नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को केंद्र सरकार ने सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंगलवार को केंद्र सरकार ने कहा कि सोनम वांगचुक को इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वे पाकिस्तान और चीन से सटे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में लोगों को भड़का रहे थे। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच लद्दाख हिंसा से जुड़े मामले में वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत वांगचुक को गिरफ्तार करने का आदेश देने से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। गौरतलब है कि, 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वांगचुक ने कहा था कि लद्दाख के लोगों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं है, जबकि चीन और तिब्बत जैसे इलाकों को स्वायत्त अधिकार मिले हुए हैं। मेहता ने कहा कि अगर कोई चीनी नागरिक ऐसी बात कहता, तो समझ में आता। यह सैंडविच की तरह है। एक तरफ भी गांधीजी की बात, दूसरी तरफ भी गांधीजी की बात। लेकिन बीच में जो कहा जा रहा है, वही चिंता का विषय है। उन्होंने वांगचुक के लिए कहा कि यह व्यक्ति पाकिस्तान और चीन से सटे सीमा इलाके में लोगों को भड़का रहा है। सरकार ने कहा कि वांगचुक के बयान देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।
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