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रथयात्रा में भगदड़, श्रद्धालु की मौत

पुरी। ओडिशा में गुरुवार, 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा परंपरागत विधियों के साथ शुरू हुई। लगातार हो रही बारिश के बीच करीब 10 लाख श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल हुए। पूजा अर्चना और रथयात्रा की तैयारियों के कारण यात्रा शुरू होने में करीब दो घंटे की देरी हो गई। इस बीच भीड़ बढ़ती गई और भगदड़ जैसे हालात बन गए। इस भगदड़ में एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि डेढ़ सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इस बार हादसा मरीचिकोट छक और सिंहद्वार के पास हुआ, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना में डेढ़ सौ से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए, जिनका इलाज पुरी जिला मुख्य चिकित्सालय में चल रहा है। हर साल रथयात्रा में बढ़ती भीड़ की वजह से जिला प्रशासन ने रथयात्रा के लिए 13 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। इसके अलावा चार सौ से अधिक पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।

बहरहाल, गुरुवार की सुबह भगवान जगन्नाथ की मंगल आरती, मैलम, अवकाश पूजा, सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा, गोपाल बल्लभ के बाद सकाल धूप में खिचड़ी भोग लगाया गया। इसके बाद मंगलार्पण, रथ प्रतिष्ठा, डोर लागी और पुष्पांजलि की विधियां पूरी की गईं। इसके बाद सबसे पहले मदन मोहन, फिर श्रीरामकृष्ण और चक्रराज सुदर्शन रथ पर विराजमान हुए। इसके बाद बड़े ठाकुर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ रथ पर विराजमान हुए।

इसके बाद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तीनों रथों की परिक्रमा की। फिर भगवान के प्रथम सेवक गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने तीनों रथों पर छेरा पहंरा की परंपरा निभाई। उन्होंने रथ के आगे झाड़ू लगाई और रथयात्रा शुरू हुई। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, मार्केट छक के पास भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ कुछ ही दूरी तक आगे बढ़ पाए। अब यात्रा शुक्रवार सुबह गुंडीचा मंदिर के लिए रवाना होगी।

रथयात्रा के अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे।

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By NI Desk

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