर को 7 प्रतिशत तक ले गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार विकास से समझौता किए बिना राजकोषीय समेकन के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 26 के लिए हमारा राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.4 प्रतिशत है।
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वित्त वर्ष 2022 से हमारा पूंजीगत व्यय लगभग 89 प्रतिशत बढ़ गया है, जो वित्त वर्ष 2026 में बजट में निर्धारित 11.21 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.7 प्रतिशत (महामारी से पहले का औसत) से बढ़कर महामारी के बाद 3.9 प्रतिशत हो गया है। हम ऐसी संपत्तियों का निर्माण कर रहे हैं जो एक महत्वाकांक्षी अर्थव्यवस्था की आर्थिक शक्ति के रूप में कार्य करती हैं।
वित्त मंत्री ने पोस्ट में आगे बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लगभग 60 प्रतिशत का विस्तार हुआ है, जो वित्त वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 तक 1.46 लाख किलोमीटर हो गया है, जिससे माल ढुलाई की बाधाएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
बैंकिंग सेक्टर के बारे में बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक का जीएनपीए रेश्यो कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो कि सितंबर 2025 में 2.2 प्रतिशत था। वहीं, वित्त वर्ष 25 में कर के बाद मुनाफा 16.9 प्रतिशत बढ़ा है।
इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण में जिक्र किया गया है कि ‘स्वदेशी’ से ‘रणनीतिक मजबूती’ और फिर ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ की ओर प्रगति यह सुनिश्चित करेगी कि दुनिया “भारतीय उत्पाद खरीदने के बारे में सोचने” से “बिना सोचे-समझे भारतीय उत्पाद खरीदने” की ओर अग्रसर हो। इसे लेकर हमारी सरकार विभिन्न उपायों के माध्यम से देश में विनियमन में ढील देने और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
Pic Credit : ANI
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