नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के तीन प्रमुख चेहरों की गिरफ्तारी और बॉन्ड भर कर जेल से छूटने के घटनाक्रम के बाद उनका ग्राफ लगतार गिर रहा है। अब तक सीजेपी के आंदोलन में शामिल होकर उसे ताकत देती रहीं लेफ्ट की छात्र नेता नेहा बोरा ने भी पल्ला झाड़ लिया है। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि 16 अक्टूबर को दिल्ली में हुई सीजेपी की तिरंगा रैली में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
असल में तिरंगा रैली से पहले हिरासत में लिए जाने और कई घंटे के बाद रिहा किए जाने के बाद नेहा बोरा को एक बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया गया। नेहा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है। इसमें उन्हें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपए का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया था। इस मामले में अदालत शुक्रवार शाम छह बजे फैसला सुनाएगी।
इस बीच गुरुवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका को राजौरी गार्डन स्थित अपने ऑफिस में पेश होने के लिए समन भेजा था, लेकिन दोनों क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने पुलिस से और समय मांगा है। पुलिस उन्हें नया नोटिस जारी करेगी। इन दोनों को बुधवार को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कोर्ट से जमानत मिली थी। दोनों को 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा किया गया। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर मंतर से गिरफ्तार किया गया था। दोनों आठ दिन की न्यायिक हिरासत के बाद रिहा हुए।
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