inflation

  • जीडीपी और महंगाई मापने का पैमाना बदलेगा

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार विकास दर यानी जीडीपी और महंगाई मापने का पैमाना बदलने जा रही है। अगले साल फरवरी में सरकार नई सीरीज जारी करेगी, जिसके बाद जीडीपी और महंगाई का आकलन दूसरे पैमाने पर होगा। कहा जा रहा है कि महंगाई की बास्केट में खाने पीने की चीजों का वजन सरकार घटाने जा रही है। गौरतलब है कि इस समय 50 फीसदी से ज्यादा वजन खाने पीने की चीजों का है। तभी इनकी कीमतें बढ़ने पर महंगाई में बड़ी बढ़ोतरी हो जाती है। बहरहाल, फरवरी 2026 से खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई और देश की विकास दर...

  • जो अंदर की बात

    ताजा ट्रेंड में एक गंभीर चिंता का पहलू छिपा है। लगातार पांच महीने से खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति गिर रही है। इससे उद्योगिक उत्पादों की तुलना में खाद्य पदार्थ सस्ते हो रहे हैं। कृषि निर्भर आबादी के लिए यह चिंताजनक खबर है। अक्टूबर में मुद्रास्फीति की दर महज 0।25 प्रतिशत रही। 2012 में- जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की मौजूदा शृंखला शुरू हुई- उसके बाद से कभी मुद्रास्फीति इतनी कम नहीं रही। चूंकि ऐसा अक्टूबर में हुआ, यह लाजिमी है कि इसे जीएसटी में 22 सितंबर से लागू हुई कटौती का सकारात्मक नतीजा बताया जाए। खुद केंद्र ने भी इसे इसी रूप...

  • महंगाई दर बनाम मांग

    डब्लूपीआई के गिरने का अर्थ है कि थोक खरीद में गिरावट आई। मतलब यह कि कारोबारियों को अगले दो या तीन महीनों में बाजार में मांग बढ़ने की संभावना नजर नहीं आती। ऐसा जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद हुआ है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति दर गिर कर 0.13 प्रतिशत पर चली गई। उधर बीते महीने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 1.54 प्रतिशत रही, जिसे आठ साल में सबसे कम बताया गया है। डब्लूपीआई के गिरने का अर्थ है कि थोक खरीद में गिरावट आई। मतलब यह कि कारोबारियों को...

  • महंगाई पर सरकार और आरबीआई की अलग राय

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी पूरी सरकार और साथ साथ भारतीय जनता पार्टी जीएसटी में कटौती को बचत उत्सव के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि इससे देश के लोगों के ढाई लाख करोड़ रुपए बचेंगे। हर चीज के सस्ता होने का ढोल पीटा जा रहा है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक को इससे इत्तेफाक नहीं है। रिजर्व बैंक ने दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बुधवार को रिपोर्ट जारी की तो उसमें कहा कि जीएसटी कटौती का बहुत ज्यादा असर महंगाई पर नहीं पड़ेगा। आरबीआई...

  • महंगाई घटने का गणित

    मुद्रास्फीति दर का घटना तब मांग को प्रोत्साहित करता है, जब आम आमदनी भी बढ़े। ऐसा होने का संकेत नहीं है। फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर बढ़ रही चुनौतियां हैं, जिनकी वजह से ताजा राहत अल्पकालिक साबित हो सकती है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर जुलाई में आठ साल के सबसे निचले स्तर- यानी 1.55 प्रतिशत रही। खाद्य पदार्थों की महंगाई दर को अलग कर दें, तो कोर यानी मुख्य मुद्रास्फीति दर 4.1 फीसदी रही, जो जून में 4.4 प्रतिशत थी। यानी कुल मिलाकर महंगाई बढ़ने की दर में गिरावट का ट्रेंड है। बहरहाल, इससे यह धारणा...

  • खुदरा व थोक महंगाई दर में कमी

    नई दिल्ली। खाने पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट की वजह से खुदरा महंगाई दर में कमी आई है। जून के महीने के खुदरा महंगाई दर घट कर 2.10 फीसदी पर आ गई है। यह 77 महीने का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जनवरी 2019 में खुदरा महंगाई दर 2.05 फीसदी रही थी। जून के महीने में थोक महंगाई दर भी कम होकर माइनस 0.13 फीसदी पर आ गई, जो पिछले 20 महीने का इसका सबसे निचला स्तर है। अगर महीने दर महीने की बात करें तो मई 2025 में खुदरा महंगाई दर 2.82 फीसदी...

  • मूल्य-वृद्धि की विडंबनाएं

    विडंबना ही है कि वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बीच जिस रोज कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव में भारी गिरावट आई और यह प्रति बैरल 60 डॉलर के करीब पहुंच गया, केंद्र ने उसी दिन उपभोक्ताओं पर नया बोझ डाला। मोदी सरकार ने पेट्रोलियम उपभोक्ताओं पर नया बोझ डाला है। रसोई गैस की कीमत 50 प्रति सिलिंडर बढ़ा दी गई है। यह बढ़ोतरी उज्ज्वला योजना के तहत दिए जाने वाले सिलिंडरों पर भी लागू होगी। उधर पेट्रोल और डीजल पर दो-दो रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया है। विडंबना ही है कि दुनिया में आर्थिक मंदी की गहराई आशंकाओं के...

