कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी भरकम जीत के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ममता ने कहा है कि लोकभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा नहीं देंगी क्योंकि वे मानती हैं कि वे हारी नहीं हैं, बल्कि उनको हराया गया है। ममता ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, ‘मैं सीएम पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने लोकभवन नहीं जाऊंगी’। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता के कहने से कुछ नहीं होता है। सब कुछ संविधान में लिखा हुआ है।
ममता के इस बयान से संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा। परंपरा के मुताबिक ममता बनर्जी को चुनाव हारने के बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देना चाहिए और अगली व्यवस्था होने तक राज्यपाल के आदेश पर कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका निभाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 164 में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति और उन्हें हटाने का प्रावधान है। उसमें साफ लिखा है कि राज्यपाल की कृपा तक मुख्यमंत्री अपने पद पर रहेगा। अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल उनको बरखास्त कर सकते हैं। गौरतलब है कि सात मई को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है और नई विधानसभा में ममता बनर्जी की पार्टी को बहुमत नहीं मिला है।
बहरहाल, ममता बनर्जी मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर एक सौ सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी’। ममता ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘भाजपा ने काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा कर लिया था। मेरे साथ बदसलूकी की। उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के साथ अत्याचार किया’। यह आरोप उन्होंने वोटों की गिनती के दौरान सोमवार को भी लगाए थे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए। बंगाल में भाजपा ने 293 में से 207 सीटें जीत ली हैं। तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिली हैं।
विपक्षी नेताओं के साथ होने का दावा करते हुए ममता ने मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘पार्टी और इंडिया गठबंधन के नेता मेरे साथ हैं। हम फिर से उभरेंगे और शेर की तरह लड़ेंगे’। उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हाकिम और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘वे ऑफिशियली हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हम चुनाव जीते हैं। चुनाव से दो दिन पहले हमारे लोगों को गिरफ्तार किया गया। जगह जगह छापे मारे गए। आईपीएस व आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल हैं। मैंने राजीव गांधी, मनमोहन सिंह, वाजपेयी सहित कई सरकारें देखीं, लेकिन ऐसा अत्याचार कभी नहीं देखा’।


