नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का दूसरी चरण पूरा करने की समय सीमा सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते और बढ़ा दी है। सर्वोच्च अदालत ने अंतिम मतदाता सूची जारी करने के लिए 14 अप्रैल की सीमा को बढ़ा कर 21 अप्रैल कर दिया है। सोमवार को इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बरदाश्त नहीं की जाएगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह बात सभी राज्यों के लिए है। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में एसआईआर से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई एफआईआर नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने बंगाल के डीजीपी से जवाब मांगा है। गौरतलब है कि इससे पहले चार फरवरी को हुई सुनवाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत में दलीलें पेश की थीं।
बहरहाल, सोमवार की सुनवाई में अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को मंगलवार शाम पांच बजे तक उन 8,505 अफसरों की सूची जमा करने का निर्देश दिया, जिन्हें वह तैनात करने का प्रस्ताव दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग इन अधिकारियों के बायोडाटा की जांच करके इनमें से उतने अधिकारियों की छंटनी कर सकती है, जितने माइक्रो ऑब्जर्वर उसने लगाए हैं। इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है। लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि ये अधिकारी सिर्फ प्रक्रिया में मदद करेंगे। अंतिम फैसला मतदाता पंजीयन अधिकारी यानी ईआरओ का होगा।


