नई दिल्ली। संसद में चल रही महाभियोग की प्रक्रिया के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा। जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे और पिछले साल मार्च में उनके घर में आग लगने की घटना हुई थी, जिस दौरान बोरे में भरे पांच पांच सौ रुपए के नोट मिले थे। कुछ नोट जल गए थे। इसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया था। उन्होंने पांच अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में शपथ ली थी, लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें न्यायिक कामों से दूर रखा गया था।
जस्टिस वर्मा ने नौ अप्रैल को अपना इस्तीफा भेजा था, जिसकी जानकारी एक दिन बाद 10 अप्रैल को सामने आई। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफे में लिखा है, ‘मैं आपके सम्मानित कार्यालय को उन कारणों से परेशान नहीं करना चाहता, जिनकी वजह से मुझे यह पत्र लिखना पड़ रहा है। लेकिन गहरे दुख के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है’। जानकार सूत्रों के मुताबिक विवाद शुरू होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने उनको इस्तीफा देने का विकल्प दिया था। लेकिन तब जस्टिस वर्मा इसके लिए तैयार नहीं हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने 22 मार्च को जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इसने चार मई को चीफ जस्टिस को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया था। बाद में लोकसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। जस्टिस वर्मा ने महाभियोग प्रस्ताव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। अब माना जा रहा है कि इस्तीफे के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच बंद हो जाएगी। हालांकि सरकार चाहे तो एफआईआर दर्ज करके आपराधिक मुकदमा शुरू कर सकती है।