  • महंगाई दर घटी, औद्योगिक विकास में तेजी

    नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर बुधवार को सरकार के लिए दो अच्छी खबरें आईं। पहली खबर तो यह है कि खुदरा महंगाई दर में अच्छी खासी गिरावट आई है और यह सात महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी ओर औद्योगिक उत्पादन की दर आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.61 फीसदी पर आ गई है। इससे सात महीने पहले जुलाई 2024 में महंगाई 3.54 फीसदी पर थी। इस साल जनवरी में महंगाई दर 4.31 फीसदी थी। कहा...

  • सब चलता है में सब जस का तस!

    Republic day 2025: समाज के मध्यम वर्ग को समाज के हित में सक्रिय होना होगा। मशाल लेकर खड़ा होना होगा। टीवी सीरियलों और उपभोक्तावाद के चंगुल से बाहर निकल कर अपने इर्द-गिर्द की बदहाली पर निगाह डालनी होगी। ताकि हमारा खून खौले और हम बेहतर बदलाव के निमित्त बन सके। विनाश के मूक दृष्टा नहीं। तब ही हम सही मायने में आजाद हो पायेंगे। हमने आज़ादी के नाम पर गोरे साहबों को धक्का देकर काले साहबों को बिठा दिया। पर काले साहब तो लूट के मामले में गोरों के भी बाप निकले। बीते कई दशकों से ऐसा देखने में आया...

  • मध्य वर्ग की मुश्किलें

    महंगाई और सामान्य आमदनी ना बढ़ने से ग्रस्त भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे पहली चोट 50,000 रुपये मासिक से कम आय वाले परिवारों पर पड़ी। अब 50 हजार से एक लाख रुपए आमदनी के बीच वाले परिवार प्रभावित हो रहे हैं। बाजार की एजेंसियां जब मध्य वर्ग के ह्रास की बातें करने लगें, तो समझा जा सकता है कि आर्थिक संकट कितना गहरा हो चुका है। मध्य वर्ग किसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। यही तबका है, जिसके उपभोग की आकांक्षाएं लगातार बढ़ रही होती हैं। मध्य वर्ग का आकार बढ़ रहा हो, तो अर्थव्यवस्था में मांग, निवेश, उत्पादन और वितरण...

  • महंगाई ने मारा डाला है

    कोरोना महामारी के बाद से गणना की जाए, तो तमाम जरूरी चीजें दो से तीन गुना तक महंगी हो चुकी हैं। कितने लोगों की आमदनी इसी अनुपात में बढ़ी है? मुश्किल से ऐसे 20 फीसदी लोग होंगे। मतलब, 80 प्रतिशत आबादी का जीवन स्तर गिरा है। पहले आसान भाषा में गौर करें। सितंबर में मुद्रास्फीति दर 5.5 प्रतिशत थी। यानी जो वस्तु अगस्त में 100 रुपये की थी, वह सितंबर खत्म होते-होते 105.50 रुपये की हो गई। अक्टूबर में कीमतों में औसत वृद्धि 6.2 फीसदी की हुई। यानी वही वस्तु लगभग 112 रुपये की हो गई है। इस खाद्य महंगाई...

  • महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ा

    नई दिल्ली। अक्टूबर के महीने में महंगाई ने 14 महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साथ ही वह रिजर्व बैंक की ओर से तय की गई खुदरा महंगाई की अधिकतम सीमा को भी पार कर गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने पीने की चीजों की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से अक्टूबर में खुदरा महंगाई की दर ब ढ़कर 6.21 फीसदी पर पहुंच गई है। यह महंगाई का 14 महीनों का उच्चतम स्तर है। इससे पहले अगस्त 2023 में महंगाई दर 6.83 फीसदी रही थी। गौररतलब है...

  • ये थाली किसकी चिंता?

    महंगाई बढ़ने और उसके अनुरूप आमदनी ना बढ़ने पर पहली कोशिश भोजन को अप्रभावित रखने की होती है। जब भारत में बहुत से लोग थाली में भी कटौती करने पर मजबूर हैं, तब बाकी उपभोग पर उसकी मार पड़ना लाजिमी है। मार्केट रेटिंग फर्म क्राइसिल की थाली की लागत के बारे में ताजा रिपोर्ट फिर से इस हकीकत पर रोशनी डालती है कि भारत में आम इनसान की जिंदगी कितनी मुहाल होती जा रही है। क्राइसिल का ताजा अनुमान है कि सिर्फ एक महीने- अक्टूबर में शाकाहारी थाली की औसत लागत 20 प्रतिशत बढ़ी। बढ़ोतरी का ये सिलसिला लंबा हो...

  • खाद्यान्नों की महंगाई नहीं रूक रही!

