नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा हफ्ता जबरदस्त हंगामे के साथ शुरू हुआ और मंगलवार को लगातार दूसरे दिन हंगामा जारी रहा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर मंगलवार को भी हंगामा हुआ। राहुल ने दोपहर दो बजे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अभी तक नहीं छपी किताब का एक हिस्सा पेश किया, जो आर्टिकल के रूप में एक पत्रिका में छपा है। इसके बाद उन्होंने कहा, ‘मुझे बोलने दिया जाए’।
लेकिन उनके इतना कहते ही एनडीए के सांसदों ने टोकना शुरू कर दिया। मंगलवार को वे 14 मिनट तक बोलने की कोशिश करते रहे। इस बीच हंगामा तेज होता गया। राहुल ने सोमवार को करीब 45 मिनट तक अपनी बात कहने की कोशिश की थी। मंगलवार को हंगामा बढ़ने पर आसन पर बैठे कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल को रोका और दूसरी पार्टियों के सांसदों को बोलने को कहा, लेकिन राहुल के समर्थन में सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल, तृणमूल सांसद शताब्दी रॉय और डीएमके सांसद डी एम कातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी ने बाद में स्पीकर को चिट्ठी भी लिखी और उनसे कहा कि सदन की पुरानी परंपराओं और नियमों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है और नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है। राहुल ने कहा कि उन्होंने पत्रिका में छपे लेख को सत्यापित किया है और उसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं, फिर भी उनको नहीं बोलने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर सदस्य के अधिकार की रक्षा करना स्पीकर की संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल की चिट्ठी साझा की।
बहरहाल, मंगलवार की कार्रवाई के दौरान विपक्षी सांसद नारेबाजी करते वेल में पहुंच गए। आसन पर बैठे कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी की की तरफ विपक्षी सांसदों ने पेपर उछाले। इसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। बाद में पीठासीन दिलीप सैकिया ने आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया।


