नई दिल्ली। केंद्र सरकार विकास दर यानी जीडीपी और महंगाई मापने का पैमाना बदलने जा रही है। अगले साल फरवरी में सरकार नई सीरीज जारी करेगी, जिसके बाद जीडीपी और महंगाई का आकलन दूसरे पैमाने पर होगा। कहा जा रहा है कि महंगाई की बास्केट में खाने पीने की चीजों का वजन सरकार घटाने जा रही है। गौरतलब है कि इस समय 50 फीसदी से ज्यादा वजन खाने पीने की चीजों का है। तभी इनकी कीमतें बढ़ने पर महंगाई में बड़ी बढ़ोतरी हो जाती है।
बहरहाल, फरवरी 2026 से खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई और देश की विकास दर के आंकड़े नई सीरीज यानी नए बेस ईयर के साथ जारी किए जाएंगे। इसके बाद मई 2026 से औद्योगिक उत्पादन यानी आईआईपी के आंकड़े भी नई सीरीज में जारी होंगे। जीडीपी और आईआईपी के लिए नया आधार वर्ष 2022-23 होगा। वहीं खुदरा महंगाई दर के लिए आधार वर्ष 2024 होगा।
बताया जा रहा है कि सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। गौरतलब है कि अभी जीडीपी और खुदरा महंगाई के आंकड़े पुराने आधार वर्ष 2011-12 के हिसाब से आकलित किए जाते हैं। जबकि दुनिया के कई देशों में ये हर पांच साल में बदल जाते हैं। बेस ईयर में इस बदलाव का मुख्य मकसद डाटा को मौजूदा दौर की जरूरतों और खपत के हिसाब से ज्यादा सटीक बनाना है।


