नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट में बताया गया था कि मतदाता पंजीयन अधिकारी यानी ईआरओ से लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य चुनाव अधिकारी तक को चुनाव आयोग के सेंट्रल डेटाबेस तक पूरी एक्सेस नहीं मिल रही थी। गोवा की घटना के हवाले यह खबर थी। अब महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी यानी सीईओ की चिट्ठी से भी इसकी पुष्टि होती है।
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस चोकलिंगम का 24 सितंबर को लिखी एक चिट्ठी सामने आई है। चोकलिंगम ने इसमें वोटर रिकॉर्ड की गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में ईआरओ को ज्यादा अधिकार देने और सॉफ्टवेयर में चार बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि किसी वोटर के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होनी चाहिए। उनके हिसाब से ईआरओ को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि किस वोटर को सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज लेने हैं और किन मामलों को अपने स्तर पर निपटाया जा सकता है।
गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई थी। बहरहाल, महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने अपनी चिट्ठी में खासतौर से उन मामलों का जिक्र किया, जिनमें रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद मतदाताओं को नोटिस दिया जाता है। उनका कहना है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूसरे कमजोर वर्गों के लोगों को हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि सॉफ्टवेयर में ईआरओ को मामले के हिसाब से फैसला लेने का विकल्प मिलना चाहिए। हालांकि विवाद के बीच 26 सितंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हुई, जिसमें कई नियमों में बदलाव किया गया।
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