    एक बार फिर सरकार की ओर से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी हुए हैं और एक बार फिर कहा गया है कि खाने पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है। जब भी महंगाई दर बढ़ती है तो लगभग हर बार यही कारण होता है कि खाने पीने की चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। इस बार जो आंकड़ा आया है यानी सितंबर, 2024 का उसमें कहा गया है कि खाने पीने की महंगाई दर 5.66 फीसदी से बढ़ कर 9.24 फीसदी हो गई। इसी वजह से...

  • खुदरा महंगाई दर बढ़ कर 3.65 फीसदी हुई

    नई दिल्ली। खाने पीने की चीजों और सब्जियों की कीमत की वजह से खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी हो गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई की दर अगस्त महीने में बढ़ कर 3.65 फीसदी हो गई है। जुलाई महीने में यह घट कर 3.54 फीसदी पर आ गई थी। ये महंगाई का करीब पांच साल का सबसे निचला स्तर था। हालांकि महंगाई दर अब भी रिजर्व बैंक की ओर से तय की गई चार से छह फीसदी की सीमा के अंदर है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने पीने की चीजों महंगाई दर जुलाई...

  • मुद्रास्फीति सिर्फ 3.54 प्रतिशत!

    नई दिल्ली। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी और तुलनात्मक आधार प्रभाव के कारण खुदरा महंगाई जुलाई में घटकर 3.54 प्रतिशत पर आ गयी। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। करीब पांच साल में यह पहला मौका है जब मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे आई है। सितंबर 2023 से मुद्रास्फीति छह प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जून में 5.08 प्रतिशत थी। जबकि बीते साल जुलाई में यह 7.44 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की...

  • भारत ‘विकसित’ नहीं चौतरफा लड़खड़ा रहा है!

    नरेंद्र मोदी सरकार में इस विद्रूपता से भारत की इच्छाशक्ति और समझ का सिरे से अभाव है। बेरोजगारी और महंगाई जैसे प्रश्नों पर वह नव-उदारवादी फॉर्मूलों पर पुनर्विचार करने तक को तैयार नहीं है। चूंकि हाल के आम चुनाव में इन दोनों समस्याओं के कारण उसे गंभीर झटके लगे, इसलिए वह इस दिशा में कुछ करते तो दिखना चाहती है, लेकिन सचमुच कुछ करना नहीं चाहती! …महंगाई के सवाल पर तो उसने आत्म-समर्पण कर दिया है। बेरोजगारी का जो समाधान उसने पेश किया है, उसे दिखावटी से ज्यादा कुछ मानने का तर्क नहीं है। तो विचारणीय प्रश्न यह है कि...

  • रसोई के जायके में लगा मंहगाई का तड़का, प्याज-टमाटर के बाद आलू भी हुआ महंगा

    expensive potato: एक रसोई में सबसे पसंदीदार और महत्वपूर्ण सब्जियां होती है आलू-प्याज-टमाटर. आलू-प्याज-टमाटर सबसे महत्वूर्ण जायका माना जाता है. सब्जियों के महंगी होने के कारण रसोई का बजट और स्वाद दोनों बिगड़ जाते है. पिछले कुछ दिनों में प्याज और टमाटर ने अपने भाव बढाए थे. और अब रसोई में महत्वपूर्ण आलू भी मंहगा हो गया है. लेकिन सरकार इसके लिए विभिन्न उपायों पर विचार कर रही है. (expensive potato) रसोई के बिगड़े बजट से परेशान आम लोगों को आने वाले दिनों में राहत मिल सकती है. सरकार आलू की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए विभिन्न योजनाएं बना...

  • अमीरी-गरीबी की बढ़ती खाई, महंगाई, बेरोजगारी बड़ी चुनौती : कांग्रेस

    नयी दिल्ली | कांग्रेस ने कहा है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को अपना सातवां बजट पेश करेंगी और इसको लेकर वह उद्योगपतियों, बैंकर्स, किसान संगठनों से बात कर चुकी है, लेकिन देश में सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी, महंगाई और अमीर गरीब के बीच बढ़ती खाई है जिसे कम करने के लिए उनके इरादे स्पष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। अमीरी-गरीबी की खाई कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बड़ा संकट यह है कि देश की एक फीसदी आबादी के पास लगभग आधा संपत्ति है जिसके कारण गरीबी और...

  • महंगाई को लेकर कांग्रेस का मोदी पर तीखा हमला, कहा कि गरीब का निवाला छीनकर अपने…

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने महंगाई को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गरीब का निवाला छीनकर अपने दोस्तों को देते हैं इसलिए महंगाई से पीड़ित गरीब की तकलीफ से उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कांग्रेस पार्टी (Congress) ने कह कि जनता पर 'महंगाई मैन' मोदी का चाबुक फिर चला। थोक महंगाई दर ने एक साल चार महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और सब्जियों से लेकर खाने की वस्तुओं में बेतहाशा महंगाई दर्ज हुई है। कांग्रेस (Congress) ने आवश्वयक वस्तुओं की महंगाई (Inflation) का आंकड़ा देते हुए ट्वीट कर आज कहा “खाद्य वस्तुओं...

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