नई दिल्ली। ईरान ने फिर दोहराया है कि वह होर्मुज की खाड़ी पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा में उसकी अहम भूमिका है। इसके साथ ही उसने खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने के खिलाफ भी चेतावनी दी। इतना ही नहीं ईरान ने नाटो के देशों पर भी आरोप लगाया है कि और कहा कि उन्होंने युद्ध में अमेरिका की मदद की है। ध्यान रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार बार कहते रहे हैं कि नाटो देशों ने युद्ध में उनकी मदद नहीं की।
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले नाटो के सदस्य देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि नाटो के प्रमुख मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।
बहरहाल, एक दिन पहले गुरुवार को ओमान के पास एक जहाज पर हमला हुआ था, जिसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच हुए शुरुआती युद्धविराम पर सवाल उठने लगे। इस बीच ईरान ने दावा किया कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा। असल में, अमेरिका और खाड़ी के छह देशों ने एक साझा बयान जारी कर कहा था कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाना चाहिए और किसी एक देश का इस समुद्री रास्ते पर अकेले अधिकार नहीं हो सकता। इसके जवाब में ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही भी संभव है, जब तटीय देश होने के नाते ईरान की भूमिका को स्वीकार किया जाए। ईरान को नजरअंदाज करके कोई भी नई व्यवस्था या दूसरा समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता।


